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वो दर्द से कराहती रही, कोई नहीं आया, आखिरकार रिक्शे पर करानी पड़ी महिला की डिलीवरी

अस्पताल के स्ट्रेचर कर्मी थे गायब, रिक्शे पर डिलीवरी।

Bhaskar News | Last Modified - Apr 17, 2018, 08:04 PM IST

वो दर्द से कराहती रही, कोई नहीं आया, आखिरकार रिक्शे पर करानी पड़ी महिला की डिलीवरी

जमुई (बिहार). सदर अस्पताल में कर्मियों की लापरवाही से एक मरीज की जान खतरे में पड़ गई। सोमवार (16 अप्रैल) को कर्मचारियों और अस्पताल की अव्यवस्था की शिकार एक प्रसूता हो गई। टाउन थाना क्षेत्र के दिनेश की पत्नी प्रसव कराने के लिए मां के साथ सुबह 11.30 बजे रिक्शे से अस्पताल पहुंची। मेन गेट से लेबर रूम तक ले जाने के लिए उसे न स्ट्रेचर मिला न कोई कर्मचारी।


परिजन कभी इमरजेंसी तो कभी अस्पताल के कर्मचारियों से मरीज को लेबर रूम ले जाने की गुहार लगाते रहे। लेकिन कोई नहीं आया। आखिरकार दर्द से कराहती प्रसूता ने रिक्शे पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद प्रसूता के परिजन ने खुद स्ट्रेचर पर लिटा कर जच्चा-बच्चा को लेबर रूम तक पहुंचाया। सदर अस्पताल में इस तरह की यह पहली लापरवाही नहीं है। इससे पहले भी यहां कर्मियों की लापरवाही के कारण कभी ऑटो में तो कभी हॉस्पिटल के फर्श पर ही परिजनों द्वारा प्रसव कराया जा चुका है।

लेबर रूम ले जाने के 15 मिनट बाद पहुंची एएनएम

जब महिला का प्रसव रिक्शे पर ही हो गया तो उसके पति दिनेश ने खुद स्ट्रेचर पर सीमा को लिटाया और उसे सदर अस्पताल के लेबर रूम तक ले गया। ज्यादा ब्लीडिंग हो जाने से महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी। इसके बावजूद करीब 15 मिनट बाद एएनएम वहां पहुंची। तब जाकर महिला को एडमिट कराया गया।

सदर अस्पताल के चतुर्थवर्गीय कर्मचारी पर है यह जिम्मा

अस्पताल में तैनात चतुर्थवर्गीय कर्मचारी का यह कार्य है। उनके द्वारा मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर इमर्जेंसी या लेबर रूम तक पहुंचाना है। अगर इस तरह की लापरवाही हुई है तो अस्पताल उपाधीक्षक से इस संबंध में बात की जाएगी। इस तरह की लापरवाही बरतने वाले पर कार्रवाई होगी।
- डॉ. श्याम मोहन दास, सिविल सर्जन, जमुई

आउटसोर्सिंग के स्टाफ स्ट्रेचर से पहुंचाते हैं लेबर रूम
सदर अस्पताल में इसके लिए कोई कर्मचारी तैनात नहीं हैं। आउटसोर्सिंग का कार्य देख रहे सिंह सर्विसेज के तीन कर्मचारियों को इस कार्य के लिए नियुक्त किया गया है। लेबर रूम तक प्रसूता को पहुंचाने की उनकी जिम्मेवारी है। इसमें घोर लापरवाही बरती गई है।
- उपेंद्र चौधरी, अस्पताल मैनेजर

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