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- Muzaffarpur News Supply Of Mask Sanitizer Stopped Missing From The Market Even If It Is Found Somewhere At An Arbitrary Price
मास्क-सेनेटाइजर की आपूर्ति बंद, बाजार से गायब, कहीं-कहीं मिल भी रहा तो मनमानी कीमत पर
कोरोना वायरस का खतरा जारी रहा, तो जांच किट, उपकरण, सैनेटाइजर, मास्क आदि की कीमतों में इजाफा हो सकता है। हालांकि दवा की कीमतों पर फिलहाल इसका असर नहीं है। सैनेटाइजर और मास्क तो अब भी बाजार से गायब हैं। गिने-चुने मेडिकल शॉप में ऊंची कीमत वसूली जा रही है। हालांकि कंपिनयों की ओर से अभी इनकी कीमत नहीं बढ़ाई गई है। विभिन्न बीमारियों की जांच के लिए चीन में निर्मित होने वाली किट, उपकरण, मास्क, सैनिटाइजर के अलावा पैथोलॉजिकल लैब में लगने वाली अधिकांश सामग्री का आयात बंद हो गया है। हालांकि अभी डिस्ट्रीब्यूटर और लैब वालों के पास कुछ दिनों का स्टॉक है। स्टॉक खत्म होने पर उन किट, उपकरण और अन्य सामग्री की कीमत में 15 से 20 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। चीन में निर्मित मास्क डेढ़ से दो रुपए में डीलर को मिलता था। अाज वही मास्क 10 से 15 रुपए के बीच डीलर को मिल रहा है। चीन से लैब में लगने वाली किट और अन्य एसेसरीज के नहीं अाने से लोकल निर्माता से खरीदना पड़ेगा, जिनकी कीमत अधिक होती है। रैपिड टेस्ट के लिए किट, एलाइजा किट, खून जांच करने वाली (टीसी, डीसी, हीमोग्लोबिन) मशीन भी चीन से अाती है। इनका अाना भी फिलहाल बंद हो गया है। इनकी कीमतों भी बढ़ोतरी हो जाएगी। मेडिकल स्टोर से मास्क और सेनेटाइजर अभी भी गायब हैं। तीन और चार लेयर वाले ब्रांडेड मास्क कहीं नहीं मिल पा रहे हैं। कुछ स्टोर पर लोकल मास्क उपलब्ध तो है, पर उसे ज्यादा कीमत पर बेचा जा रहा है। आम तौर पर 15 से 20 रूपए कीमत वाले लोकल मास्क 90 से 150 रूपए तक में बेचे जा रहे हैं। चार लेयर वाले एन 95 मास्क के नाम पर भी लोकल मास्क 200 से 400 रुपए तक में बिक रहे हैं। एन 95 मास्क ज्यादातर गुजरात से मंगाया जाता था, पर कोरोना वायरस के देश में फैलने के बड़ा इसकी आपूर्ति बंद हो गई है। ब्रांडेड मास्क थोक स्टोर में भी उपलब्ध नहीं है। डिस्पोजेबल मास्क थोक मेडिकल स्टोर में उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 10 रूपए हैं। पर लोगों में डिस्पोजेबल मास्क की मांग नहीं के बराबर है।
दवाओं की कीमत पर फिलहाल कोरोना का असर नहीं
भारत में बनने वाली दवाओं का अधिकांश कच्चा माल चीन से आता है। कई दवाइयों की आपूर्ति भी वहां से होती है। पैरासिटामाल व एंटीबायोटिक दवाओं को का बहुत बड़ा आपूर्तिकर्ता चीन है। बिहार कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के परसन कुमार सिंह बताते हैं कि अभी 2019 बैच की दवा ही बाजार में आपूर्ति हो रही है। 2020 में बनी दवाएं नहीं के बराबर बाजार में आई हैं। अधिकांश दवाएं 2018 व 2019 बैच की हैं। इन पर लिखे एमआरपी के अनुसार ही दवाएं बाजार में उपलब्ध है। चीन से आने वाली दवाओं का असर कुछ महीने बाद दिखाई देने लगेगा।