--Advertisement--

भास्कर सरोकार: गया के नक्सल प्रभावित शेरघाटी प्रखंड के मोनवार के बच्चों में पढ़ाई का जुनून; न गांव में स्कूल, न नदी पर पुल- ऐसे पढ़ने जाते हैं बच्चे

60 परिवार के बच्चों को रोजाना स्कूल जाने के लिए करनी होती है जद्दोजहद

Danik Bhaskar | Sep 01, 2018, 07:36 AM IST
कब बदलेगी सूरत : गया की सिद्धपु कब बदलेगी सूरत : गया की सिद्धपु

गया. जिले के नक्सल प्रभावित शेरघाटी प्रखंड के मोनवार गांव के बच्चे सोरहर नदी पार कर दूसरी पंचायत में स्थित गांव के स्कूल में पढ़ने जाते हैं। स्कूल गांव से वैसे तो एक किलोमीटर दूर है पर बीच में पड़ने वाली नदी स्कूल जाने वाले बच्चों के रास्ते में आता है। ऐसे में कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है।
माेनवार गांव सिद्धपुर पंचायत के अंतर्गत आता है जहां लगभग 60 परिवार रहते हैं। इस गांव में कोई भी स्कूल नहीं है। यहां के बच्चों को नदी के उस पार दुबहल पंचायत के छोटका करासन गांव जाना पड़ता है जहां राजकीय मध्य विद्यालय है। वैसे तो बरसात के दिनों में कई परिवार के लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते हैं लेकिन स्कूल जाने के बाद नदी में पानी आ जाने से उनका वापस लौटना मुश्किल हो जाता है। बरसात के दिनों में इस नदी में अचानक पानी आता है। पूर्व में कई दुर्घटनाएं हो चुकी हंै। दूसरी तरफ उनकी पंचायत में जो स्कूल है वह गांव से ढाई किलोमीटर दूर है। यहां जाने के लिए बच्चों को नेशनल हाईवे से गुजरना होता है जहां दुर्घटनाओं का खतरा बना रहा है।

योजनाओं का नहीं मिलता लाभ : बरसात के दिनों में विद्यालय से अनुपस्थित रहने के कारण बच्चों की उपस्थिति 70 फीसदी नहीं हो पाती है। ऐसे में नियमों के अनुसार पुस्तकों, पोशाक और छात्रवृत्ति आदि की राशि इन बच्चों को नहीं मिल पाती है। पूर्व प्रधानाध्यापक संजय कुमार बताते हैं कि नदी के कारण गांव के अधिकांश बच्चों की पढ़ाई पूरी नहीं हो पाती है। कई माह पढ़ाई से दूर रहने के कारण ये कमजोर हो जाते हैं और कुछ वर्षों के बाद इनका नाता ही पढ़ाई से छूट जाता है।

न नेता ध्यान दे रहे न प्रशासन : मोनवार गांव के ग्रामीण कैलू, राजकुमार, बालदेव पासवान, उषा देवी आदि बताते हैं कि ग्रामीण कई वर्षों से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक पदाधिकारी से गांव में स्कूल अथवा नदी पर पुल बनाने की मांग कर रहे हैं। इनकी मांगों की सुनवाई नहीं हो रही है जिसके कारण उनके बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। अब दो ही उपाय है... या तो वे अपने बच्चों को पढ़ाई से महरुम रखें या उनकी जान जोखिम में डालकर उन्हें स्कूल भेजें।

पुल बनने से कई गांवों की परेशानी हो सकती है दूर : छोटका करासन गांव सहित अन्य गांवों के लोगों की परेशानी भी एकमात्र पुल से दूर हो सकती है। करासन गांव के ओमप्रकाश प्रसाद, अवध बिहारी प्रसाद, परमेश्वर प्रसाद कहते हैं कि यदि माेनवार और छोटका करासन के बीच पुल बन जाए तो कई गांव के लोगों की समस्या दूर होगी। इधर के लोगों को राेजमर्रा के सामानों के लिए गंगटी बाजार जाना पड़ता है जो नदी के दूसरी तरफ है। इससे लोगों को रोज परेशानी झेलनी पड़ती है।