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स्नान दान के बाद लिया चूड़ा-दही, तिलकुट और िखचड़ी का स्वाद, पतंगबाजी का भी िलया अानंद

Nawada News - सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जिले में मकर संक्राति का त्यौहार संपन्न हो गया। जिले में मकर संक्रांति का त्योहार...

Jan 16, 2020, 08:35 AM IST
Nawada News - taste of chuda curd tilkut and khichdi taken after bathing also enjoyed kite flying
सूर्य के उत्तरायण होने के साथ जिले में मकर संक्राति का त्यौहार संपन्न हो गया। जिले में मकर संक्रांति का त्योहार बुधवार को पारंपरिक रीति रिवाज के साथ मनाया गया। लोगों ने चूड़ा, दही, तिल-गुड़ से निर्मित मिठाई को ब्राह्मणों को दान दिया। इसके बाद सपरिवार चूड़ा-दही, तिलकुट का आनंद लिया। हालांकि इस बार भी संशय की स्थिति रहने के चलते कई लोगों ने 14 जनवरी यानि मंगलवार को भी मकर संक्रांति का पर्व मनाया। वैसे अधिकांश लोगों ने पंचांग को मानते हुए बुधवार को पर्व मनाया। सुबह में लोगों ने जलाशयों, पोखरों, तालाबों, कुएं, नदियों में जाकर स्नान किया। बुधवार को ही सरकारी स्कूलों तथा विभिन्न संस्थान और प्रतिष्ठानों में मकर संक्रांति की छुट्टियां थी। लिहाजा लोगों ने मकर संक्रांति का उत्सव उल्लास के साथ मनाया। श्रद्धालुओं ने बुधवार की सुबह स्नान के साथ शुरू की और इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख-समद्धि की कामना की। इसके बाद तिल दान कर खुद भी तिल युक्त भोजन किया।

बच्चों ने पंतगबाजी का लिया आनंद

जिले के विभिन्न गांवों और शहरों में पतंगबाजी होते दिखी। बुधवार को सुबह दस बजे के बाद कोहरा पूरी तरह से हट गया और सूरज निकल आया। लिहाजा मौसम सुहावना होकर पतंगबाजी के लिए अनुकूल हो गया। इससे बच्चों का उत्साह बढ़ गया। चूड़ा दही के साथ ही पतंग बाजी में शुरू हो गए। लोग छतों पर, खलिहानों तथा खेतों में पतंग उड़ाते दिखे। बच्चे एक दूसरे का पतंग काटने की कोशिश कर खुशी का इजहार कर रहे थे। पतंगबाजी तो मंगलवार से ही शुरू हो गई थी लेकिन घने कोहरे और खराब मौसम के कारण बच्चे जमकर पतंगबाजी नहीं कर पाए थे लिहाजा जब बुधवार को मौका मिला तो बच्चों ने खूब मस्ती की।

पर्व
श्रद्धालुओं ने सुबह स्नान करने के बाद भगवान की पूजा-अर्चना कर सुख-समद्धि की कामना की

नदी में स्नान करने पहंुची महिलाएं।

क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति

बता दें कि माघ कृष्ण पक्ष की पंचमी में जब भी सूर्य मकर राशि में गोचर करता है तो उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का काफी महत्व माना गया है। सूर्य के मकर राशि में जाते ही खरमास की समाप्ति भी हो जाती है। जिससे शादी ब्याह जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इस दिन पवित्र नदी गंगा में स्नान करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। बुधवार से सूर्य का मकर राशि में गोचर हुआ है। अब खरमास खत्म हो चुका है और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति

बता दें कि माघ कृष्ण पक्ष की पंचमी में जब भी सूर्य मकर राशि में गोचर करता है तो उस दिन मकर संक्रांति मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस दिन का काफी महत्व माना गया है। सूर्य के मकर राशि में जाते ही खरमास की समाप्ति भी हो जाती है। जिससे शादी ब्याह जैसे सभी मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जाते हैं। इस दिन पवित्र नदी गंगा में स्नान करने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है। बुधवार से सूर्य का मकर राशि में गोचर हुआ है। अब खरमास खत्म हो चुका है और सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।

मकर संक्रांति पर स्नान दान का महत्व

मकर संक्रांति के अवसर पर जिले से हजारों श्रद्धालु देशभर के विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थान में स्नान करने गए। जो लोग नहीं जा सके वह घर में ही सुबह स्नान कर भगवान की आराधना की। धार्मिक मान्यताओं अनुसार संक्रांति के दिन ही मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर राजा भागीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई गंगासागर तक पहुंची थी। धरती पर अवतरित होने के बाद राजा भागीरथ ने गंगा के पावन जल से अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। इसलिए मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करना काफी फलदायी माना गया है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने से कष्टों का निवारण होता है।

मकर संक्रांति पर स्नान दान का महत्व

मकर संक्रांति के अवसर पर जिले से हजारों श्रद्धालु देशभर के विभिन्न प्रमुख तीर्थ स्थान में स्नान करने गए। जो लोग नहीं जा सके वह घर में ही सुबह स्नान कर भगवान की आराधना की। धार्मिक मान्यताओं अनुसार संक्रांति के दिन ही मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर राजा भागीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई गंगासागर तक पहुंची थी। धरती पर अवतरित होने के बाद राजा भागीरथ ने गंगा के पावन जल से अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। इसलिए मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करना काफी फलदायी माना गया है। मान्यता है कि संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने से कष्टों का निवारण होता है।

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