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बिहार / 2500 साल पुराना वैशाली का पुष्करणी सरोवर पहली बार सूखा, जलस्तर 4 फीट घटा

Dainik Bhaskar

Jan 13, 2019, 05:05 AM IST


ऐतिहासिक लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था, तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था। ऐतिहासिक लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था, तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था।
पहले ऐसे लबालब था सरोवर। पहले ऐसे लबालब था सरोवर।
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ऐतिहासिक लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था, तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था।ऐतिहासिक लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था, तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था।
पहले ऐसे लबालब था सरोवर।पहले ऐसे लबालब था सरोवर।

  • इस सरोवर के पास विश्व शां‍ति स्तूप भी है, जहां हर साल लाखों लोग पहुंचते
  • 25 दिनों के अंदर जल संसाधन विभाग को प्रोजेक्ट बनाने का निर्देश
  • 550 मीटर लंबा और 300 मी. चौड़ा है अभिषेक पुष्करणी सरोवर
  • 4 किमी दूर से निकलने वाली नहर से भरा रहता था ऐतिहासिक सरोवर

वैशाली. बिहार में वैशाली जिले का 2500 साल पुराना अभिषेक पुष्करणी सरोवर पहली बार सूख गया है। इस कारण इलाके का जलस्तर 4 फीट नीचे चला गया है। इसके सूखने से आसपास के गांव के हैंडपंप भी सूखने लगे हैं। इसकी वजह है तिरहुत नहर में पर्याप्त पानी नहीं होना।

 

अब जल संसाधन विभाग के अधिकारी एक बार फिर तिरहुत नहर से ही इसमें पानी लाने पर विचार कर रहे हैं। पुष्करणी के नजदीक ही बौद्ध समुदाय द्वारा बनवाया गया विश्व शां‍ति स्तूप है, यहां हर साल लाखों लोग पहुंचते हैं। वैशाली विकास मंच से जुड़े जय प्रकाश ने बताया कि 2500 में यह पहली बार है जब सरोवर पूरी तरह सूख गया है।

 

ऐतिहासिक लिच्छवी गणराज्य में जब भी कोई नया शासक निर्वाचित होता था, तो उनका इसी सरोवर के जल से अभिषेक कराया जाता था। सरोवर के पवित्र जल से शुद्ध होकर लिच्छवियों के शासक गणतांत्रिक सभागार में बैठते थे। इस सरोवर में आसपास के लोग शुभ मुहूर्त में स्नान करते थे। इस सरोवर को एक तरह से गंगा का दर्जा प्राप्त था।

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