दुकानदार नहीं बेच रहे सरकारी स्कूलों की किताबें, बच्चे निराश हाेकर लौट रहे वापस

Nawada News - जिले के पुस्तक विक्रेताओं के पास सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए पुस्तकें नहीं है। ये दुकानदार प्राइवेट पब्लीकेशन...

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 08:41 AM IST
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जिले के पुस्तक विक्रेताओं के पास सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए पुस्तकें नहीं है। ये दुकानदार प्राइवेट पब्लीकेशन की किताबें तो धड़ल्ले से बेच रहे हैं। लेकिन बिहार टेक्स्ट बुक पब्लिकेशन की किताब बेचने में नाक-भौं सिकुड़ा लेते हैं।

दुकानदार कहते हैं कि सरकारी पब्लिकेशन में मार्जिन काफी कम है। इसके अलावा इसे लाने में भी काफी परेशानी है। बहरहाल कारण जो हो जिले में दो सौ से अधिक किताब की दुकान है, लेकिन किसी भी दुकान में बिहार टेक्स्ट बुक पब्लिकेशन की किताब उपलब्ध नहीं है। नतीजन बच्चे घर से रुपए लेकर किताब खरीदने निकलते हैं लेकिन अनुपलब्धता के कारण निराश होकर वापस लौट जाते हैं।

पुरानी, रद्दी किताबें ही बच्चों का सहारा

प्रारंभिक स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करने वाले सरकारी स्कूल के बच्चों को पिछले तीन वर्षों से पुरानी किताबों से ही पढ़ाई करना पड़ रहा है। शिक्षा का अधिकार कानून के तहत 6-14 आयु वर्ग के बच्चों की मुफ्त पढ़ाई के लिए पाठ्य पुस्तक, पोशाक व स्कूल बैग, मुफ्त में देना है। लेकिन जिले के किसी भी बच्चों को अबतक स्कूल बैग नहीं मिला है। पोशाक के लिए बच्चों के खाते में राशि भेजी जाती है। इस राशि से बच्चे अपने लिए साल भर के जाड़े और गर्मी के लिए पोशाक खरीदते हैं। लेकिन पाठ्य पुस्तक की कमोबेश स्थिति यह है कि जिले के साढ़े चार लाख बच्चों में से आधे के पास भी किताबें उपलब्ध नहीं है।

मेसकौर बीआरपी बृजेश कुमार ने बताया पिछले तीन वर्षों से पुरानी किताब से ही बच्चों की पढ़ाई हो रही है। पिछले साल किताब खरीदने के लिए बच्चों के खाते में राशि भेजी गई, लेकिन दुकानदारों ने सरकारी पुस्तकें बेचने में रुचि नहीं दिखाई। परिणामत: अधिकांश बच्चे बिना किताब के ही रह गए। इससे पहले के वर्षों में विभाग द्वारा ही बच्चों को किताबें उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन समय पर कभी भी किताबें नहीं मिली। संभाग प्रभारी अरुण वर्मा ने बताया बच्चों के खाते में राशि आरटीजीएस कराने के लिए सभी स्कूल के वीएसएस खाते में राशि भेज दी गई है। पहली से पांचवी कक्षा के छात्रों के लिए 250 रुपए तथा छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए 400 रुपए किताब खरीदने के लिए विभाग दे रहा है।

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