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पांच राजद सदस्यों का निलंबन वापस, 23 मिनट ही चली परिषद

3 वर्ष पहले
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गुरुवार को चौथे दिन विधान परिषद मात्र 23 मिनट चली। पहला सत्र शुरू होते ही केदारनाथ पांडेय ने बुधवार को सदन से निलंबित किए गए सदस्यों के निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव रखा। साथ ही उन्होंने बुधवार की घटना के लिए पक्ष और विपक्ष की ओर से खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सदन में पक्ष-विपक्ष नहीं, लोकतंत्र की हार या जीत होती है। सदन की सहमति से कार्यकारी सभापति हारुण रशीद ने निलंबन वापस लेने की घोषणा की और केदारनाथ पांडेय व दिलीप कुमार चौधरी को इन सदस्यों को सदन में लाने आग्रह किया। इसमें सुबोध कुमार, दिलीप कुमार राय, राधा चरण साह, कमर आलम व खुर्शीद मोहम्मद मोहसिन शामिल थे।

इसके बाद राजद के रामचंद्र पूर्व और कांग्रेस के प्रेमचंद्र मिश्रा ने शेल्टर होम मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सरकार को घेरना चाहा। रामचंद्र पूर्वे ने सीतामढ़ी में बुजुर्ग को जिंदा जलाने की घटना की जांच सदन की कमेटी से कराने की मांग की। संसदीय कार्यमंत्री श्रवण कुमार ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया। सदन में बढ़ता शोरशराबा देख सभापति ने कार्यवाही 2:40 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

विधान परिषद में प्रदर्शन करते प्रेमचंद्र मिश्रा, राबड़ी देवी व डॉ. रामचंद्र पूर्वे।

दूसरी पाली में भी जारी रहा विपक्ष का शोर-शराबा
भोजनावकाश के बाद विधान परिषद की दूसरी पाली 10 मिनटों तक ही चली। सदन शुरू होते ही विपक्ष ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम से जुड़ा मामला उठाया। इसके बाद शोर-शराबा शुरू हो गया। राजद के रामचंद्र पूर्वे, सुबोध राय व अन्य सदस्य हाथों में तख्तियां लिए वेल में पहुंच गए। हंगामे के बीच ही औद्योगिक विवाद (बिहार संशोधन) विधेयक 2018 आदि पारित किए गए। बार-बार समझाने के बावजूद कोई असर नहीं होते देख आखिरकार कार्यकारी सभापति हारुण राशिद ने शुक्रवार 11 बजे तक के लिए सदन स्थगित करने की घोषणा कर दी।

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