भगवान महावीर ने पहले खुद ही अपनाया अहिंसा का मार्ग

Muzaffarpur News - जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती बुधवार काे जन्म कल्याणक दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इसके बाद...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 08:21 AM IST
Muzaffarpur News - lord mahavira himself adopted the path of non violence first
जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती बुधवार काे जन्म कल्याणक दिवस के रूप में मनाई जाएगी। इसके बाद सैकड़ाें श्रद्धालुअाें का जत्था वैशाली के बाैना पाेखर से बासाेकुंड स्थित भगवान महावीर की जन्मस्थली तक निकलने वाली विशाल शाेभा यात्रा में भाग लेने के लिए शहर से रवाना हाेगा।

इससे पूर्व माेतीझील स्थित श्री जैन दिगम्बर मंदिर में भगवान महावीर का अभिषेक कर श्रीफल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की जाएगी। महाअारती के पश्चात लाेग महावीर के बताए सत्य एवं अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए लाेगाें काे प्रेरित करेंगे। दिगम्बर जैन मंदिर कमेटी के महामंत्री रवींद्र कुमार जैन ने बताया कि भगवान महावीर का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को 599 ईसवी पूर्व बिहार में लिच्छवी वंश के महाराज सिद्धार्थ और महारानी त्रिशला के घर हुआ था। उनके जन्म के बाद राज्य दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा था। जिसके चलते इनका नाम वर्धमान रखा गया। जैन ग्रंथों के अनुसार, 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथजी के निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त करने के 188 वर्ष बाद भगवान महावीर का जन्म हुआ था। अहिंसा परमो धर्म: अर्थात अहिंसा सभी धर्मों से सर्वोपरि है। यह संदेश उन्होंने पूरी दुनिया को दिया व संसार का मार्गदर्शन किया। पहले स्वयं अहिंसा का मार्ग अपनाया और फिर दूसरों को इसे अपनाने के लिए प्रेरित किया। ‘जियो और जीने दो’ का मूल मंत्र भगवान महावीर की देन है।

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