त्राहिमाम / 23 जिलों की 48 नदियां सूख गईं, भोजपुर में गंगा-सोन भी सूखीं



औरंगाबाद की बटाने व सोन नदी। औरंगाबाद की बटाने व सोन नदी।
48 rivers of 23 districts of the bihar have dried up
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औरंगाबाद की बटाने व सोन नदी।औरंगाबाद की बटाने व सोन नदी।
48 rivers of 23 districts of the bihar have dried up

  • नालंदा में एक दर्जन छोटी नदियों से पानी गायब

Dainik Bhaskar

Jun 19, 2019, 07:52 AM IST

पटना. आसमानी आफत का सर्वाधिक बुरा असर राज्य की नदियों पर भी पड़ा है। कभी पानी से लबालब भरी रहने वाली नदियों का हाल बुरा है। 23 जिलों की 48 नदियां सूख गई हैं। ये नदियां अपने बहाव में अधिसंख्य स्थानों पर पूरी तरह जलहीन हो चुकी हैं। कई स्थान तो ऐसे हैं, जहां एक बूंद पानी तक नहीं है। भोजपुर के कुछ इलाकों में गंगा नदी में भी पानी नहीं दिख रहा। यही हाल सोन नदी का है। कई और नदियां भी पानी के बिना हांफ रही हैं। खासकर दक्षिण बिहार की नदियों का हाल बेहद खराब है।

 

पिछले पांच-छह वर्षों से राज्य में अनियमित बारिश के कारण जहां भूजलस्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, वहीं नदियों में भी पानी गायब है। हाल यह है कि इन नदियों के तल में भी पानी खत्म हो गया है। इसका सबसे बड़ा असर अब दिख रहा है। नदी ही पानी के लिए तरस रही हैं। यदि मानसून में औसत बारिश नहीं हुई तो इन नदियों के लिए बड़ा संकट उत्पन्न हो सकता है। ऐसे में जलहीन नदियों की संख्या और बढ़ सकती है।

 

जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 23 जिलों में 48 नदियों की स्थिति बेहद नाजुक है। इनमें से कई नदियां तो कई जिलों से बहती हैं। अधिसंख्य नदियों में तो कई-कई जिलों में पानी नहीं है। जहां हैं भी तो बेहद कम। उधर, कई नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है। यदि शीघ्र बारिश नहीं हुई तो कई और नदियां गहरे संकट में आ सकती हैं। विभाग भी मानता है कि राज्य की नदियां गहरे संकट की स्थिति में हैं। आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है।

 

सामान्य से कम हो रही बारिश
राज्य में कई वर्षों से सामान्य से काफी कम बारिश हो रही है। बिहार में औसतन सामान्य बारिश की मात्रा 1000 एमएम है, जबकि कई वर्षों से मात्र 500-800 एमएम बारिश ही हो रही है। पिछले साल भी महज 571 मिमी बारिश हुई। इससे भूजलस्तर तो तेजी से नीचे जा ही रहा है, नदियों में भी पानी की किल्लत दिखने लगी है। खासकर नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों में प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

 

ऐसे होती है जलस्तर की माप
हर नदी का जिले के संबंधित प्रखंड में एक गेजस्थल होता है। यहीं पर नदी का जलस्तर मापा जाता है। इसी के आधार पर नदियों में पानी की मात्रा का आकलन किया जाता है। विभाग की रिपोर्ट में इन नदियों के संबंधित गेज पर नदी पूरी तरह सूख चुकी है। कुछ अन्य स्थलों पर पानी है भी तो उसकी मात्रा बेहद कम है। गेजस्थल पर पानी का नहीं होना नदियों के भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।

 

सीमांचल की नदियां बेहतर स्थिति में : इस समय उत्तर बिहार के बड़े इलाके के साथ-साथ नेपाल से जुड़ी नदियों में पानी है। खासकर सीमांचल की नदियों में पानी की मात्रा ठीक-ठाक है। नेपाल में बारिश के कारण इसका जलस्तर भी बढ़ रहा है।

 

शहरीकरण व बािरश कम होना प्रमुख कारण 
राज्य में नदियों की स्थिति बेहद नाजुक है। बारिश कम होना इसका प्रमुख कारण है। बिहार में पहले 1400 एमएम तक बारिश होती थी। आज 700-800 के आस-पास हो रही है। शहरीकरण के कारण सड़कें, छतें सब पक्के होने लगे हैं। इससे ऊपर से जो पानी आता है, वह जमीन के अंदर नहीं जा पाता। नालों में चला जाता है, बेकार हो जाता है। 2007 के बाद कुछ स्थानीय इलाकों को छोड़कर बाढ़ नहीं आई। इसके कारण भी जमीन के नीचे की स्थिति बदतर हो गई है। - दिनेश मिश्रा, नदी विशेषज्ञ

 

इन जिलों में सूख रहीं नदियां
पटना: दरा (धनरुआ), कररुआ
नालंदा : पैमार, मोहाने, लोकाइन, धोबा, पंचाने, नोनाई, चिरैया, गोइठवा, सकरी, भूतही
कैमूर : दुर्गावती, कर्मनाशा, सुअरा, कुदरा
मुजफ्फरपुर : नून
समस्तीपुर : नून कठाने, वाया, बलान, नून
वैशाली : वाया  
दरभंगा : तीसभंवरा
मधुबनी : थोमाने
सारण : माही, गंडकी
कटिहार : कारी कोसी
बेगूसराय : बलान
भागलपुर : खलखलिया
औरंगाबाद : बटाने
बांका : धीर गेरुआ, चंदन
बक्सर : धर्मावती
भोजपुर : बनास, सोन
जहानाबाद : फल्गू
जमुई : अपर बदुआ, बरनार, अपर किउल
लखीसराय : किउल
मुंगेर : मुहानी
नवादा : तिलैया, सकरी
रोहतास : अवसाने, काव

औरंगाबाद : सोन, बटाने

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