सियासत में साहित्य की जगह नहीं, लेकिन साहित्य में राजनीति ने जगह जरूर बनाई है

Muzaffarpur News - प्रख्यात कवि आलोचक मदन कश्यप ने कहा कि सियासत में साहित्य की जगह नहीं रह गई है। हालांकि, साहित्य में सियासत ने जगह...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:10 AM IST
Muzaffarpur News - politics is not a place of literature but politics has made the place in literature
प्रख्यात कवि आलोचक मदन कश्यप ने कहा कि सियासत में साहित्य की जगह नहीं रह गई है। हालांकि, साहित्य में सियासत ने जगह बनायी है, क्योंकि समाज ही नहीं, समय भी सियासत से नियंत्रित हो रहा है। खासकर 1980 के दशक के बाद राजनीति से हुए सामाजिक परिवर्तन का असर साहित्य पर काफी दिखता है। श्री कश्यप शनिवार काे अभिधा प्रकाशन के सहयोग से एमडीडीएम काॅलेज हिन्दी विभाग की अाेर से समकालीन साहित्य अाैर सामाजिक परिवर्तन विषय पर आयोजित दाे दिवसीय समारोह के उद्घाटन के उपरांत बाेल रहे थे। उन्होंने साहित्य की दाे धाराओं का जिक्र करते हुए कहा कि एक साहित्य वाे हाेता है, जिसका हम चित्रण करते हैं अाैर दूसरा बदलाव पर केंद्रित हाेता है। यह हमेशा बदलते रहता है। 1980 के बाद साहित्य में कई तरह के बदलाव अाए। अच्छा साहित्य आंतरिक परिवर्तन काे पकड़ता है। श्रेष्ठ साहित्य समय के परिवर्तन का साहित्य है।

1980 के दशक के बाद राजनीति में हुए बदलाव व साहित्य पर हुए असर को बताया

सेमिनार के दौरान उपस्थित कॉलेज के प्राध्यापक व साहित्यकार। कार्यक्रम के दौरान पुस्तक का विमोचन करते अतिथि।

प्राचार्य बोलीं : साहित्य का सामाजिक परिवर्तन में योगदान

इस माैके पर डाॅ. प्रेम कुमार मणि, डाॅ. ब्रजकुमार पांडे, अशाेक गुप्त सहित अन्य ने विचार रखे। स्वागत प्राचार्या डाॅ. ममता रानी ने किया। उन्होंने कहा कि साहित्य का सामाजिक परिवर्तन में गहरा योगदान है। विचारों के संघर्ष के बावजूद इसका अादान-प्रदान हाेते रहना चाहिए। उन्होंने कहा, साहित्य समाज को दिशा देने का कार्य करता है। इसलिए हर व्यक्ति को साहित्य से जुड़ना चाहिए, उसकी सही दिशा हो सके। संचालन डाॅ. पूनम सिंह ने किया। यह सत्र रमणिका गुप्ता काे समर्पित था।

मन परेशान है तुम पास अाअाे संझाया सा दिल है दीया जलाअाे ...

पहले दिन के अंतिम सत्र में काव्य पाठ हुआ। कवि मदन वात्स्यायन काे समर्पित इस काव्य पाठ में कवि, साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं से अायाेजन काे नई ऊंचाइयां प्रदान की। प्रख्यात कवयित्री डाॅ. पूनम सिंह ने बहुत मन परेशान है, तुम पास अाअाे संझाया सा दिल है दिया एक जलाअाे...गीत गाया ताे सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। कवि आलोचक मदन कश्यप ने मै कहां जा रहा हूं, तुमसे दूर तुम्हारी अांखाें से दूर तुम्हारी अांखाें की तनहाइयों से दूर, दिल्ली से अाई गीता श्री ने मैं अकेली नहीं राेती मेरे साथ राेती अनेक स्त्रियां एक साथ...रचनाअाें का पाठ किया। पूर्व कुलपति डाॅ. रिपुसूदन श्रीवास्तव की अध्यक्षता में प्राचार्या डाॅ. ममता रानी, डाॅ. रेवती रमण, पंखुरी सिन्हा, सुनीता गुप्ता, डाॅ. जयकांत सिंह जय, डाॅ. अनीता, डाॅ. संजय पंकज, डाॅ. सतीश कुमार राय, डाॅ. कुमार विरल, डाॅ. रश्मि रेखा, डाॅ. रेवती रमण ने भी अपनी रचनाओं से सभी काे प्रभावित किया।

बनारसी प्रसाद भाेजपुरी रचनावली समेत तीन पुस्तकों का लोकार्पण

उदघाटन समारोह के बाद तीन पुस्तकों का लोकार्पण बीएन मंडल विवि के पूर्व कुलपति डाॅ. रिपुसूदन श्रीवास्तव ने किया। इनमें बनारसी प्रसाद भाेजपुरी रचनावली तीन खंड, रेवती रमण की पुस्तक उजाड़ में आवाज के परिंदे एवं पूनम सिंह की पुस्तक रचना की मनाेभूमि एवं पाठ का पाथेय शामिल है।

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