ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के साथ देश में न्यायिक प्रक्रिया शुरू

Muzaffarpur News - एजुकेशन रिपाेर्टर|मुजफ्फरपुर देश में न्यायिक प्रक्रिया की शुरुअात ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के साथ हुई।...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:15 AM IST
Muzaffarpur News - judicial process started in the country with the establishment of east india company
एजुकेशन रिपाेर्टर|मुजफ्फरपुर

देश में न्यायिक प्रक्रिया की शुरुअात ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना के साथ हुई। इसी परिप्रेक्ष्य में 1726 में राजलेख पारित हुअा, जाे ईस्ट इंडिया कंपनी के द्वारा भारत में न्यायिक प्रणाली काे सफल एवं समरूप बनाने का प्रयास था। पहले एेसी न्यायिक प्रणाली सिर्फ तटीय शहराें जैसे काेलकाता, मद्रास व मुंबई में लागू थी।

इसके बाद पूरे भारत में इसे लागू किया गया। इसका एक कारण यह भी है कि पहले पूरे देश में ईस्ट इंडिया कंपनी का राजनीतिक नियंत्रण नहीं था। उक्त बातें श्रीकृष्ण जुबली लाॅ काॅलेज के प्राचार्य प्राे. जयंत कुमार ने कही। वह मंगलवार काे लाॅ काॅलेज के सभागार मेें यूनिफाॅर्म ज्यूडिशियल एडमिनिस्ट्रेशन अंडर दी चार्टर अाॅफ 1726 इन द प्रेसीडेंसी टाउंस अाॅफ इंडिया विषय पर अायाेजित सेमिनार काे संबाेधित कर रहे थे। उन्हाेंने कहा कि मेयर्स के गठन एवं उसमें न्यायिक एकरूपता काे प्रेसिडेंसी शहराें में लागू करने की प्रक्रिया की भी शुरुअात कंपनी ने की। कार्यक्रम की शुरुअात बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे डाॅ. उज्ज्वला मिश्रा ने कहा कि विधिक के छात्राें काे देश के संवैधानिक व विधिक इतिहास की पूर्ण जानकरी हाेनी चाहिए। वहीं मुख्य अतिथि के रूप में बिहार विश्वविद्यालय के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डाॅ. देवव्रत अकेला ने चार्टर शब्द का अर्थ बताया। इसे स्पष्ट करते हुए उन्हाेंने कहा िक यह र्इस्ट इंडिया कंपनी की राजनीतिक एवं वाणिज्यिक क्रियाकलाप था। इसका उद्देश्य पूरे भारत में न्यायिक प्रणाली काे समरूप बनाकर लागू करना था।

कहा-छात्रों को संवैधानिक व विधिक इतिहास की जानकारी जरूरी

सेमिनार के दौरान दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत करते अतिथि।

मेयर काेर्ट के अंर्तगत दिवानी एवं वसीयत के मामले देखे जाते थे

सेमिनार में विचार रखते हुए डाॅ. एसपी चाैधरी ने कहा कि मेयर काेर्ट के अंर्तगत दिवानी एवं वसीयत संबंधी मामले देखे जाते थे। इसमें काेर्ट अाॅफ रिकार्ड एवं न्यायालय की अवमानना का भी प्रावधान था। यह कानून विशेष रूप से अंग्रेजाें की थी। वहीं प्राे. बीएम अाजाद ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए 1726 के चार्टर मंंे एकीकृत न्यायिक प्रशासन के प्रावधानाें पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस माैके पर प्राे. प्रभात किशाेर, प्राे. अानंद कुमार, प्राे. पंकज कुमार, प्राे. अारएस शाही, प्राे. सीमा कुमारी, राकेश कुमार, प्रेमभूषण कुमार, केपी सिंह, रीमा कुमारी, नीरा कुमारी, अशाेक सिंह, जीवेश किशाेर, प्रत्यय अमृत, छाया, ऋचा, विक्रम सहित अन्य लाेग उपस्थित थे।

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