स्टेट हाईवे पर 6 माह में 15 की मौत, 50 घायल

Patna News - जिले को राज्य मुख्यालय से सीधा जोड़ने के लिए जब सीवान-शीतलपुर स्टेट हाईवे-73 की सौगात मिली तब जिले के लोगों को लगा कि...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:15 AM IST
Siwan News - 15 killed 50 wounded in 6 months on state highway
जिले को राज्य मुख्यालय से सीधा जोड़ने के लिए जब सीवान-शीतलपुर स्टेट हाईवे-73 की सौगात मिली तब जिले के लोगों को लगा कि वे अब कम दूरी व समय में पटना तक पहुंच सकेंगे। बावजूद इस चमचमाती सड़क पर हादसों में हुए मौत ने ऐसा तांडव मचाया कि लोग अब इस सड़क पर यात्रा करने से पहले कई बार सोचने लगे। स्टेट हाइवे पर पिछले छह माह में विभिन्न स्थानों पर 15 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए है। इसके कारण में नौसिखिए चालकों का बेधड़क वाहन चलाना व इसपर विभाग का कोई नियंत्रण नहीं होना है। जिले में सड़क सुरक्षा सप्ताह भी मनाया जाता है वह भी महज खानापूरी के लिए। सड़क निर्माण के बाद अब तक हादसों में सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा बैठे। मृतक अधिकांश अपने घर के कमाऊ सदस्य थे अथवा उनपर आगे चलकर परिवार चलाने की जिम्मेदारी थी। उनकी असमय हुई मौत ने परिवार को कभी भी नही भूलने वाला गम दे गया।

हादसे के बाद ड्राइवर हो जाते हंै फरार

अधिकतर सड़क हादसों में देखने को मिलता है कि दुर्घटना को अंजाम देकर वाहन चालक आराम से फरार हो जाता है। पुलिस उसका सुराग तक नहीं लगा पाती है। पूर्व जिला पार्षद रामायण सिंह, पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के प्रेस प्रवक्ता सुरेन्द्र पाण्डेय, बसंतपुर प्रखंड बीजेपी अध्यक्ष रंजीत प्रसाद आदि ने प्रशासन से इस मामले में ध्यान देने की अपील की है।

इन गांवों के पास संभलना जरूरी

जिले में स्टेट हाईवे-73 पर कई जगह डेंजर जोन के रूप में प्रसिद्धि पा चुके हैं। इनमें जीबी नगर थानाक्षेत्र का तरवारा गंडक पूल व जीन बाबा स्थान, गोरेयाकोठी का अफराद मोड़, सिसई व आज्ञा, बसंतपुर थानाक्षेत्र का लहेजी, कन्हौली, मुड़ा व कोड़र, भगवानपुर थानाक्षेत्र का मलमलिया, नत्थू मोड़, सुघरी, माघर आदि शामिल हैं।

लोगों की नजर में प्रशासन भी जिम्मेवार बच्चों के हाथों में होती है स्टियरिंग

लोगों का कहना है कि सड़क पर हो रहे हादसों के लिए पूरी तरह तो नही लेकिन प्रशासन भी कुछ हद तक जिम्मेवार है। नौसिखिए वाहन चालकों पर रोक लगाने में प्रशासन विफल है। इसके अलावा लोगों में सड़क सुरक्षा के उपायों के प्रति जागरूक करने में प्रशासन विफल है। लोगों का कहना है कि बड़े वाहनों के चालक नींद आने की स्थिति में खलासियों को ही स्टेरिंग थमा देते हैं। सूबे में शराबबंदी के बाद लोगों के अनुसार वाहन चालक गांजे व भांग के नशे में वाहन चलाते हैं। यह भी हादसों की जड़ में है। लोगों का कहना है कि प्रशासन अगर नियमित रूप से वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच कठोरता से करे तो सड़क हादसों में निश्चित रूप से कमी आएगी।

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