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गांव की आधी आबादी को ही मिल रहा है प्रखंड की पानी टंकी का लाभ

एक वर्ष पहले
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मेसकाैर प्रखंड क्षेत्र के सीतामढ़ी, कटघारा, बेलमान मिल्की, आदि गांव में स्वच्छ जल मुहैया करने के मकसद से हिसुआ प्रखंड के मंझवे पहाड़ी पर 1970 में 10 हजार लीटर क्षमता का पानी टंकी का निर्माण किया गया था। लेकिन यह भवन इस टंकी अाैर भवन भूतबंगला बन गया है। ग्रामीण मोहम्मद मुस्तफा ,इंद्रदेव सिंह ने बताया बिहार सरकार एनएच 82 किनारे टंकी बैठाया गया था। इसके संचालन के लिए पीएचईडी का क्वार्टर भी बना हुआ है। यहां चापाकल वर्कर, नलकूप वर्कर, सप्लायर वर्कर, जनरेटर वर्कर, फिटिंग वर्कर रहते थे लेकिन अब यहां काेई नहीं अाता है। इस टंकी में पानी स्टॉक हो जाने के बाद मंझवे ,कटघरा, बेलवान ,मिलकी,सीतामढ़ी में जलापूर्ति हाेती थी लेकिन अब यह पूरी तरह से भूतबंगला में तब्दील हाे चुका है। खिड़की - िकवाड़ गायब हो चुका है। यहां दिन में शराबियों एवं जुआड़ियाें का अड्डा लगा रहता है ।

50 साल पहले लगी थी पानी टंकी, 35 साल से जलापूर्ति बंद

सिटी रिपोर्टर| सिरदला/मेसकाैर

लाेगाें काे शुद्ध जल पिलाने के लिए सात निश्चय योजना के तहत वाटर सप्लाई के दावे किए जा रहें हैं ताे दूसरी तरफ सिरदला में प्रखंड कार्यालय के पास का जलमीनार ही सफेद हाथी साबित हाे रहा है। प्रखंड मुख्यालय के समीप लगाए गए जलमीनार से पंचायत की अ‌ाधी आबादी तक पानी नहीं पहुंच रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि दो वर्ष पूर्व जल आपूर्ति को लेकर जल मीनार बनाया गया । पानी पहुंचाने के लिए सड़क किनारे खुदाई भी की गई लेकिन पाइप नहीं बिछाया गया। पानी के लिए खोदे गए गड्ढे में पानी नहीं पहुंचा लेकिन कई राहगीर बाइक सवार दुर्घटनाग्रस्त होकर जान जरूर गवां बैठे हैं। यहीं हाल गुलाब नगर गांव का है। जहां जल मीनार के समीप घरों को छोड़ मेन प्वाइंट से सप्लाई पानी का प्रवाह इस कदर कम है कि अंतिम छोर तक पहुंचते-पहुंचते ओस की बूंद की माफिक नल से जल गिरता है। कमोबेश यही हाल सिरदला प्रखंड के सांढ़ पंचायत के भोला कुरहा और मुहगाय, अब्दुल के जयनगर, खटांगी के पड़रिया वार्ड नं 05 और सिमरा टांड वार्ड नं 04, घघट के राजौंध, और भीतिया, बांधी के कुशाहन वार्ड न 11 और बांधी वार्ड नं 09, धिरौंध के हेमजा भारत और परतापुर, लौंद पंचायत के करीब नौ वार्डो, सिरदला पंचायत के करीब 11 वार्डो आदि सहित प्रखंड के अधिकांश गांव में नल से जल ग्रामीणों को मयस्सर नही हुआ है। इस बाबत जब सिरदला प्रखंड विकास पदाधिकारी से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो फोन रिसीव नही हो सका।

ग्रामीणों ने कहा- 1985 में नसीब हुआ था पानी

ग्रामीणाें ने बताया िक 1985 में इस टंकी से पानी नसीब हुआ था। इसके बाद से काेई गतिविधि नहीं हुई है। अब पानी की समस्या से लाेग जूझ रहे हैं्र। इस इलाके में न ताे नल है ना जल है अाैर न हीं इस संयंत्र से पानी िमल रहा है। ना पाइप है ना कर्मचारी हैं पहाड़ी पर बना पानी टंकी शोभा कब वस्तु बचा हुआ है ग्रामीण मोहम्मद कयूम, यशवंत कुमार कहते हैं कि सरकार एवं जल पूर्ति विभाग के उदासीनता के कारण लाखों रुपया के लागत से जल का नली योजना तहस-नहस हो रहा है।

राजौंध, और भीतिया, बांधी के कुशाहन वार्ड न 11 और बांधी वार्ड नं 09, धिरौंध के हेमजा भारत और परतापुर, लौंद पंचायत के करीब नौ वार्डो, सिरदला पंचायत के करीब 11 वार्डो आदि सहित प्रखंड के अधिकांश गांव में नल से जल ग्रामीणों को मयस्सर नही हुआ है। इस बाबत जब सिरदला प्रखंड विकास पदाधिकारी से दूरभाष पर सम्पर्क किया गया तो फोन रिसीव नही हो सका।

सात निश्चय योजना में हर घर पानी पहुंचाने में हो रहे असफल
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