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गोस्वामी तुलसीदास का नाम आते ही खुद ब खुद प्रभु श्रीराम का स्वरूप उभरकर सामने आ जाता है

2 वर्ष पहले
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गोस्वामी तुलसी दास की जयंती पर जिले में कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। पूज्य तपस्वी श्री जगजीवन जी महाराज सरस्वती विद्या मंदिर हसनपुर में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक सह संयुक्त सचिव जाग्रत भानु प्रकाश ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने सगुण भक्ति की ऐसी राम भक्तिधारा को प्रवाहित किया जो आज भी प्रवाहित हो रही है। गोस्वामी जी ने राम भक्त द्वारा न केवल अपना जीवन कृतार्थ किया बल्कि सभी को श्रीराम के आदर्शों से बांधने की कोशिश भी की। उन्होंने लोक भाषा में राम कथा की रचना की।

तुलसी दास सभी के लिए पूजनीय

प्रधानाचार्य अमरेश कुमार ने कहा कि तुलसीदास जी का नाम आते ही प्रभु राम का स्वरूप उभरकर सामने आता है। तुलसीदास जी सभी के लिए सम्मानीय और पूजनीय रहे। कार्यक्रम प्रमुख अमन कुमार सिंह ने कहा कि श्री राम के जीवन से हम सभी को सीख लेकर मर्यादा रक्षक बनना चाहिए। माता-पिता की आज्ञा का पालन करना चाहिए। इस मौके पर सुमन कुमार चौधरी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

तुलसीदास का रामचरित मानस दुनिया का सबसे बेहतर ग्रंथ

बिहारशरीफ | साहित्यिक मंडली द्वारा भक्ति रस के कवि गोस्वामी तुलसीदास की 508वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता गीतकार मुनेश्वर शमन ने किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने तुलसीदास के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित किया। इस मौके पर श्री शमन ने कहा कि रामायण महाकाव्य नहीं बल्कि साहित्य, समाज एवं संस्कृति की आचार-संहिता है। साहित्य प्रेमी राकेश बिहारी शर्मा ने कहा कि तुलसीदास लोकजीवन के व्याख्याता और शिल्पी थे। उनकी रचनाओं में सामाजिक, धार्मिक, आध्यात्मिक और राजनीतिक चेतना का सत्यतः विनियोग हुआ है। गोस्वामी तुलसीदास भक्ति रस तथा हिन्दी और अवधि भाषा के अप्रतिम कवि थे। कवि सम्राट कहे जाने वाले गोस्वामी तुलसीदास ने सनातन धर्म को न सिर्फ अनमोल ग्रंथों का खजाना दिया बल्कि सनातन धर्म के प्रति विश्वास जगाने का काम भी किया। भारत वर्ष की संस्कृति ऋषि और कृषि प्रधान रही है।

हसनपुर की सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित तुलसी जयंती कार्यक्रम में मौजूद लोग।

तुलसीदास ने रामकथा को आदर्श जीवन का माध्यम बनाया

साहित्यकार लक्ष्मीकांत सिंह ने कहा कि रामायण महाकाव्य नहीं बल्कि साहित्य, समाज एवं संस्कृति की आचार-संहिता है। तुलसीदास को साहित्य एवं संस्कृति ऐसा सूरज बताया गया जिसके आलोक में मानवता, राष्ट्रवाद, साहित्य एवं संस्कृति लंबे समय तक अपना रास्ता तलाशती रहेगी। गोस्वामी तुलसीदास ने रामकथा को आदर्श जीवन का माध्यम बनाया। साहित्यकार उमेश प्रसाद ‘उमेश’ ने कहा कि विश्व साहित्य में अपना सर्वोत्कृष्ट स्थान रखने वाले तुलसीदास ने राष्ट्रीय जीवन को नया स्वर प्रदान किया। उनके अमर संदेश से मानव अपनी जीवन को सफल कर सकता है।

गोस्वामी तुलसीदास की तैलचित्र पर पुष्प चढ़ाते लोग।

इन लोगों ने भी किया तुलसीदास की रचनाओं का बखान

डॉ. आनन्द वर्द्धन ने कहा कि रामराज्य की उनकी परिकल्पना हमेशा के लिए आदर्श है। तुलसी दास ने अपनी रचनाओं से भारतीय समाज में शांति, सद्भाव, समन्वय और मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा का जो काम किया वह हमेशा स्मरणीय रहेगा। कवि राजीव कुमार ने कहा कि रामचरित मानस ज्ञान, भक्ति, वैराग्य के साथ ही सदाचार की शिक्षा देने वाला सदग्रंथ है। साहित्यकार केदार प्रसाद मेहता ने कहा कि गोस्वामी जी विश्व के महान साहित्यकार थे। उनकी शब्द संपदा विश्व के किसी भी साहित्यकार से अधिक है। समाजसेवी सुधीर कुमार ने कहा गोस्वामी तुलसीदास ने राम भक्ति के द्वारा न केवल अपना जीवन कृतार्थ किया अपितु समूची मानव जाति को राम के आदर्शों से जोड़ दिया। इस अवसर पर फिल्मकार एसके अमृत, कवयित्री प्रिया र|म, धीरज, संजय कुमार शर्मा, सुबोध कुमार, धर्मवीर कुमार, प्रेम प्रकाश आदि उपस्थित थे।

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