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नवंबर से पहले बोए मक्के की फसल पर हुअा फाल आर्मी वर्म का प्रकोप, बोचहां की पांच पंचायतों में तेजी से बढ़ रहा प्रभाव

Muzaffarpur News - नवंबर से पहले जिले में बोए गए मक्के की फसल पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप हाेने से किसान परेशान हैं। वर्तमान में बढ़ी...

Jan 03, 2020, 07:05 AM IST
Bochan News - outbreak of fall army worm on maize crop before november fast growing effect in five panchayats of bochahan
नवंबर से पहले जिले में बोए गए मक्के की फसल पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप हाेने से किसान परेशान हैं। वर्तमान में बढ़ी ठंड के कारण इस कीट का प्रकोप अभी कम है। लेकिन, 14 जनवरी के बाद तापमान के बढ़ने तथा वातावरण में गर्मी के बढ़ने के बाद फिर इस कीट का प्रकोप हाेने की संभावना काे देखते हुए पाैधा संरक्षण विभाग ने किसानों काे दवा का छिड़काव करने का सुझाव दिया है। प्रखंड में मक्के की खेती को लेकर जहां प्रति वर्ष किसानों में क्रेज बढ़ता जा रहा है। वहीं इस वर्ष बुआई के बाद ही मक्के के पौधे पर फाल आर्मी वर्म के हुए कहर से किसान कराहने लगे हैं। प्रखंड में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष हजार हेक्टेयर अधिक में मक्के की बुआई हुई। लेकिन, लोहसरी, उनसर, देवगन, बलथी रसूलपुर, सहिला रामपुर व मझौली पंचायत में सबसे ज्यादा खेती हुई है। लेकिन फाल आर्मी वर्म के हमले से नष्ट हाे रही फसल काे देख कर किसानों को चिंता सताने लगी है। कहीं धान बेचकर तो कहीं कर्ज लेकर इस बार किसान मक्का की खेती किए। कृषि सलाहकार रंजीत चौधरी ने बताया कि मझौली, मैदापुर, बलथी रसूलपुर, सरफुद्दीनपुर, बिशनपुर जगदीश पंचायत में आर्मी वर्म का प्रकोप बढ़ रहा है। समय-समय पर इन कीटों से बचाव के लिए किसानों को अपने खेतों में छिड़काव की सलाह दी जा रही है। हालांकि, उप निदेशक पाैधा संरक्षण गाेपाल शरण प्रसाद ने बताया कि फाल आर्मी वर्म की सूचना के बाद बाेचहां के पूर्व प्रभावित क्षेत्र का भ्रमण कर स्थिति काे देखा है। वर्तमान समय अधिक ठंड के कारण अभी कीटों का प्रकोप नहीं पाया गया है। उन्होंने 14 जनवरी के बाद गर्मी के बढ़ने पर फाल आर्मी वर्म का प्रकोप बढ़ने की संभावना जताते हुए किसानों काे दवा का छिड़काव करने की सलाह दी है। उन्होंने 10 फीसदी से अधिक संक्रमण हाेने पर स्प्रिनेटाेरम 11.7 प्रतिशत एससी का 0.5 एमएल प्रति लीटर पानी या क्लारेट्राेनिलिप्राेएल 18.5 एसवी दवा का 0.4 एमएल प्रति लीटर पानी या थियामेथाेक्साम 12.6 प्रतिशत तथा लैम्बाडा साइहलाेथ्रीन 9.5 प्रतिशत जेडसी दवा का 0.25 मिली लीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर तीनों में से किसी एक दवा का छिड़काव प्रभावित क्षेत्राें में करने का सुझाव दिया है।

भोरहा गांव के दिनेश राय मक्के की फसल में लगे कीट को दिखाते हुए।

एेसे करते हैं पाैधाें काे नष्ट

भोरहा गांव के किसान दिनेश राय, बलिया के रामविलास राय, मझौली के सीताराम सिंह एवं अन्य ने बताया कि पिछली बार मक्के की खेती में अधिक मुनाफा होने के कारण अधिकांश किसान मक्का की खेती करने में जुटे हैं, परंतु मक्के के पौधे में हरे व भूरे रंग का फॉल आर्मी वर्म नामक कीट के लगने से पौधे के पत्तियों में छिद्र हो जाता है और उसके बाद डंठल में प्रवेश कर पौधे को नष्ट कर देता है। सरकार की अाेर से मिलने वाले अनुदान लेने के लिए प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता है।

कहते हैं बीएअाे

बीएओ दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष 700 हेक्टेयर में ताे इस वर्ष 1700 हेक्टेयर में मक्के की फसल लगाई गई है। नवंबर माह से पहले हुई बुआई वाले मक्के पर आर्मी वर्म का प्रकोप हुअा था। कीटनाशक दवा के लिए किसानों को प्रति एकड़ 500 रुपए अनुदान मिलता है। किसानों द्वारा खरीदे गए दवा का बिल जमा करने के बाद अनुदान की राशि किसानों के खाते में दी जाती है।

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