पीड़ित बच्चियों ने जाे अाशा की थी वह अाज पूरी हो गई

Muzaffarpur News - बालिका गृह में किशाेरियाें से याैन हिंसा का खुलासा महाराष्ट्र स्थित टाटा इंस्टीट्यूट अाॅफ साेशल साइंस (टिस) की...

Feb 12, 2020, 08:36 AM IST
Muzaffarpur News - the victim girls had hoped that it was complete today

बालिका गृह में किशाेरियाें से याैन हिंसा का खुलासा महाराष्ट्र स्थित टाटा इंस्टीट्यूट अाॅफ साेशल साइंस (टिस) की काेशिश टीम ने किया था। 3 सदस्यीय टीम का नेतृत्व पटना के बेली राेड अाॅफिसर काॅलाेनी निवासी कायम मासूमी ने किया था। ब्रजेश समेत 19 काे सजा मिलने पर उन्हाेंने कहा- बालिका गृह की किशाेरियाें ने जाे मुझसे अाशा की थी, वह अाज पूरी हाे गई। नवंबर 2017 में टीम की सदस्य सुनीता विश्वास अाैर अासिफ इकबाल के साथ जब बालिका गृह पहुंचा ताे वहां का माहाैल देखने से ही लग रहा था कि बंद काेठरियाें में दबी-दबी सी चीख गूंज रही है। शुरुअात में सहमी हुईं बच्चियां कुछ भी बताने से डर रही थीं। जब बालिका गृह के कर्मचारियाें काे हटाकर बच्चियाें काे अकेले में पूछा ताे एक-दाे बच्चियाें ने जुबान खाेली। जब उन्हें भराेसा दिलाया ताे सारी बातें बताने लगीं। फिर ताे 15 से 20 बच्चियांें ने जाे अापबीती सुनाई वाे राेंगटे खड़े करने वाले थे। कहा- उनके साथ लैंगिक अपराध हाे रहे हैं। कई बच्चियां ताे हिचकियां ले-लेकर राेने लगी थीं। कुछ बालिका डर भी रही थी। बताया कि हाेम के स्टाफ बेरहमी से मारते-पीटते हैं। बच्चियाें ने कहा- हमारी बात अापलाेग ऊपर तक पहुंचा कर यहां से हमें मुक्त कराएं। कुछ बच्चियाें ने कहा- मानसिक रूप से विक्षिप्त लड़कियाें के साथ भी हर तरह का शाेषण हाेता है।

सीबीअाई टीम ने घर से दस माह दूर रह कर जुटाए थे साक्ष्य

जिन्हाेंने बच्चियाें पर जुल्म की दास्तान नहीं सुनी हाेगी उसके लिए काेर्ट का फैसला बहुत महत्वपूर्ण नहीं हाेगा। लेेकिन, सीबीअाई की टीम के लिए अाज बहुत खुशी का दिन है। सीबीआई के सहायक आईओ इंस्पेक्टर कुमार अभिनव ने कहा कि मेरी अाखें खुशी से भर अाईं।

बच्चियाें ने जिस तरह का बयान मेरे सामने दिया था उसका वर्णन नहीं किया जा सकता है। दरिंदगी भरी यातनाअाें से बच्चियां गुजरी थीं। बच्चियाें का बयान सुनने के बाद सीबीअाई की पूरी टीम ने 10 माह तक मुजफ्फरपुर में रुक कर साक्ष्य जुटाए।

इस घिनौने अपराध के लिए उम्रकैद टिल डेथ की सजा सही : हरप्रीत काैर

मुजफ्फरपुर| बालिका गृह में रहनेवालीं मासूम बच्चियाें से घिनाैने अाैर वहसी तरीके से ब्रजेश ठाकुर व अन्य अाराेपिताें ने दुष्कर्म अाैर याैन हिंसा काे अंजाम दिया था। इसके लिए ब्रजेश समेत 6 अाराेपिताें काे उम्रकैद टिल डेथ की सजा मिलने से खुशी हाे रही है। ये बातें मुजफ्फरपुर के तत्कालीन एसएसपी हरप्रीत काैर ने माेबाइल पर बातचीत के दाैरान कहीं। उन्हाेंने कहा कि बच्चियाें ने जाे अापबीती बयां की थी, उसे सुनने के बाद अांखें छलक अाई थीं। कांड की छानबीन से जुड़े तत्कालीन नगर डीएसपी मुकुल रंजन, नगर इंस्पेक्टर माे. सुजाउद्दीन व महिला थानेदार ज्याेति कुमारी ने भी खुशी जाहिर की।

पीआईएल दायर करने वाले संतोष ने कहा कि फैसले से संतुष्ट हूं, खुश नहीं

मुजफ्फरपुर | बालिका गृह कांड की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में सीबीआई से कराने के लिए पीआईएल दायर करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता संतोष कुमार फैसले संतुष्ट ताे हैं, पर खुश नहीं हैं। इस मामले में संतोष सुप्रीम काेर्ट में पक्षकार भी हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकारी संरक्षण में जिस तरह का कुकृत्य हुअा, इसमें फांसी की सजा हाेनी चाहिए थी। मुख्य अाराेपी पर सीबीआई यदि हत्या की धारा जाेड़ती, ताे संभव है ब्रजेश ठाकुर काे फांसी की सजा मिली हाेती। संतोष ने कहा कि यह कांड निर्भया कांड से भी अधिक क्रूर व जघन्य है।

बड़े चेहरे बच गए, जाे लाेग पकड़े गए हैं, वे मामूली : निवेदिता झा

मुजफ्फरपुर | मैंने बालिका गृह कांड काे अंजाम तक पहुंचाने में अलग-अलग तीन याचिका दायर की। बालिका गृह कांड से जुड़ी खबराें के प्रकाशन पर पटना हाईकाेर्ट की रोक के बाद मैं अपनी वकील फौजिया शकील के माध्यम से सुप्रीम काेर्ट तक पहुंचीं। मीडिया हाउस के पक्ष में फैसला आया, जो टर्निंग पॉइंट था। इसके बाद महिला संगठनाें ने पटना में डाकबंगला चाैराहा काे दाे घंटाें तक घेरा। इसके बाद हमने कानूनी लड़ाई भी लड़ने का फैसला किया। सड़क के साथ-साथ काेर्ट में भी इस लड़ाई काे जारी रखा। इस बीच सरकार ने मुजफ्फरपुर शेल्टर हाेम कांड की जांच सीबीअाई के हवाले कर दी। पहले सिर्फ मुजफ्फरपुर शेल्टर हाेम पर जांच सीमित थी। जबकि, टिस की टीम ने बिहार के 17 शेल्टर हाेम पर अपनी रिपाेर्ट साैंपी थी। मैंने मुजफ्फरपुर के साथ-साथ सभी 17 शेल्टर हाेम की जांच सीबीअाई से कराने के लिए सुप्रीम काेर्ट में याचिका दायर की। तब सुप्रीम काेर्ट ने सभी शेल्टर हाेम की जांच सीबीअाई से कराने का अादेश दिया। तीसरी याचिका हमें तब दायर करनी पड़ी, जब मुझे लगा कि सीबीअाई की जांच की दिशा सही नहीं है। मुझे लगा कि सीबीअाई कुछ बड़े लाेगाें काे बचाने में जुट गई है। खासकर, राजनीतिक चेहराें काे।क्याेंकि, पीड़ित बच्चियाें के बयान दिल दहलाने वाले थे। पीड़ित बच्चियाें ने ताेंद व मूंछ वाले अंकल काे भी अाराेपी बनाया था। लेकिन, जांच में उस बयान की अनदेखी की जा रही थी। निवेदिता झा ने कहा कि वह काेर्ट के फैसले से पूरी तरह खुश नहीं हूं। इसमें अाैर गंभीरता से जांच हाेनी चाहिए थी। राजनेता बच गए। इस पूरे प्रकरण में बड़े चेहरे बच गए। किसी सरकारी अधिकारी पर अांच तक नहीं अाई। फिलहाल, फैसला अा गया है। नहम लड़ाई अागे जारी रखेंगे। (जैसा कि इस कांड में तीन याचिका दायर करने वालीं सोशल वर्कर निवेदिता झा ने भास्कर को बताया)


इन किरदारों ने सजा दिलाने में निभाई अहम भूमिका

तीन याचिका ने पूरे मामले काे मुकाम तक पहुंचाया

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