भास्कर खास / हथियार लौटाने पर प्रोत्साहन राशि : नक्सलियों के एके 47 की कीमत 25 हजार तो ग्रेनेड की महज 500 रुपए



25 thousand worth of AK 47 of Naxalites and only 500 rupees of grenade
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25 thousand worth of AK 47 of Naxalites and only 500 rupees of grenade

  • नक्सलियों की हैसियत और उनके हथियारों की क्षमता पर सरकार देती है प्रोत्साहन राशि

Dainik Bhaskar

Aug 13, 2019, 05:34 AM IST

नीतीश कुमार सोनी | पटना . एके 47 राइफल के 25 हजार रुपए तो हैंड ग्रेनेड के बदले महज 500 रुपए। 1 हजार रुपए किलो विस्फोटक सामग्री। … चौंकिए नहीं। सरकारी रिकॉर्ड में नक्सलियों के असलहों का यही कीमत है। दरअसल पुलिस के समक्ष सरेंडर करने वाले नक्सलियों को संगठन में उनकी हैसियत व हथियार की क्षमता के हिसाब से प्रोत्साहन राशि मिलती है। राज्य सरकार की सरेंडर पॉलिसी के तहत नक्सलियों के टॉप कमांडरों राज्य समिति के सदस्य, केंद्रीय समिति के सदस्य व पोलित ब्यूरो के सदस्य को 2.5 लाख का तात्कालिक सहायता मिलती है।

 

इसके अलावा मध्यम व निम्नस्तरीय नक्सलियों में एरिया कमांडर, रीजनल या जोनल कमांडर, उप क्षेत्रीय कमांडर आैर जांच सह पुनर्वासन समिति द्वारा घोषित अन्य हार्डकोर नक्सलियों के लिए सहायता राशि 1.5 लाख रुपए निर्धारित है। साथ ही सरेंडर करने वाले नक्सलियों की इच्छा के अनुरूप रोजगार के प्रशिक्षण देने के साथ ही अधिकतम 36 महीने यानी 3 वर्षों तक 4 हजार रुपए प्रति माह भत्ता भी मिलेगा। यह सहायता राशि सीधे उनके बैंक खाते में जमा की जाती है। उसे फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखा जाता है। सरेंडर की तारीख से तीन साल पूरा होने पर डीजीपी द्वारा अच्छे व्यवहार की अनुशंसा होने के बाद ही राशि की निकासी हो सकती है।

 

सरकार की सरेंडर पॉलिसी : पोलित ब्यूरो सदस्य को 2.5 लाख तो एरिया कमांडर को मिलते हैं 1.5 लाख

 

एक नजर : हथियारों के बदले मिलने वाली राशि 

 

  •  एलएमजी, स्नाइपर राइफल, रॉकेट लांचर 35 हजार 
  •  एके 47, 56 व 74 राइफल  25 हजार 
  •  स्टेनगन, एसएलआर, कार्बाइन 10 हजार 
  •  पिस्टल व रिवाल्वर 10 हजार  रॉकेट1 हजार 
  •  ग्रेनेड, हैंड ग्रेनेड, स्टिक ग्रेनेड 500 रुपए 
  •  वायरलेस सेट 1 से 5 हजार  सेटेलाइट फोन 10 हजार 
  •  बीएसएफ व एचएफ (वायरलेस) कम्यूनिकेशन सेट 5 हजार 
  •  रिमोट कंट्रोल उपकरण3 हजार  आईईडी1 हजार 
  •  माइंस3 हजार  इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर्स 50 रुपए

सरकार का मकसद मुख्यधारा में लाना
 

सरेंडर पॉलिसी का मकसद है कि नक्सली मुख्यधारा में आ सकें। रोजगार कर सकें। इसके लिए बाकायदा सरकार की ओर से मदद दी जाती है।’ 

-जितेंद्र कुमार, एडीजी (मुख्यालय)

 

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