मधुबनी / राहत के लिए पीड़ितों ने किया हंगामा, कहा बाढ़ गए 20 दिन बीते, नहीं मिला मुआवजा



अंचल कार्यालय पर नारेबाजी करतीं बाढ़ पीड़ित महिलाएं। अंचल कार्यालय पर नारेबाजी करतीं बाढ़ पीड़ित महिलाएं।
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अंचल कार्यालय पर नारेबाजी करतीं बाढ़ पीड़ित महिलाएं।अंचल कार्यालय पर नारेबाजी करतीं बाढ़ पीड़ित महिलाएं।

  • बिस्फी की नूरचक पंचायत के लोगों का फूटा गुस्सा तो फुलपरास विधायक ने लगाई गुहार 
  • बाढ़ पीड़ितों को नहीं मिल रही है राहत, अंचल कार्यालय पर किया रोषपूर्ण प्रदर्शन

Dainik Bhaskar

Aug 04, 2019, 12:18 PM IST

मधुबनी. प्रखंड क्षेत्र की नूरचक पंचायत के वार्ड संख्या एक एवं दो के बाढ़ प्रभावित महिलाएं ने राहत की मांग को लेकर प्रखंड सह अंचल कार्यालय पहुंच रोष पूर्ण प्रदर्शन किया। राहत नहीं मिलने से आक्रोषित बाढ़ पीड़ितों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रखंड सह अंचल कार्यालय पर रोष पूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगो का कहना था कि बाढ़ आये बीस दिन बीत गए लेकिन प्रशासन के द्वारा अभी तक कोई सुधि नहीं ली गई। राहत सामग्री की बात तो दूर रही यंहा तक की सरकार द्वारा दिए जाने वाले छः हजार की राशि भी खाते में नहीं भेजी गई है। प्रखंड प्रशासन बाढ़ पीड़ितों के प्रति पूर्ण रूप से संवेदनहीन बने हुए है। पंचायत अनुश्रवण समिति के द्वारा कई दिन पूर्व ही अंचलाधिकारी को पीड़ितों की सूची उपलब्ध करा दी गई है। पनी मांगे को लेकर वार्ड सदस्य धरजू साह, पीड़ित शोभा देवी, शीला देवी, अनीता देवी, सीता देवी, सुनीता देवी सहित सैकड़ों की संख्या में पीड़ित महिला उपस्थित थी।

 

राष्ट्रीय आपदा घोषित हो बाढ़ : पूर्व विधायक 
आजादी के सात दशक बाद भी सूबे में बाढ़ सुखाड़ का स्थायी निदान करने में केंद्र एवं राज्य की सरकारें विफल रही है। जब तक बाढ़ जैसी गंभीर समस्या को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय आपदा घोषित कर इसके स्थायी हल निकालने की तरकीब नहीं खोजी जाती है।तबतक हर साल मिथिलां चल सहित बिहार इसी तरह बाढ़ जैसी प्रलयंकारी से यह क्षेत्र जूझता रहेगा।ये बातें शनिवार को राजद नेता सह पूर्व विधायक रामअशीष यादव ने मधवापुर प्रखंड सह अंचल मुख्यालय पर पार्टी की ओर से आयोजित एक दिवसीय धरना सभा को संबोधित करते हुए कही।

 

उन्होंने कहा कि जबतक मिथिलांचल का विकास नहीं होगा तबतक बिहार एवं भारत का विकास असंभव ही नहीं।बल्कि,कोरी कल्पना होगी।जबकि, मिथिलांचल के विकास के लिए बाढ़ सुखाड़ का स्थायी निदान आवश्यक है। क्योंकि,आज भी यहां की 80 प्रतिशत आबादी पूर्णतः खेती पर निर्भर है।यहां कोई कल कारखाने नहीं हैं,जो थे वो सरकार की अकर्मण्यता के कारण बंद हो चुके हैं।केंद्र राज्य की सरकार बाढ़ पूर्व तैयारी करने में पूरी तरह विफल रही है।जबकि,इनके अधिकारी राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने में विफल रहे हैं। पीड़ितों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

 

ये हैं प्रमुख मांगें 

  • नौ सूत्री मांगों में बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करना,बाढ़ का स्थायी निदान करने
  • सभी बाढ़ पीड़ित परिवार को मुफ्त सहाय राशि देने
  • सभी बाढ़ प्रभावित किसानों को फसल क्षति मुआवजा देने
  • 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके सभी महिला-पुरुष को वृद्धजन पेंशन योजना के तहत न्यूनतम एक हजार रुपए मासिक पेंशन देने की मांग

फुलपरास अनुमंडल को फसल क्षतिग्रस्त क्षेत्र घोषित करें : एमएलए 
विधायक गुलजार देवी ने जिला पदाधिकारी मधुबनी को पत्र लिखकर विधान सभा क्षेत्र के फुलपरास घोघरडीहा एवं मधेपुर प्रखंडों को पूर्ण रुपेण फसल क्षतिग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग की है। प्रेषित पत्र में विधायक ने उल्लेख किया है कि बाढ़ ग्रस्त ईलाकों का सतत भ्रमण के बाद देखा गया है कि धान से आच्छादित होने वाले किसानों के खेत पूरी तरह बर्वाद हो गये हैं।

पखवारे भर से ऊपर समय तक बाढ़ एवं बरसात के पानी में डूबे रहने के कारण आधी अधूरी रोपी गई धान की फसल भी गल गई है। फसलों की बर्वादी के कारण आगामी अगहनी में किसानों को इसबार भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा। वर्णित संदर्भ में विधायक ने उल्लेख किया है कि बर्वाद हुए फसलों का आंकलन करबा कर सरकार द्वारा निर्धारित फसल मुआवजा किसानों को देने से उनकी समस्याऐं थोड़ी कम हो सकेगी।

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