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10 माह पहले हुई बैठक में ही हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बायपास के डी स्काेप की लिख दी गई थी पटकथा

Muzaffarpur News - विशेष संवाददाता | मुजफ्फरपुर हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बायपास के भविष्य काे लेकर 1 दिसंबर 2018 काे हुई बैठक में ही...

Bhaskar News Network

Oct 21, 2019, 08:35 AM IST
Muzaffarpur News - screenplay of d scape of hajipur muzaffarpur bypass was written in the meeting held 10 months ago
विशेष संवाददाता | मुजफ्फरपुर

हाजीपुर-मुजफ्फरपुर बायपास के भविष्य काे लेकर 1 दिसंबर 2018 काे हुई बैठक में ही डी-स्काेप की पटकथा लिख दी गई थी। किसानाें के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में ही पथ निर्माण मंत्री नंद किशाेर यादव ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि किसान नहीं माने ताे प्राेजेक्ट वापस कर दिया जाएगा। एनएचएअाई अर्जित जमीन के बाजार मूल्य से 4 गुना अधिक दर से मुअावजा देने काे तैयार नहीं था। जबकि, किसान जिला भू अर्जन कार्यालय की अाेर से तैयार फाइनल एस्टीमेट के अाधार पर मुअावजा लेने के लिए सहमत हाे गए थे। दिसंबर में हुई बैठक के बाद जिला भू अर्जन कार्यालय ने एनएचअाई काे 177.5 कराेड़ रुपए का फाइनल एस्टीमेट बनाकर भेजा था। जिस पर, एनएचएअाई की अाेर से मंजूरी नहीं दी गई। इन सबके बीच एनएचएअाई अाैर जिला भू अर्जन कार्यालय के बीच पत्राचार हाेता रहा। पिछले माह हुई बैठक में भी जिला भू अर्जन अधिकारी ने एनएचएअाई के क्षेत्रीय अधिकारी सह महाप्रबंधक से विशेष अनुराेध किया था कि फाइनल एस्टीमेट काे स्वीकृति देते हुए मुअावजा भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जाए। इसी बीच एनएचएअाई ने सात वर्ष से बाधित इस प्राेजेक्ट काे डी-स्काेप की श्रेणी में डालते हुए प्राेजेक्ट वापस करने का फैसला ले लिया है।

जमीन की प्रकृति बदले जानेे काे लेकर एनएचएअाई ने जताई है अापत्ति

दरअसल, जिला भू अर्जन अधिकारी ने पहले 19 गांवाें के लिए 10 नवंबर 2010 काे तथा 17 गांवाें के लिए 11 फरवरी 2011 काे रिपाेर्ट प्रस्तुत की थी। 2011 में सिक्स मेन कमेटी नए सिरे से सभी गांवाें की जमीन की प्रकृति की समीक्षा करते हुए 15 दिसंबर 2012 काे दूसरी रिपाेर्ट दी। दूसरी रिपाेर्ट में माधाेपुर मचिया की कुछ जमीन की प्रकृति कृषि से अावासीय कर दी गई। जमीन की प्रकृति बदलने पर एनएचएअाई की अाेर से अापत्ति दर्ज की गई। उधर, जिला भू अर्जन विभाग ने 31 दिसंबर 2014 से पहले अवार्ड घाेषित नहीं हाेने का हवाला देते हुए फाइनल ताैर पर 10 गांवाें का एस्टीमेट नए भू अर्जन कानून-2013 के अाधार पर कर दिया। इस पर एनएचएई का कहना है कि 2010 व 2011 में अवार्ड घाेषित कर दिया गया था। 3 दिसंबर 2016 काे 36 गांवाें का फाइनल एस्टीमेट एनएचएअाई काे भेजा गया था।

दैनिक भास्कर में 2 दिसंबर 2018 को प्रकाशित खबर

कांटी के मधुवन जगदीश में बायपास रोड के लिए बने पिलर।

किसानों के सकारात्मक रुख पर भी एनएचएअाई ने 177.5 कराेड़ के एस्टीमेट काे नहीं दी स्वीकृति

दिसंबर 2018 में पथ निर्माण मंत्री की अध्यक्षता में मुअावजा भुगतान में अा रही कठिनाई के निराकरण हेतु किसान प्रतिनिधियाें एवं एनएचएअाई के अधिकारियाें के साथ कलेक्ट्रेट में बैठक की गई। बैठक में 36 गांवाें के लिए भेजे गए एस्टीमेट के अनुरूप सूद की राशि की गणना के साथ मिलनेवाली मुअावजा राशि से संबंधित रिपाेर्ट सार्वजनिक की गई। इस पर जिला भू अर्जन कार्यालय काे किसानाें की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। बावजूद, एनएचएअाई की अाेर से 177.5 कराेड़ के उक्त एस्टीमेट काे स्वीकृति नहीं दी गई।

सिर्फ दैनिक भास्कर ने प्रकाशित की थी इस अाशय की खबर

किसानों ने कहा- 9 वर्षों से कर रहे

इंतजार, फिर भी न निकला नतीजा

करीब 100 किसानों ने नहीं लिया मुअावजा, 91 ने काेर्ट में दायर की थी अपील

नोटिफिकेशन बाद उनकी मांग 4 गुना मुआवजे की थी, एनएचएआई ढाई गुना देने के लिए तैयार था

भास्कर न्यूज | कांटी

मुजफ्फरपुर-हाजीपुर बाईपास को डी स्कोप में डाल देने काे लेकर स्थानीय किसानों व भू दाताओं की राय अलग-अलग है। इससे जुड़े सबसे ज्यादा करीब 100 किसान लश्करीपुर, बझिला व सदातपुर के है, जिन्होंने उचित मुआवजा न मिलने पर भुगतान नहीं लिया। इनमें 91 किसानाें ने एनएचएआई के विरुद्ध उचित मुआवजा नहीं देने को लेकर कोर्ट में अपील दायर की थी। इन किसानों का मानना है कि यह सरकार की नाकामी है कि 9 साल बीत जाने पर भी अब तक न तो उचित मुआवजा मिला, न ही बायपास बन सका है। किसानों का कहना है कि नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उनकी मांग 4 गुना मुआवजे की थी, जबकि एनएचएआई ढाई गुना देने के लिए तैयार था।

बायपास को लेकर कांटी में आपस में चर्चा करते किसान।

2011 में इसके नाम पर काट

दिए गए हजार से अधिक पेड़

किसान राहुल कुमार ने बताया कि 2011 में किसानाें ने भूमि अधिग्रहण को लेकर आंदोलन भी किया था। मगर, कार्यरत कंपनी ने बिना किसी जानकारी के हजार से अधिक फलदार वृक्षाें को काट दिया और जबरन जमीन पर कब्जा कर लिया। किसानों ने तत्कालीन डीएम को इसकी सूचना दी। मगर कंपनी के दवाब के आगे किसानों की एक न चली और सदातपुर मोड़ से लेकर कपरपुरा रेलवे गुमटी तक करीब 15 फीट रोड का अतिक्रमण जबरन निर्माणाधीन कंपनी ने कर लिया। 1000 से अधिक फलदार वृक्ष कटने से अनेक किसानों की आय का स्रोत खत्म हो गया, उसके बावजूद करीब 9 वर्षाें से उनकी जमीन बिना किसी मुआवजे के बेकार पड़ी रही। माधोपुर, हरपुर मछिया के कई किसानों का मानना है कि सड़क निर्माण अत्यंत आवश्यक है। इससे न केवल अावागमन की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीणों व आसपास के गांवाें का भी विकास होगा। इस दौरान रामसंयोग राय, महेश राय, सौरभ साहेब, रामसेवक राय, रामइकबाल राय, सज्जन राय ,मोहम्मद नगीना, परवेज आलम, मो. हनीफ अादि किसान व ग्रामीणाें ने अपनी राय रखी।

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