वारिश पाक के शिष्य पंचबदन बाबा की गद्दी पर होगी चादरपोशी

Nawada News - वारिसलीगंज प्रखंड अन्तर्गत बाली गांव में आगामी 15 एवं 16 अक्टूबर को मड़ही पूजा का आयोजन किया जाएगा। कार्तिक द्वितीया...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:36 AM IST
Nawada News - panchabadan baba39s disciple of warish pak will be on the throne
वारिसलीगंज प्रखंड अन्तर्गत बाली गांव में आगामी 15 एवं 16 अक्टूबर को मड़ही पूजा का आयोजन किया जाएगा। कार्तिक द्वितीया को होने वाले मड़ही पूजा की तैयारी शुरू कर दी गई है। सलाना आयोजित होने वाले उर्स के लिए गांव के लोग तैयारियों में जुट गए हैं। पूजा में दूर दराज से हजारो श्रद्धालु अपनी मन्नत के लिए आते हैं और वारिश पाक के शिष्य बाबा पंचबदन की गद्दी पर चादरपोशी करते हैं। गांव के लोग मड़ही प्रेमियों को आमंत्रित करने में लगे हैं। गांव के शशी वर्मा,कन्हैया,वेदप्रकाश गौतम,शनीलाल,रामजन्म,गोलू,सुधांशु आदि युवाओं की टीम मड़ही पूजा के प्रचार प्रसार की जिम्मेवारी निभा रहे हैं। सेवानिवृत्त शिक्षक जितेन्द्र सिंह ने कहा मड़ही पूजा की सूचना ही श्रद्धालुओं के लिए निमंत्रण है। व्यवस्थापक देवाश्रय कुमार चंचल ने कहा 1974 से शुरू हुई मड़ही पूजा में दूर दराज से हजारो लोग दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। पूजा से पूर्व मड़ही की साफ सफाई,रंगरोगन,साज सज्जा का कार्य युद्ध स्तर पर हो रहा है। ग्रामीण बमबम कुमार,विपिन कुमार,मनोज कुमार, राहुल कुमार, प्रियरंजन श्रीनिवास, रामरतन सिंह, किशोर कुणाल, पवन कुमार, चुनचुन कुमार आदि लोग बढ़चढ़ कर भागीदारी निभा रहे हैं।

पूजा की तैयारी में जुटे गांव के लोग,दूर दराज से आते हैं श्रद्धालु

मड़ही पूजा काे लेकर तैयार बाबा पंच बदन की गद्वी।

वारिस पाक के शिष्य पंचबदन की याद में कार्तिक द्वितीया को होती है मड़ही पूजा

प्रेम सौहार्द व भाईचारे का प्रतीक माने जाने वाले इस पर्व को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। सभी लोग अपने अपने स्तर से मेला में आने वाले मेहमानों की स्वागत की तैयारी में जुट गए हैं। बता दें कि 19 वीं सदी के महान सूफी संत वारिस अली शाह उर्फ वारिस पिया के अनुयायी रहे महंथ बाबा उर्फ संत शिरोमणी पंचबदन सिंह की याद में उनके अनुयायियों द्वारा खास ढंग से दो दिनों तक पूजा अर्चना की जाती है। उक्त पूजा में देश के कोने कोने से वारसी धर्मावलम्वी श्रद्धालुओं का आगमन होता है तथा दो दिनों तक चलने वाले समारोह में विभिन्न आयामों से लोग रुबरु होते हैं,जिसमे जाति,धर्म और सम्प्रदाय का कोई बंधन नहीं होता। सभी अपने अपने धर्म के अनुसार पूजा करते हैं। इस मौके पर विभिन्न तरह के कौव्वाल,सूफी भजन,ऐतिहासिक नाटक मंचन,लोक नृत्य आदि का आयोजन किया जाता है। आने वाले सूफी संतों से लेकर हर किसी के लिए ठहरने व खाने तथा मनोरंजन की व्यवस्था मड़ही से जुड़े लोगों द्वारा की जाती है। इस पूजा की खास खासियत यह है कि इसमे शामिल होने तथा मन्नते मांगने के लिए हर सम्प्रदाय के लोग पहंुचते हंै।

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