मेसकौर में नहीं खुलते ग्रामीण अस्पतालों के ताले सिर्फ टीकाकरण के दिन पहुंचते हैं स्वास्थकर्मी

Nawada News - गांवों में स्वास्थ सेवा पहुंचाने के लिए अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र और स्वास्थ उप केन्द्र खोले गए, लेकिन...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:25 AM IST
Messkaur News - do not open doors for rural hospitals in mesquare only on the day of vaccination
गांवों में स्वास्थ सेवा पहुंचाने के लिए अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र और स्वास्थ उप केन्द्र खोले गए, लेकिन अब इन ग्रामीण अस्पतालों को कोई देखने वाला नहीं है। अधिकांश दिन इन अस्पतालों का ताला नहीं खुलता है। मेसकौर प्रखंड में स्वास्थ सेवाएं बदहाल हो चुकी है। कुछ स्वास्थ केन्द्रों पर टीकाकरण के दिन स्वास्थकर्मी जाते हैं बाकी दिन कोई दिखता ही नहीं। नतीजा लोगों को प्राथमिक उपचार के लिए 20-25 किलोमीटर तक भटकना पड़ रहा है। गांव-गांव तक स्वास्थ सेवा पहुंचाने के संकल्पों के साथ गांवों में खोले गए स्वास्थ केन्द्र बंद रहते हैं। प्रखंड में कुल 11 अस्पताल हैं जिनमें से सिर्फ एक प्रखंड मुख्यालय का पीएचसी ही खुलता है। जबकि शेष सभी स्वास्थ केन्द्र बंद हैं। पीएचसी में भी सुविधाओं का टोटा है। जरूरी उपयोग की दवाएं नहीं है। शिवनंदन सिंह, बिगन राम आदि कहते हैं कि ऐसा लगता है कि प्रखंड के अस्पतालों को बुरी नजर लग गई है। प्रखण्डवासियों ने जिलाधिकारी से लेकर मंत्री तक को लिखित आवेदन दिया फिर भी आजतक कोई कार्रवाई नही हो सकी। सिविल सर्जन और चिकित्सा प्रभारी डॉक्टरों की कमी का रोना रोकर अपना पला झाड़ लेते है। बीरेंद्र सिंह, कुंदन सिंह, नरेश पाठक का कहना है कि कठघरा अस्पताल जबसे बना है अब तक डॉक्टर और स्टाफ के लिए तरस रहा है। पानी और एम्बुलेंस प्रभारी के मर्जी से चलता है और ढिंढोरा पीटा जाता है कि अस्पताल में पानी और एम्बुलेंस 24 घंटा उपलब्ध है। ग्रामीण नरेश यादव व बिगन राम कहते हैं मेसकौर अस्पताल बिना डॉक्टर व कर्मचारी के ही चलता है।

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