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50 साल का रिकॉर्ड टूटा, मार्च में एक दिन में 45 मिमी बारिश,खेती पर असर

एक वर्ष पहले
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शुक्रवार और शनिवार को हुई लगातार बारिश ने जिले में भारी तबाही मचा दी है। जिले के किसानों के लिए यह आफत की बारिश साबित हुई। एक झटके में ही करोड़ों के फसल तबाह हो गए। कृषि विभाग इसका आंकलन कर रही है। लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, जिले भर में 5 करोड़ से अधिक की फसल की क्षति होने का अनुमान है। कृषि विभाग के रिकार्ड के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 45 एमएम से अधिक बारिश हुई है।

सरकारी आकड़े के मुताबिक, एक दिन में इतनी बारिश बरसात के मौसम खासकर धान रोपनी के समय भी नहीं हुई। लगातार तेज बारिश से किसानों को अब तक का सबसे बड़ा नुकसान हुआ है। हजारों एकड़ गेहूं की फसल सरपट मैदान जैसी हो गई। खेत में लगी मसूर और खलिहाल में रखे मसूर के बोझे बर्बाद हो गए हैं अरहर को भी बड़ी क्षति हुई है। चने की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है। तिलहन फसलों को भी क्षति पहुंची है। जिले के किसान मौसम के मिजाज के कारण लगातार नुकसान झेल रहें हैं। पहले कम बारिश के चलते धान की रोपनी नहीं हो पाई और धान की फसल भी मर गई। खरीफ में नुकसान के बाद किसानों को रबी फसल से भरपाई की उम्मीद थी लेकिन तेज बारिश ने किसानों की आश पर पानी फेर दिया। किसान यह हालत देखकर परेशान हो गए हैं। नारदीगंज के नारदीडीह के धनंजय कुमार, कहुआरा के रामायण सिंह, चंद्रमौली सिंह आदि ने कहा कि आफत की बारिश से सब बर्बाद हो गया है। कर्ज लेकर गेहूं, मसूर और चना लगाया था अब वह भी लौटना भी मुश्किल है।

क्षति का ले रहे जायजा, मुआवजा संभव


तेज बारिश से किसानों को काफी क्षति हुई है। जिले में हुई क्षति का हम आकलन कर रहें है। आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। मुआवजा मिलना संभव है लेकिन मुआवजे की घोषणा सरकार करती है।
अरविंद कुमार झा , जिला कृषि पदाधिकारी नवादा


आज भी हो सकती है हल्की बारिश


कृषि विज्ञान के केन्द्र सोखोदौरा के मौसम वैज्ञानिक रौशन कुमार ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण सेंट्रल यह बारिश पाकिस्तान से शुरू हुई है। भारत सरकार के मौसम विभाग के आकलन के अनुसार जिले में मार्च में 37 एमएम की औसत बारिश हो चुकी है। अभी अगले दो दिनों तक इसका प्रभाव रहेगा। रविवार को भी मध्यम हल्की बारिश होने के अनुमान है।

जल्दी निकाले खेत से पानी, नहीं करें छिड़काव


कृषि वैज्ञानिक कल्पना सिंह ने कहा कि बारिश से सबसे ज्यादा नुकसान मसूर को हुआ है। गेहूं के लिए अभी महत्वपूर्ण समय है। अभी दाने भर रहें हैं। ऐसे में जो गेहूं की फसल खेत में गिर गई है उसमें दाना पुष्ट नहीं हो पाएगा। कृषि वैज्ञानिक रौशन कुमार बताते हैं कि किसान अभी सबसे पहले खेत से जमें पानी को बाहर निकालें। किसी भी सूरत में खेत में पानी जमा नहीं हो। अभी चार दिनों तक फसल में किसी तरह के केमिकल का छिड़काव नही करना चाहिए।

50 साल बाद मार्च में ऐसी बारिश


मार्च में इतनी तेज बारिश से लोग अचंभित है। घोसतावां के किसान उपेंद्र सिंह कहते हैं कि उन्हें याद नही है कि किसी एक दिन में इतनी बारिश मार्च माह में हुई थी। पिछला साल भी 26 मार्च को बारिश हुई थी लेकिन मामूली बारिश थी। सबसे ज्यादा बारिश वारिसलीगंज में हुआ जहां शनिवार की सुबह तक 52 एमएम बारिश हो चुकी थी । इसके अलावा काशीचक में भी 50 एमएम से अधिक और गोविंदपुर में 39 एमएमए बारिश हुई। सबसे कम बारिश कौआकोल में हुई जहां शनिवार की सुबह 12.2 एमएम बारिश दर्ज हुई है।


फसल लक्ष्य अच्छादन

धान 76000 हेक्टेयर 30000 हेक्टेयर

गेहूं 55000 हेक्टेयर 55318 हेक्टेयर

मक्का 2000 हेक्टेयर 1898 हेक्टेयर

चना 4000 हेक्टयर 3976 हेक्टेयर

मसूर 4000 हेक्टयर 3978 हेक्टेयर

राई-सरसो 2170- हेक्टेयर 2156 हेक्टेयर

पिछले साल धान का बिचड़ा डालने के समय जून में हुई थी 40 एमएम बारिश


लगातार बारिश के कारण खेताे मे गिरा गेहूं का फसल।
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