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ऑनलाइन आवेदन के बाद भी जिले में हजारों लोग नहीं बने पैक्स सदस्य

Nawada News - किसानों ने कहा- अफसरों व पैक्स अध्यक्षों की मिलीभगत से ऐसा किसानों के मुताबिक विभाग के अधिकारियों,...

Bhaskar News Network

Jul 14, 2019, 08:25 AM IST
Nawada News - despite the online application thousands of people have not been made pacs members in the district
किसानों ने कहा- अफसरों व पैक्स अध्यक्षों की मिलीभगत से ऐसा

किसानों के मुताबिक विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और पैक्स अध्यक्षों की मिलीभगत से आवेदनों को लटकाया जा रहा है। नतीजा हुआ कि ऑन लाईन आवेदन कर पैक्स अध्यक्ष और विभाग का चक्कर काटने को मजबूर है। ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि पैक्स अध्यक्षों के चहते ही पैक्स के सदस्य रहें और चुनाव में उनकी जीत आसान हो जाए। कुछ को छोड़कर बाकि के सभी पैक्सों में सदस्य बनाने को लेकर कुछ न कुछ विवाद था।

क्या है प्रक्रिया

नई प्रक्रिया के तहत पैक्स का सदस्य बनने के लिए किसानों को सहकारिता विभाग के साइट पर जाकर ऑन लाईन आवेदन करना है। आॅनलाईन होने के बाद आवेदन स्वतः संबंधित बीसीओ के पास पहुंच जाएगा। बीसीओ आवेदन का प्रिंट निकालकर सत्यापन के लिए संबंधित पैक्स अध्यक्ष को देंगे। विभाग द्वारा निर्धारित नियम के तहत 15 दिन के भीतर ही पैक्स अध्यक्ष को आवेदन का सत्यापन कर बीसीओ को सौंप देना है। इसके बाद बीसीओ द्वारा इस जिला सहकारिता कार्यालय भेजा जाता है जहां से सूची को बैंक भेजा जाता है।

मेसकौर प्रखंड के बारात पैक्स की सदस्यता लेने के लिए कुछ 88 किसानों ने आॅनलाईन दिया था लेकिन उन्हें अब तक पैक्स का सदस्य नहीं बनाया गया है। सुषमा देवी, दीपक कुमार, मुनिता कुमारी, उतम दवी, सुमित्रा देवी आदि करीब तीन दर्जन लोगों ने एक साथ आवेदन दिया था।

नारदीगंज प्रखंड के जफरा निवासी गौरव कुमार, गोपाल सिंह , सुबोध सिंह आदि किसानों ने पैक्स सदस्य बनने के लिए सहकारिता विभाग की साइट पर आॅनलाईन आवेदन दिया था। उन्हें पैक्स की सदस्यता नहीं मिली। सदस्यता नहीं मिलने पर किसानों ने डीएम को आवेदन देकर सहकारिता अधिकारी और ओड़ो पैक्स के अध्यक्ष पर आरोप जानबूझकर पैक्स सदस्य नहीं बनने देने का आरोप लगाया।

नरहट प्रखंड के गजरा चातर के पुटूस कुमार, सुरेश सिंह, अरूण कुमार चन्द्र आदि सहित 617 किसानों ने जमुआरा पैक्स में सदस्यता के लिए आवेदन दिया लेकिन उन्हें अब तक सदस्यता नहीं मिली। जमुआरा पंचायत के सरपंच मनीष कुमार रंजन का आरोप है कि पैक्स अध्यक्ष की मिलीभगत से जिला सहकारिता कार्यालय से सत्यापित आवेदन को बैंक नहीं भेजा गया है।

अध्यक्षों की मनमानी पर ब्रेक लगाने का उपाय भी कारगर नहीं

पहले किसानों को पैक्स सदस्य बनाने के लिए सहकारिता प्रबंधन समिति की मनमानी चलती थी। पैक्स अध्यक्ष अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर सूची में नाम जोड़ते और हटाते रहते थे। इससे पैक्स अध्यक्षों के मनचाहे लोग ही पैक्स समिति के सदस्य होते थे। पैक्स अध्यक्षों के मनमानी की शिकायत को खत्म करने के लिए ही राज्य सरकार ने पैक्स की सदस्यता को ऑन लाईन प्रक्रिया शुरू किया था। ताकि पैक्स अध्यक्षों की मनमानी पर ब्रेक लगेगा। प्रयास था कि पैक्स का सदस्य बनने के लिए किसानों को पैक्स अध्यक्षों की चिरौरी करने की जरूरत नहीं पडे़। लेकिन सरकार की इस ऑन लाईन प्रक्रिया के बाद भी पैक्स अध्यक्षों की मनमानी नहीं रूकी।

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