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सरकार ने दे दिया, परिवार को नहीं मिला तो कौन खा गया शहीद का मुआवजा?

सरकार का दावा: शहीद अभय के परिवार को 5 लाख मुआवजा दिया; परिवार बोला- हमें एक नया पैसा भी अब तक नहीं मिला

Danik Bhaskar | Mar 09, 2018, 11:21 AM IST
शहीद अभय उनकी पत्नी के साथ। (फा शहीद अभय उनकी पत्नी के साथ। (फा

पटना. बीते साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ के सुकमा में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हुए थे। इसमें वैशाली के अभय कुमार भी शामिल थे। तब बिहार सरकार ने 5 लाख मुआवजा राशि देने की घोषणा की थी। लगभग एक साल बीतने को है, शहीद की विधवा को बतौर मुआवजा अबतक एक नया पैसा नहीं मिला है। हैरानी की बात तो यह है कि सरकारी फाइलों में मुआवजा दे दिए जाने का दावा किया गया है। गौरतलब है कि प्रभारी डीएम तक को नहीं पता कि शहीद के परिजनों को मुआवजे की राशि मिली है या नहीं। बड़ा सवाल, सरकार ने दे दिया और परिवार को नहीं मिला, तो आखिर कौन खा गया शहीद का मुआवजा ? ऐसे सामने आया फर्जीवाड़ा...

- मामला तब खुला जब सैनिक कल्याण निदेशालय (बिहार) की ओर से स्थानीय सांसद को एक लेटर भेजा गया।
- लेटर में जिला प्रशासन का हवाला देते हुए कहा गया कि शहीद के परिजनों को सरकार से दिया गया मुआवजा मिल गया है।
- इस पर हाजीपुर के सांसद सह केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने शहीद के परिजनों से मुलाकात की।
- इस दौरान परिजनों और गांव के लोगों ने सांसद से गांव में शहीद भवन, उचित मुआवजा और शहीद की पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग रखी थी।
- इस पर सांसद की ओर से एक पत्र बिहार सरकार को लिखा गया था जिसमें उक्त मांगों के साथ 11 लाख का मुआवजा देने की मांग की गई थी।
- पत्र के जवाब में 21 जून को सैनिक कल्याण निदेशालय ने मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव को पत्र भेजा।
- प्रतिलिपि पासवान को भी भेजी गई। पत्र में साफ लिखा था कि 5 लाख की राशि दे दी गई है।

इन्हें भी नहीं पता मुआवजा मिला है या नहीं
- गौरतलब है कि प्रभारी डीएम तक को नहीं पता कि शहीद के परिजनों को मुआवजे की राशि मिली है या नहीं।
- डीएम सर्व नारायण यादव ने कहा- फिलहाल कुछ बता नहीं सकते। अगर नहीं मिला है तो इसकी जांच की जाएगी।
- दूसरी ओर शहीद के ग्रामीण एवं रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अरविन्द चौधरी ने कहा कि एक शहीद की पत्नी जिसकी उम्र मात्र 19 साल है, पति की मौत के तुरंत बाद वह क्या बोल सकती थी। - 'मुआवजा लौट गया तो दोबारा बाद में किसी अधिकारी को आकर देना चाहिए था।'

ऐसी संवेदनहीनता
- जब शहीद का शव पहुंचा तो उसके एक-दो दिन बाद ही जंदाहा के बीडीओ मुकेश कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर हम और महुआ एसडीओ 5 लाख रुपए का चेक लेकर लोमा गांव पहुंचे थे।
- लेकिन परिवार के लोगों ने चेक लेने से इनकार कर दिया था। इसकी सूचना हमलोगों ने जिला प्रशासन को दे दी थी।
- बाद में परिजनों को मुआवजा मिला या नहीं इसकी जानकारी हमारे पास नहीं है।
- जबकि हकीकत यह है कि ग्रामीणों ने चेक लेने से मना किया और अधिकारियों को लौटा दिया था।

शहीद की पत्नी बोलीं- हमसे अफसर मिले ही नहीं...
- 'मुआवजे की राशि हमें अब तक नहीं मिली है। मेरे पति की मौत को अब साल होने वाला है। 24 अप्रैल को उनकी डेथ हुई थी 25 या 26 को मुआवजा राशि लेकर कुछ लोग आए थे जिसका बाद में मुझे पता चला।'
- 'उस वक्त गांववालों ने वापस कर दिया था। दोबारा आज तक कोई मुआवजा देने नहीं आया। शहीद के चाचा अवधेश चौधरी ने बीते वर्ष 8 दिसंबर को सीओ जंदाहा को मुआवजा देने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन में शहीद के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे की मांग की गई।'