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3 इंजीनियरिंग कॉलेजों के प्राचार्यों को मिली शक्ति, इनमें इसी सत्र से होगा एडमिशन भी

प्रभारी प्राचार्यों की हुई नियुक्ति, नए सत्र से शैक्षणिक गतिविधि को शुरू करने के लिए बनाई जाएगी रणनीति

Dainik Bhaskar

Aug 25, 2018, 04:28 AM IST
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पटना. राज्य के तीन नवगठित इंजीनियरिंग कॉलेजों में शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। शैक्षणिक सत्र 2018-19 से इन तीनों कॉलेजों में शैक्षणिक कार्यक्रमों को चालू करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए पहले तो साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने इन कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्यों की प्रतिनियुक्ति की। अब उन्हें वित्तीय अधिकार भी दे दिए गए हैं, ताकि कॉलेजों को फंक्शनल बनाने के लिए विभाग की ओर से कार्रवाई को तेज किया जा सके। नवनियुक्त प्रभारी प्राचार्यों को संबंधित कॉलेजों में प्रक्रिया को पूरी कराने का प्रयास अब तेज करना होगा।


साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग की ओर से एमआईटी मुजफ्फरपुर के सह प्राध्यापक डा. सुरेश कुमार को राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज वैशाली, लोकनायक जय प्रकाश इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी छपरा के सह प्राध्यापक विमल कुमार को राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जमुई का प्रभारी प्राचार्य बनाया गया है। वहीं, कटिहार इंजीनियरिंग कॉलेज के सह प्राध्यापक डा. केएन प्रसाद राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बांका के प्रभारी प्राचार्य बनाए गए हैं। साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग ने आदेश जारी कर तीनों प्रभारी प्राचार्यों को संस्थागत वित्तीय कार्यों को संपादित करने के लिए वित्तीय शक्ति प्रदान की गई है।

नए सत्र से शुरू होंगी कक्षाएं

नए इंजीनियरिंग कॉलेजों में नए सत्र से कक्षाओं के आयोजन पर भी कार्य किया जा रहा है। तीन नए इंजीनियरिंग कॉलेजों खुलने से संख्या बढ़कर 19 हो जाएगी। बांका, जमुई और वैशाली में इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को जमीन भी मिल चुकी है। भवन निर्माण होने तक बांका, जमुई और वैशाली पॉलीटेक्निक कॉलेज में इंजीनियरिंग कॉलेज चलेगा। इस साल अररिया, नवादा और सीवान में पॉलीटेक्निक कॉलेज खोलने की अनुमति मिल चुकी है।

शिक्षकों से बदलेगी स्थिति
साइंस एंड टेक्नोलॉजी विभाग के निदेशक अतुल सिन्हा ने बताया कि इंजीनियरिंग कॉलेजों के नए व्याख्याताओं में 50 पीएचडी हैं। आधे ने आईआईटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की है। लेक्चरर की गुणवत्ता बढ़ने से विद्यार्थियों का रुझान राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों की ओर अधिक होगा। नए इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में 60-60 सीटों पर नामांकन होगा। इन इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल सहित चार ब्रांच में पढ़ाई होगी।

हर जिले में कॉलेज
राज्य के सभी जिलों में एक इंजीनियरिंग कॉलेज खोलने का लक्ष्य है। एक कॉलेज की स्थापना पर एक करोड़ रुपए खर्च होते हैं। सहरसा, पूर्णिया और सुपौल में पिछले सत्र से ही पढ़ाई शुरू हो चुकी है। 2018-19 सत्र में बांका, जमुई और वैशाली में कॉलेज खोला जा रहा है। वर्तमान समय में मुजफ्फरपुर, भागलपुर, मोतिहारी, दरभंगा, गया, छपरा, नालंदा, पटना, रोहतास, बेगूसराय, सीतामढ़ी, मधेपुरा, कटिहार, पूर्णिया, सुपौल व सहरसा में इंजीनियरिंग कॉलेज अवस्थित हैं।

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