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ट्रेनें रद्द होने से यात्री परेशान, रेलवे को 15 दिन में एक करोड़ से अधिक का नुकसान

एक वर्ष पहले
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केजी रेल खंड पर लगतार 18वें दिन गुरूवार को भी प्रमुख ट्रेनों का परिचालन रद रहा। ट्रेनें रद्द होने के चलते होली की छुट्टी में घर आए लोगों को वापस काम पर लौटने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। बुधवार की सुबह नवादा रेलवे स्टेशन पर भारी भीड़ दिखी लेकिन यात्रियों को बिना ट्रेन के ही लौटना पड़ा। गया जाने के लिए सुबह 7 बजे किउल-गया मेमू पैसेंजर ट्रेन नवादा आई। इसके बाद दिन भर गया के लिए कोई ट्रेन नहीं मिली। शाम करीब सवा चार बजे 63355 किऊल -गया मेमू सवारी गाड़ी आई। सुबह में रेलवे स्टेशन आए लोगों में से अधिकतर को गया रेलवे स्टेशन से महाबोधी और पुरुषोत्तम एक्सप्रेस पकड़नी थी। नवादा रेलवे स्टेशन से गया के लिए कोई ट्रेन नहीं मिलने के कारण यात्रियों ने आनन-फानन में गया के लिए बस पकड़ लिया। इस उधेड़-बुन में कई लोगों की दिल्ली की ट्रेनें भी छूट गई। ट्रेनों के रद होने से न सिर्फ लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि रेलवे को भी भारी घाटा हो रहा है। होली के दौरान नवादा रेलवे स्टेशन में जहां हर दिन दो-ढाई लाख रुपए तक की टिकट बिक जाती थी वहीं इस बार एक दिन में 20-35 हजार के टिकट भी नहीं बिक रहे। हालत ऐसे ही कि कई स्टेशनों में तो हजार रुपए की भी टिकट बिक्री नहीं हो पा रही है। एक अनुमान के मुताबिक बीते पंद्रह दिन के भीतर किउल-रेलखंड रेल लाईन पर रेलवे को लगभग एक करोड़ का नुकसान हुआ है।

केस स्टडी : 2 : काउंटर पर नहीं थे 600 रुपए

जिले के नरहट प्रखंड के दौलतपुरा निवासी गुलशन कुमार ने दिल्ली जाने के लिए गरीब रथ का टिकट लिया था। किसी कारण से जाने का कार्यक्रम टल गया और वे टिकट का रिफंड पाने के लिए तिलैया रेलवे जंक्शन में बने आरक्षण टिकट खिड़की पहुंचे। वहां स्टाफ ने बताया कि सुबह से किसी का रिजर्वेशन नहीं हुआ है। लिहाजा काउंटर पर रिफंड लौटाने के लिए कैश नहीं है। उन्हें रिफंड लेने के लिए गया जाना पड़ा।

डेली पैसेंजरों को रही है परेशानी

ट्रेनों के रद होने के कारण इस रेल खंड के डेली पैसेंजरों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। रेल लाईन किनारे के के लोगों की मार्केटिंग, बच्चों की पढाई , नौकरी पेशा लोगों की ड्युटी सब ट्रेन से ही व्यवस्थित होती है। सुबह में बड़ी संख्या में दूध बेचने वाले लोग भी ट्रेनों से ही जिला मुख्यालय आते थे। लेकिन सुबह 6-7 बजे के बाद दोपहर तक कोई ट्रेन नहीं आती। ऐसे में उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। दूध उत्पादक बताते हैं कि 100 रुपए के दूध बेचने के लिए 50 रूपया भाड़ा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में बहुत घाटा हो रहा है। इस तरह की समस्या कई लोगों को उठानी पड़ रही है। जिसमें बड़ी संख्या में काम की तलाश में गया जानेवाले मजदूर वर्ग शामिल है।

नवादा रेलवे स्टेशन

10 गुनी कम हुई टिकटों की सेल

रेलवे टिकट काउंटर के कर्मियों के अनुसार नवादा रेलवे आरक्षण खिड़की पर हर औसतन हर दिन करीब 150 रिजर्वेशन होता था अभी किसी दिन 20 तो किसी दिन 30 टिकट ही कट रहें हैं। इसी तरह पैसेजेंर और एक्सप्रेस ट्रेनों के लिए गैर आरक्षित टिकटों के सेल में भी भारी कमी आई है। होली के दिनों में नवादा रेलवे स्टेशन पर सभी तरह के टिकटों को मिलाकर हर दिन 2 लाख रुपए से ज्यादा की आमदनी होती थी लेकिन इस बार 30 हजार के आस-पास ही राजस्व आ रहा है। तिलैया जंक्शन के स्टेशन मास्टर राजेश कुमार ने बताया कि आरक्षण खिड़की खुलने के बाद हर दिन 30-40 हजार के टिकट कट रहे थे जबकि ट्रेनों के रद होने के बाद सेल 5-6 हजार रह गया है।

रजौली निवासी दीपक कुमार दिल्ली के तुगलकाबाद में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। वे होली से दो दिन पहले छुट्टी में घर आए थे। होली खत्म होने के बाद गुरूवार को उन्हें दिल्ली लौटना था। इसके लिए उन्होंने गया से खुलने वाली महाबोधी एक्सप्रेस में रिजर्वेशन कराया था। महाबोधी 2 बजे गया से खुलती है। वे गया जाने के लिए बुधवार की सुबह 11 बजे नवादा रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। पता चला कोई ट्रेन नहीं है। वहां से बस पकड़ने के लिए पुल पर स्थित बस स्टैंड पहुंचे तो साढे ग्यारह से ज्यादा बज चुके थे। उनके लिए ट्रेन पकड़ना मुश्किल था इसलिए उन्हें ट्रेन छोड़नी पड़ी।


केस स्टडी : 1 : छोड़नी पड़ी ट्रेन

गया के लिए सुबह सात बजे के बाद सीधे शाम चार बजे मेमू पैसेंजर की सुविधा
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