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दामोदरपुर गांव में विकास के नाम पर हुआ है कागजी काम और खानापूर्ति

एक वर्ष पहले
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प्रखंड के कई ऐसे गांव है,जहां के लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए लालायित है। पेयजल, नाली सोलिंग,सामुदायिक भवन, विद्यालय, आंगनबाडी केंद्र, सड़क समेत अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूर्ण रूपेण नही पहुंच पाया है। इसी तरह का एक गांव नारदीगंज प्रखंड के मसौढा पंचायत के कुझा टोला दामोदरपुर की है। यह गांव खूरी नदी के तट पर बसा हुआ है। महादलित,पिछडी,अतिपिछडी जाति बाहुल्य गांव है। गांव में तकरीबन 150 घर है। आजादी हुए 70 वर्ष बीत गया,लेकिन विकास शून्य हैै। इतनी बडी आबादी और पेयजल के नाम पर सात चापाकल है,जिसमें तीन चापाकल कब ही दम तोड़ चुकी है। हाल के दिनों में सात निश्चय योजना के तहत पानी टंकी लगाया गया है,लेकिन स्थिति यह है कि उस टंकी में बालू का जमाव हो जाने से सही तरीके से लोगों को पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। वही बीपीएल परिवारों के नाम पर घर को रोशन करने के लिए बिजली का कनेक्शन तो मिला है,लेकिन खेतों का पटवन करने के लिए ग्रामीणों को बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाया है। आज भी लोग डीजल से अपने खेतों का पटवन कर दो सौ एकड़ खेतों को सिंचित कर फसल को उपजाने को विवश है।

इस गांव के बच्चो को पढ़ने के लिए विद्यालय नहीं है। गांव से दूरी पर जाकर पढ़ाई कर अपना भविष्य बना रहे है। वहीं छोटे छोटे नौनिहालों का भविष्य निर्माण के लिए आंगनबाड़ी केन्द्र है, लेकिन भवन का निर्माण नहीं हो पाया है, वह भी निजी भवन में संचालित हो रहा है। समाजसेवी सीताराम प्रसाद, रामबली प्रसाद आदि कहते है गांव के मुख्य मार्ग से रघुबीर प्रसाद के घर तक हाल बदहाल है। सोलिंग हुआ है,लेकिन नाली का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे सड़क पर पानी गिरता है। इसके अलावा रामदेव माहतो के घर से टेेड़ुआ तक नाली का निर्माण हुआ है लेकिन गुणवता का अभाव रहने के कारण नाली से पानी झर झर कर निकल जाता है,लेकिन खूरी नदी तक नाली का निर्माण नहीं होने का मलाल ग्रामीणों में देखा जा हो पाया है,इसके अलावा अन्य गली में नाली का कार्य नहीं हो पाया है। वही रामबालक यादव,रीता देवी,दिलीप कुमार कहते है कि शादी व्याह अन्य समारोह में लोगो को बैठने के लिए एक भी सामुदायिक भवन का निर्माण नहीं हो पाया है,आज भी शादी विवाह अन्य समारोह मे खेतों में टेंट लगाकर आतिथ्य सत्कार किया जा रहा है। सबसे बड़ी समस्या आवागमन का है। कुझा गांव से दामोदरपुर तक कच्ची सड़क है।

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