करबला में हुए शहीदाें की याद में दिन-रात मनेगा मातम

Muzaffarpur News - करबला वह पवित्र स्थल है, जहां इमाम हुसेन और उनके 71 साथी शहीद हुए थे। यह शहादत 10 मुहर्रम 61 हि. काे हुई। उनकी शहादत के...

Bhaskar News Network

Oct 18, 2019, 08:11 AM IST
Katra News - in the memory of the martyrs in karbala weeds will be mourned day and night
करबला वह पवित्र स्थल है, जहां इमाम हुसेन और उनके 71 साथी शहीद हुए थे। यह शहादत 10 मुहर्रम 61 हि. काे हुई। उनकी शहादत के बाद उनके घरवालाें काे यदीदी फाैज ने चहल्लुम तक मनाने नहीं दिया। यही नहीं, इनके घरवालाें और संबंधियाें काे कैद करके शाम (सीरिया) के कैदखाने में डाल दिया। उन्हें एक साल तक कैदखाने में रखा गया। यहां तक कि इमाम हुसेन की बेटी, जिनका नाम शकीना था, उसी कैदखाने में भूख और प्यास से तड़पती रही और इसी हालत में उनकी माैत हाे गई। इसके बाद यदीद काे खाैफ हुआ कि कहीं अवाम विद्राेह न कर दे। इसके बाद उसने इन सभी लाेगाें काे कैदखाने से आजाद कर दिया। उसने कहा कि आप सभी पूरी तरह आजाद हैं और चाहें ताे यहीं रहें या चाहें ताे अपने वतन मदीना लाैट जाएं। इमाम हुसेन की बहन का नाम जैनब था। जनाबे जैनब ने कहा कि सबसे पहले हमारे लिए एक घर खाली कराे, ताकि हम शहीदाें का मातम कर सकें। इसके बाद जनाबे जैनब ने कहा कि हम करबला हाेकर मदीना जाएंगे। इसके बाद वाे लाेग वहां से चले और 20 चहल्लुम काे करबला पहुंचे। 20 सफर यानी एेन चेहल्लुम के दिन वे सभी करबला पहुंचे थे। यहां पहुंचकर सभी ने अपने-अपने शहीदाें की कब्र पर मातम मनाया। खूब राेेए।

सैयद मुजफ्फर रजा, इमाम-ए-जुमा, बाउली मस्जिद, पटना सिटी

पटना सिटी स्थित बाउली इमामबाड़ा, जहां से मातमी जुलूस निकलेगा।

बाउली इमामबाड़े से निकलेगा मातमी जुलूस

उसी करबलावालाें की शहादत की याद में हर साल दुनिया भर में 20 सफर काे मातमी जुलूस निकाला जाता है। इसी अवसर पर पटना सिटी में भी चेहल्लुम बड़े पैमाने पर हाेता है और इसमें पटना की सभी मातमी अंजुमनें सिरकत करती हैं। 20 अक्टूबर काे पटना सिटी के बाउली इमामबाड़े से दुलदुल का जुलूस निकलेगा। जुलुस में तीन खास चीजें हाेती हैं-दुलदुल का घाेड़ा, इमाम हुसेन की ताबूत और हजरत अब्बास की अलम। यह जुलूस सुबह साढ़े दस बजे निकलेगा और अशाेकराज पथ हाेता हुआ लगभग शाम पांच बजे नाैजर कटरा इमामबाड़े पहुंचेगा। फिर रात लगभग आठ बजे बाउली इमामबाड़े से ही मातमी जुलूस निकलेगा, जाे अशाेकराज पथ हाेते हुए शाह बाकर की तकिया तक जाएगा। यहां पहुंचने में जुलूस काे रात के दाे बज जाते हैं।

ये अंजुमनें मातमी जुलूस में हाेंगी शामिल

जुलूस में नाैहाखामी और सीनाजनी करके मातम मनाते हुए लाेग चलते हैं। सुबह के मातमी जुलूस में ये अंजुमनें हिस्सा लेती हैं- अंजुमन पंजतनी, अंजुमन-ए-हुसेनिया, अंजुमन-ए-दस्पा-ए-सज्जादिया, अंजुमन-ए-हाशमिया। रात के मातमी जुलूस में इन अंजुमनाें के अलावा अंजुमन-ए-अब्बासिया, अंजुमन-ए-सज्जादिया, अंजुमन-ए-हैदरी सहित सभी अंजुमनें हिस्सा लेंगी। जब इन अंजुमनाें से जुड़े लाेग मातमी जुलूस में नाैहाखानी और सीनाजनी करते हुए चलते हैं, ताे पूरा माहाैल गमगीन हाे जाता है।

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