मुजफ्फरपुर / गर्मी से जिले में एक हजार एकड़ में लगी लीची सूखकर हो रही बर्बाद, जूस निकालने की फैक्ट्रियां भी बंद



Lychees Drying due to heat in muzaffarpur
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Lychees Drying due to heat in muzaffarpur

  • अत्यधिक गर्मी से 50 फीसदी तक जले छिलके वाली लीची जूस कंपनियों काे दे रहे थे किसान
  • जूस कंपनियां बंद होने से अब नहीं मिल रहे लीची के खरीदार, किसान परेशान

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2019, 05:25 AM IST

मुजफ्फरपुर (अरविंद कुमार). माैसम की मार से जिले के लीची उत्पादक किसानों की सांसें फूल रही है। अब तक कुल उत्पादित करीब 50 फीसदी लीची या तो झुलस गई अथवा फट गई। जिस कारण बड़ी मात्रा में लीची बाहर के बाजारों तक नहीं पहुंच सकी। इसकी बड़ी वजह यह रही कि इस वर्ष 5 मई से ही तापमान 40 डिग्री से ऊपर चला गया।

 

हालांकि, इससे लीची की पल्पिंग करने वाली फैक्ट्रियों की चांदी रही। पिछले कुछ वर्षों की स्थिति काे देखते हुए इन कंपनियों ने इतना अधिक माल मिलने की बात सोची भी नहीं थी। परिणाम यह रहा कि जिले में अभी करीब एक हजार एकड़ में लीची की फसल लगे हाेने के बाद भी जूस निकालने वाली कंपनियों ने दाे दिन पहले ही अपनी फैक्ट्रियों काे बंद कर दिया है। अब किसान अपनी लीची का क्या करें, यह साेच कर परेशान हैं। वर्तमान समय उनके फल की कीमत 10 रुपए किलाे भी देने को काेई तैयार नहीं है। दूसरी अाेर फलाें की तुराई नहीं करने पर अगले वर्ष भी उत्पादन पर संकट खड़ा हो गया है। 

 

जूस कंपनियों ने बंद कर दी लीची की पेराई

लीचीका इंटरनेशनल के प्रोपराइटर केएन ठाकुर ने बताया कि लाेगाें काे उम्मीद नहीं थी कि इतना मात्रा में पेराई के लिए माल मिलेगा। पूर्व में निर्धारित क्षमता के अनुसार सभी ने प्रिजर्वेटिव की व्यवस्था की थी तथा पैकेजिंग के लिए डिब्बा मंगवाया था। अब तक जिले में 50 हजार टन लीची का पल्प निकाला जा चुका है। अब पल्प काे सुरक्षित रखने वाले प्रिजर्वेटिव काे मुम्बई से मंगवाने पर तथा गुजरात से डिब्बा मंगवाने में एक सप्ताह का समय लगेगा। एेसे में सभी ने अपनी क्षमता के अनुसार पल्पिंग कर फैक्ट्रियों काे बंद कर दिया है। 


100 छोटी व बड़ी कंपनियां खरीद रही थीं प्रतिदिन 300 ट्रक लीची 
किसान राम साेगारथ सिंह व संटू महताे ने बताया कि दाे दिन पूर्व तक इस प्रकार की लीची का 11 से 22 रुपया किलाे कीमत मिल रहा था। अब 5-10 रुपए किलाे भी लेने काे तैयार नहीं। किसान भूषण भोलानाथ झा ने बताया कि वैशाली की एक कंपनी ने 9 रुपए किलाे खरीदने की बात कही है। लेकिन वहां भेजने पर किसानों को कुछ नहीं बचेगा। 


डाल से लीची नहीं टूटी तो अगले साल नहीं होगा फल 
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके पूर्वे ने बताया कि अगर लीची की डाल समेत फल काे नहीं ताेड़ा गया ताे उस पाैधे में अगले वर्ष भी फल नहीं हाेगा। अगर उन्हें लीची का खरीदार नहीं मिल रहा है ताे किसान राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र से संपर्क कर सकते हैं। यहां भी पल्प निकालने की व्यवस्था है। 


जिले में अब भी 10 हजार हेक्टेयर में लगी है लीची 
सरकारी आंकड़ों की मानें ताे जिले के 10 हजार हेक्टेयर में शाही तथा चायना लीची का बगीचा है। इसमें कुछ बागाें में फलन नहीं हाेने के कारण इस वर्ष जिले में 75 हजार टन लीची का उत्पादन हाेने का अनुमान है। वर्तमान समय जिले के मुशहरी, बाेचहां, कांटी व मीनापुर प्रखंड में केवल 10 हजार हेक्टेयर बगीचों में लीची लगी हुई है।

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