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एससी-एसटी एक्ट के तहत जेल में बंद बाड़मेर के पत्रकार को जमानत

20 अगस्त को राजस्थान पुलिस गिरफ्तार कर लाई थी, 21 को भेजा गया था जेल

Danik Bhaskar | Aug 25, 2018, 08:08 AM IST
जमानत मिलने के बाद मीडिया से ब जमानत मिलने के बाद मीडिया से ब

पटना. एससी-एसटी अधिनियम के तहत बेउर जेल में बंद बाड़मेर के पत्रकार दुर्गेश सिंह उर्फ दुर्ग सिंह को पटना सिविल कोर्ट की विशेष अदालत ने शुक्रवार को जमानत दे दी। एससी-एसटी अधिनियम के विशेष प्रभारी न्यायाधीश मनोज सिन्हा ने दुर्ग सिंह की ओर से दाखिल की गई नियमित जमानत पर सुनवाई के बाद उन्हें पांच हजार रुपए के निजी मुचलके के साथ इतनी की राशि के दो जमानतदारों का बंधपत्र दाखिल करने पर जेल से मुक्त करने का आदेश दिया।

दरअसल, नालंदा जिले की डुमरावां पंचायत के टेटुआ गांव के निवासी राकेश पासवान ने मजदूरी के रुपए हड़प लेने, मारपीट करने और जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते हुए विशेष न्यायालय में 31 मई को शिकायती मुकदमा 261/18 दाखिल किया था। इस मामले में कोर्ट ने 9 जुलाई को गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया। इसके बाद बाड़मेर के एसपी ने दुर्ग सिंह को गिरफ्तार कर पटना भेजा था।

दुर्ग की ओर से वकील विनय कुमार मिस्त्री ने अदालत में कहा कि राकेश पासवान ने कहा है कि घटना 7 मई को हुई, लेकिन कोर्ट में परिवाद 31 मई को किया गया। राकेश ने 24 दिन बाद केस करने की ठोस वजह नहीं बताई है। राकेश का अगर 72 हजार रुपए बकाया था तो उसे पहले दुर्ग को लीगल नोटिस या पत्र देना चाहिए था।

दुर्ग कभी पटना अाया ही नहीं और न ही उसका पत्थर या गिट्टी का राजस्थान में कारोबार है। दुर्ग का आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है। सरकारी वकील संतोष कुमार और राकेश के वकील शशिकांत ने कहा कि मामला एससी-एसटी अधिनियम के तहत उत्पीड़न का है, इसलिए जमानत नहीं दी जाए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद दुर्ग को नियमित जमानत दे दी।

आईजी ने जांच शुरू की : इस बीच, डीजीपी केएस द्विवेदी के आदेश के बाद जोनल आईजी नैयर हसनैन खान ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि पुलिस राकेश का सुराग लगाने गई थी लेकिन वह घर पर नहीं था। पुलिस इस बात की भी जांच करेगी कि किस तरह वारंट बाड़मेर पुलिस को गया। आईजी ने कहा कि इस मामले में राकेश के साथ ही दोनों गवाहों संजय सिंह व सुरेश प्रसाद से पूछताछ होगी। अगर दुर्ग सिंह के परिजन आकर जानकारी देना चाहते हैं, तो वे आ सकते हैं। दो-तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट डीजीपी को दे दी जाएगी।

दुर्ग के परिजनों ने दैनिक भास्कर को कहा-थैंक्स

जमानत मिलने के बाद दुर्ग के पिता गुमान सिंह राजपुरोहित, बड़े भाई भवानी सिंह राज पुरोहित, चचेरे भाई प्रवीण राजपुरोहित, दुर्ग के पत्रकारिता के गुरुदेव किशुन राठौर ने दैनिक भास्कर को थैंक्स कहा। परिजनों ने कहा कि दैनिक भास्कर ने ही सबसे पहले मामले की पूरी पड़ताल कर प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसके बाद अन्य मीडिया हाउस ने भी इसे कवर किया। बाद में मामले कह जांच करने का सरकार ने आदेश दिया। इधर केंद्रीय बाल श्रम बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष शिशुपाल सिंह निम्बाड़ा ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि निर्भीक युवा पत्रकार दुर्ग सिंह को सुनियोजित तरीके से राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाना पत्रकारिता पर हमला है। न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और है। न्याय की यह जंग जारी रहेगी।