पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बच्चे कच्चे घड़े के समान, जैसे चाहे उसे ढालें

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

बच्चे कच्चे घड़े की तरह होते हैं। उसे जैसा चाहे वैसा ही आकार दे सकते है। बच्चे ही देश के भावी कर्णधार हैं। आवश्यक है उन्हें संस्कारों के साथ शिक्षा देने की। वही देश प्रगति करता है जहां के नागरिक शिक्षित और जागरूक होते हैं। ऐसे में शिक्षकों की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। क्योंकि देश के नौनिहालों को एक आदर्श नागरिक बनाना उनके ही हाथों में है। हमारे देश की परंपरा रही है कि हम अपना कोई भी कार्य बड़े बूढों का आशीर्वाद लेकर ही शुरू करते हैं। पर लोग आज अपनी प्राचीन संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। उक्त बातें गाजीपुर, बिंद स्थित गुरुकुल विद्यापीठ के वार्षिकोत्सव सह दादा–दादी सम्मान समारोह के अवसर पर विद्यालय के निदेशक राजेंद्र प्रसाद ने कही। इस अवसर पर सीओ राजीव रंजन पाठक ने कहा कि गुरुकुल विद्यापीठ बच्चों को शिक्षित करने के साथ साथ उनमे अपने समाज एवं घर के बुजुर्गों के प्रति संस्कार देने का काम कर रहा है। पब्लिक स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आशीष रंजन ने भी बच्चों की प्रतिभा को देखकर खुशी जताया और कहा कि ये बच्चे ही भविष्य हैं। बीडीओ सूरज कुमार और थाना प्रभारी राकेश कुमार ने बच्चों के द्वारा प्रस्तुत किये गये कार्यक्रमों की खूब सराहना की।

पढ़ाई संग संस्कार और अनुशासन पर जोर

सचिव प्रमोद कुमार ने कहा कि संस्कारों के साथ शिक्षा तथा अनुशासन विद्यालय प्रशासन की प्राथमिकता है। आज की युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता का अनुकरण कर रही है। यह सर्वथा गलत है। बुजुर्ग अपने को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। यह बिल्कुल गलत है। हम धीरे धीरे अपने संस्कारों को भूलते जा रहे हैं। बड़े बूढों का सम्मान तथा सेवा करनी चाहिए। उनके आशीर्वाद से ही हम अपने मंजिल तक पहुंच सकते हैं। इस अवसर पर 50 बुजुर्ग अभिभावकों एवं 30 समाजसेवियों को सम्मानित किया गया।

बच्चों ने मन मोहा

इस अवसर पर बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। मेरे देश की धरती स्वाती और उसके सहयोगी तथा नमो नमो प्रिंस और उसके सहयोगी ने प्रस्तुत कर लोंगो के मन मोह लिया। दादी मां दादी मां अंबिका और सहयोगी तथा बेटियों को बचा लो साची और आकांक्षा के गायन को लोगों ने खूब सराहा।

खबरें और भी हैं...