पैक्स चुनाव काे लेकर उम्मीदवार जीतने के लिए अपना रहे तरह-तरह के तरीके

Nawada News - पांच-सात साल पहले जहां दर्जनों पैक्स अध्यक्ष और अधिकतर कार्यकारिणी सदस्य निर्विरोध चुन लिए जाते थे और पता भी नहीं...

Dec 04, 2019, 08:35 AM IST
Nawada News - various ways are being adopted to win the candidate by taking pacs elections
पांच-सात साल पहले जहां दर्जनों पैक्स अध्यक्ष और अधिकतर कार्यकारिणी सदस्य निर्विरोध चुन लिए जाते थे और पता भी नहीं चलता था। लेकिन अब पैक्स चुनाव नामांकन में जनसैलाब उमड़ रहा है। नामांकन में जूट रही भीड़ को खिलाने में शहर की सारी मिठाई दुकान खाली हो जा रहीं हैं। शनिवार को हिसुआ में उम्मीदवार के नामांकन में इतनी भीड़ उमड़ी की होटलों की मिठाइयां कम पड़ गई। कई उम्मीदवारों को अपने समर्थकों को तुंगी, तो किसी को सकरामोड़ और सिराज नगर के मिठाई दुकानों में ले जाकर खिलाना पड़ा। इसी तरह सोमवार को नवादा में नामांकन की अंतिम तिथि थी। कई उम्मीदवारों ने अलग-अलग होटलों में अपने समर्थकों के लिए खाना और मिठाई की व्यवस्था की थी। लेकिन उन होटलों में मिठाइयां कम पड़ गई। नतीजतन उम्मीदवारों को अपने निकटवर्ती ग्रामीण बाजारों में ले जाकर समर्थकों की सेवा करनी पड़ी। कई जगहों पर तो मछली का भी इंतजाम किया गया था। कुछ सालों के भीतर आए इस बदलाव को देखकर जितनी मुंह उतनी बातें होती है। सवाल उठता है कि आखिर पैक्स चुनाव को लेकर इतनी मारा-मारी क्यों है!

अध्यक्षाें की अकूत तरक्की देख उम्मीद से ज्यादा पैसा लुटा रहे उम्मीदवार

समर्थकों की भीड़।

पानी की तरह बहा रहे पैसे

एक-एक उम्मीदवार चुनाव में 5-7 लाख रुपए तक खर्च करने को तैयार है। दरअसल, हालिया कुछ सालों में कई पैक्स अध्यक्षों जबरदस्त आर्थिक तरक्की की है। उनकी तरक्की को देखते हुए नए उम्मीदवार हर कीमत पर जीतना चाहते हैं।

2017 में 1300 एमटी धान का पता नहीं

2017 में लगभग 1300 एमटी धान का घोटाला हो गया। पैक्स अध्यक्ष और मिलर के मिलीभगत के कारण किसानों से खरीदा गया धान का चावल एसएफसी में जमा नहीं हुआ। एफआईआर हुई। लेकिन दोषियों का कुछ नहीं हो पाया।

एफआईआर होने के बाद भी जमा नहीं हुआ चावल

पिछले साल चावल जमा नहीं करने वाले जिन पैक्सों के जिनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई उन्होंने भी अब तक पूरा पैसा जमा नहीं किया है। एफआईआर होने के बाद भी एक-एक पैक्स में 20- 25 लाख रूपया का बकाया है। इस साल भी एक ही पैक्स के पास 22 लाख का बकाया है। हालांकि चुनाव प्राधिकार ने कर्जदार पैक्स अध्यक्षों के चुनाव लड़ने पर रोक लगा दिया है।

2018 में सबसे बड़ा घोटाला

2017 में धान की हेरा-फेरी के बाद 2018 में जिले के कई और पैक्स अध्यक्षों ने भी भ्रष्टाचार की बहती गंगा में हाथ धो लेने का मन बना लिया। 2018 में लगभग एक करोड़ का चावल हड़प लिया गया। इसमें कई पैक्स अध्यक्षों के खिलाफ सर्टिफिकेट केस और एफआईआर तक हुई। लेकिन सरकारी चावल का अता पता नहीं चला।

विभाग के ढील-ढाले रवैये से लम्बी हो रही घोटालों की फेहरिश्त

जिले में धान और चावल घोटाले की फेहरिस्त लम्बी है। जानकारों के मुताबिक सहकारिता के लचर रूख के कारण ऐसा लगातार हो रहा है। चावल जमा कराने में जिनके खिलाफ अनियमितता की शिकायत मिलती है उसके विरुद्ध कार्रवाई करने में इतना समय लगता है कि धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में पहुंच जाता है और राशि का घोटाला हो जाता है।

इस साल भी 22 करोड़ का चावल गायब

इस साल भी 22 करोड़ का चावल गायब हो गया है। 2019 में जिले के 168 सोसायटी ने 4994 किसानों से 32652.436 एमटी धान खरीदा था। लेकिन मीलरों को अब तक 31634.237 मिट्रिक टन धान जमा किया गया है। शेष के लगभग एक हजार मिट्रिक टन धान पैक्स अध्यक्ष डकार गए।

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