कम बारिश से मारी गई खरीफ फसल, बीज के अभाव में रबी की बुआई भी हुई मुश्किल / कम बारिश से मारी गई खरीफ फसल, बीज के अभाव में रबी की बुआई भी हुई मुश्किल

Muzaffarnagar News - इस वर्ष सामान्य से आधी बारिश भी नहीं होने के कारण जिला सूखे की चपेट में है। धान की फसलें बर्बाद हो जाने से किसान...

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:11 AM IST
Muzaffarpur News - rabi sowing is also difficult due to lack of kharif crop low rainfall
इस वर्ष सामान्य से आधी बारिश भी नहीं होने के कारण जिला सूखे की चपेट में है। धान की फसलें बर्बाद हो जाने से किसान बुरी तरह परेशान हैं। दूसरी ओर 10 दिसंबर तक सामान्य गेहूं की बुआई का बेहतर समय होने के बावजूद अब तक 25 फीसदी भी गेहूं बीज नहीं मिला। खेत खाली है, जबकि गेहूं की बुआई प्रभावित है। स्थिति यह है कि सिंचाई के बाद खेतों की जुताई कर उसे तैयार करने के बाद अब बीज के अभाव में गेहूं की बुआई नहीं हो रही है। ऐसे में पहले ही खरीफ फसलें बर्बाद हो जाने के बाद अब बीज के अभाव में खेतों के खाली रह जाने का अनुमान है। गेहूं बीज नहीं मिलने से जिले के किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। सामान्य से काफी कम बारिश होने के कारण जिले के सूखाग्रस्त घोषित होने वाले 13 प्रखंडों के एक लाख किसानों ने फसल क्षति के लिए ऑनलाइन आवेदन दिया है। दूसरी ओर सरकार ने गेहूं के बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को उन्नत किस्म के गेहूं बीज को अनुदान पर देने का निर्णय लिया है। लेकिन, गेहूं बुआई के लिए सर्वाधिक उपयुक्त 15 दिसंबर तक बीआरबीएन ने जिले के किसानों को बीज नहीं उपलब्ध कराया है।

सकरा में जोत कर खाली छोड़ा गया खेत।

उपलब्ध बीज को बेहतर भी नहीं मानते कई किसान

जिले को 29 हजार क्विंटल गेहूं बीज के बदले मात्र 7100 क्विंटल मिला है। उक्त बीज को भी कई किसान इस क्षेत्र के लिए बेहतर नहीं मानते हुए लगाने के लिए तैयार नहीं हैं। जिला कृषि अधिकारी डाॅ. केके वर्मा ने बीआरबीएन के विपणन प्रमुख को त्राहिमाम संदेश भेजा है। कृषि मंत्री प्रेम कुमार तक को मामले की जानकारी देने के बाद भी बीआरबीएन के अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से किसानों को बीज नहीं उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों द्वारा गेहूं बीज के प्रभेद एचडी-2967 के साथ पीवी डब्ल्यू 343 व 373 की अधिक मांग होने के कारण इन किस्मों के निजी बीज का जिले में कालाबाजारी हो रही है।

70 हजार हे. खेत खाली

जिले में एक लाख हेक्टेयर में गेहूं तथा 20 हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। लेकिन, सूखा के साथ नीलगाय की समस्या होने से इस वर्ष किसानों ने दस हजार हेक्टेयर में भी मक्के की बुआई नहीं की। ऐसे में मक्का की बुआई करने वाले किसान भी गेहूं की बुआई करना चाहते हैं। अब तक 30 हजार हे. में ही बुआई होने से 70 हजार हेक्टेयर तक खेत बीज के अभाव में खाली हैं।

जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा गेहूं बीज : डीएओ

जिला कृषि अधिकारी डॉ. केके वर्मा ने कहा कि बीज की किल्लत की जानकारी देते हुए बीआरबीएन को जल्द ही आवश्यकता के अनुसार बीज उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा गया है। बीज की उपलब्धता के साथ ही किसानों को जल्द प्रखंडवार गेहूं बीज उपलब्ध कराया जाएगा।

नोडल एजेंसी, पर बीज नहीं

नोडल एजेंसी हाेने के बाद भी बिहार राज्य बीज निगम जिले को जरूरी बीज नहीं दे पा रहा है। प्रखंडों से मिली रिपोर्ट पर जिला कृषि अधिकारी ने इस क्षेत्र के भौगोलिक दृष्टिकोण से 10 वर्ष से कम के गेहूं बीज के प्रभेद एचडी-2967 की मांग अधिक रहने के साथ पीवी डब्ल्यू 343 व 373 किस्म उपलब्ध कराने के लिए कहा है। वहीं, किसान अनुदानित बीज नहीं मिलने पर अधिक कीमत पर निजी कंपनियों के बीज खरीदकर बुआई कर रहे हैं।

टिशु कल्चर पौधों से किसानों की आय व रोजगार बढ़ने के साथ पर्यावरण सुरक्षा भी होगी : अनिल

टिशु कल्चर के बारे में बताते हिक्योर के डायरेक्टर अनिल कुमार।

मुजफ्फरपुर | कृषि आधारित बिहार में अधिक से अधिक टिशु कल्चर पौधे व बागान लगाने से सभी समस्याओं का स्वत: समाधान हो जाएगा। प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी और पर्यावरण सुरक्षित होगा। कम समय में अधिक उत्पादन से किसानों की आय बढ़ेगी। इस पर आधारित फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना से बेरोजगारी दूर होगी व रोजगार के लिए पलायन रुकेगा। ये बातें शनिवार को एक होटल में हिक्योर एग्रो प्लांट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अनिल कुमार ने कहीं। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में ही कुढ़नी प्रखंड के खरौनाडीह में हिक्योर एग्रो टिशु लैब बना है। केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, बिहार सरकार के कई मंत्री समेत उद्यान निदेशक नंदकिशोर व अधिकारियों ने इसकी खूबियां देखी हैं। लैब की स्थिति व उत्पादित पौधे देखने के बाद हार्टिकल्चर निदेशक ने भी लैब को किसानों के लिए वरदान बताया है। लैब से तैयार पौधे पानापुर अमैठा में लगे हैं जहां किसान देख सकते हैं। टिशु कल्चर से तैयार जी-9 केला, सागवान, एपल, बैर, अनार, केला, पपीता, सीडलश लेमन, राजेंद्र-1 ईख, थाई कटहल, थाई इमली आदि पौधे लगा किसान कम समय में अधिक लाभ कमा सकते हैं। जलजमाव के क्षेत्र व पर्यावरण को तैयार बलसोआ बेंबू किसानों के लिए वरदान साबित होंगे। मौके पर भास्कर त्रिवेदी, संतोष कुमार, पंकज कुमार, देवांशु किशोर आदि उपस्थित थे।

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