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स्कूल में नहीं हैं उर्दू शिक्षक, दो साल से 400 बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे पैरेंट्स

अभिभावक महिला प्रधान शिक्षक को हटाने की मांग पर डटे हैं, तो महिला शिक्षक ने ग्रामीणों पर आरोप लगाए हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Jul 03, 2018, 03:27 PM IST

स्कूल में नहीं हैं उर्दू शिक्षक, दो साल से 400 बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे पैरेंट्स

सीतामढ़ी.सोनबरसा प्रखंड के बंदरझूला स्थित प्राथमिक विद्यालय उर्दू में पिछले दो वर्षों से प्रधान महिला शिक्षक एवं ग्रामीणों के बीच चल रहे वर्चस्व की लड़ाई में करीब 400 बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया है। अभिभावक महिला प्रधान शिक्षक को हटाने की मांग पर डटे हैं, तो महिला शिक्षक ने ग्रामीणों पर आरोप लगाए हैं। यह मामला स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर डीएम तक पहुंचा है, लेकिन आज तक यह विवाद नहीं सुलझाया जा सका है।

यह है मामला :जुलाई 2016 में अल्संख्यक समुदाय के ग्रामीणों ने स्कूल में सभी विषयों की पढ़ाई उर्दू भाषा में कराने की मांग उठाई। इसके अलावा मिड डे मील में बरती जा रही अनियमितता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप शुरू किया। अगस्त 2016 में ग्रामीण मो. जमाल, इसराफिल अंसारी, मो. मंजूर, मोलाजिम समेत 76 व्यक्तियों ने हस्ताक्षरयुक्त आवेदन तत्कालीन बीईओ कमलदेव पंजियार को देकर विवाद सुलझाने की गुहार लगाई। इसमें इस स्कूल में उर्दू शिक्षकों की बहाली करने, एचएम अनिता कुमारी को हटा कर अन्य को पदस्थापित करने की मांग की गई थी। जब इस विवाद की अनदेखी की गई तो अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने अपने बच्चों को स्कूल जाने से मना कर दिया। करीब 400 बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया। इन बच्चों को न तो शिक्षा दी जा रही है और न ही सरकार प्रायोजित योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है। ग्रामीणों के इस तरह के तेवर को देखते हुए महिला प्रधान शिक्षक अनिता देवी ने भी बीईओ एवं वरीय शिक्षा अधिकारियों को आवेदन देकर मो. जमाल समेत अन्य ग्रामीणों के खिलाफ जातिसूचक शब्द कहने एवं धमकी दिए जाने का आरोप लगाया।

उपस्थिति कम होने से इस वर्ष 50 किलो चावल दिया गया
मध्याह्न भोजन साधनसेवी विवेक कुमार ने बताया कि विवाद के बाद स्कूल में बच्चों की उपस्थिति कम हो गई है। इसके कारण पहले का भंडारित किया गया चावल अब तक समाप्त नहीं हो सका है। इसे देखते हुए इस वर्ष इस स्कूल को विभाग ने मात्र 50 किलोग्राम चावल दिया है। उन्होंने कहा कि बच्चों की संख्या जो भी हो, लेकिन यहां नियमित रूप से मध्याहन भोजन बनाया जा रहा है।

ग्रामीणों से किया जा रहा है संपर्क
बंदरझूला की मुखिया अनिता देवी बताती है कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाई से वंचित करना गैरकानूनी है। विवाद को सुलझाने के लिए ग्रामीणों से बात की जाएगी। ग्रामीणों की मांग पर उर्दू शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति किए जाने की दिशा में सार्थक पहल की जा रही है। शीघ्र ही विवाद को सुलझा लिया जाएगा।

मामले से अंजान हैं डॉ. पूर्वे
राजद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि जब भी अपने गांव बंदरझूला आते हैं। ग्रामीणों की समस्याओं से रू-ब-रू जरूर होते हैं, लेकिन इस मामले से अब तक किसी ने अवगत नहीं कराया। इस विवाद के निदान के लिए जल्द ही ग्रामीण एवं अधिकारियों से बात करूंगा। सवाल यह है कि डॉ. पूर्वे को दो साल में किसी ने क्यों जानकारी नहीं दी।

डीएम भी नहीं सुलझा पाए विवाद
24 अगस्त 2016 को तत्कालीन जिला पदाधिकारी राजीव रौशन के आदेश पर तत्कालीन बीडीओ कामिनी देवी, प्रमुख ब्रजेश पासवान, उप प्रमुख जय किशोर साह ललित, तत्कालीन सीओ सत्येंद्र कुमार दत्त, बीईओ कमलदेव पंजियार व पुलिस पदाधिकारी ने मढिया पंचायत की मुखिया अनिता देवी की अध्यक्षता में स्कूल में एक बैठक कर पांच सदस्यीय निगरानी कमिटी का गठन किया। स्कूल में दो उर्दू शिक्षकों को प्रतिनियुक्ति करने की बात कह कर मामला सुलझाने का प्रयास किया गया लेकिन उर्दू शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति नहीं हुई और विवाद गहराने लगा।

दस बच्चों के सहारे संचालित हो रहा है स्कूल
सोमवार की सुबह करीब 9:30 बज रहे थे। भास्कर की टीम स्कूल पहुंची तो देखा कि बरामदे में वर्ग 5 की श्रेया भारती, रिया भारती,वर्ग-4 की प्रतिभा कुमारी, राघवेंद्र कुमार व वर्ग 3 की रुचि सुमन बोरा पर बैठकर पढ़ रहे हैं। पूछे जाने पर प्रधान महिला शिक्षक ने बताया कि स्कूल में 440 बच्चे नामांकित हैं। इसमें 208 छात्र व 232 छात्रा शामिल है। कभी 5 तो कभी 10 बच्चे उपस्थित होते हैं। काफी मशक्कत के बाद अधिकतम 20 बच्चे की उपस्थित होते हैं।

भाषा एवं धर्म के नाम पर किसी प्रधानाध्यापक को हटाना नियमानुकूल नहीं

बीईओ दानी राय बताते हैं कि स्कूल में उर्दू शिक्षक की संख्या बढ़ाने की मांग जायज है। इस संबंध में पंचायत नियोजन इकाई को निर्देश दिया गया है। लेकिन भाषा एवं धर्म के नाम पर किसी प्रधानाध्यापक को हटाना नियमानुकूल नहीं है। किसी भी अभिभावक को बच्चों को पढ़ाई से वंचित करना उचित नहीं है। विवाद सुलझाने के लिए पुन: हर संभव प्रयास किया जाएगा।

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