--Advertisement--

बाल विधवा ने शादी के कपड़े छुए तो घरवालों ने धुलवाए, अपमान के बाद अब कर रही ये काम

पुष्पा कहती है कि यह घटना उनके जीवन को झकझोर दिया जब अपनों ने भी इस तरह का व्यवहार किया।

Dainik Bhaskar

Jan 21, 2018, 05:33 AM IST
Child widow getting awareness in society

नवादा. 32 साल पहले नवादा जिले के धनवां गांव की पुष्पा की शादी गया के फतेहपुर के धनगांव में लालनारायण सिंह के पुत्र विनोद के साथ शादी हुई थी। तब पुष्पा 13 साल की थी। छह साल बाद उसका दुरागमन हुआ। उसके 3 माह बाद ही पति की बीमारी से मौत हो गई। बचपन में पुष्पा की शादी उसके जीवन भर का दर्द बन गया है। उसके बाद से पुष्पा अकेली हो गई। पुष्पा का जीवन नारकीय हो गई।

समाज और परिवार से मिली प्रताड़ना

पुष्पा के मुताबिक, पति की मौत के तीन साल बाद ननद की शादी में ससुराल गई। शादी के कपड़े में छूने के कारण उन्हें अशुभ बताते हुए कपड़े को धुलवाया गया था। पुष्पा कहती है कि यह घटना उनके जीवन को झकझोर दिया जब अपनों ने भी इस तरह का व्यवहार किया। गांववालों को उसके पहनावे और खानपान पसंद नही था। गांव वाले सफेद कपड़े और सादा भोजन करने का दबाव बनाते थे। लिहाजा, गांव छोड़कर शहर में रहने लगी। यही नहीं, पुष्पा जब सामाजिक जीवन में सक्रिय हुई तब उन्हें पतुरिया जैसे शब्दों से अपमानित किया गया।

संघर्ष के बीच पुष्पा ने बनाई पहचान

हालांकि पुष्पा इन सब आरोपों से विचलित नही हुई। वह पढ़ाई की। फिर सामाजिक कार्यों में जुड़ गई। पुष्पा बाल विवाह का विरोध करती रही। कई विधवा और अंतरजातीय विवाह करवाई। वह मानती हैं कि पिता का सहयोग नही मिला होता तो वह अन्य महिलाओं की तरह धर के भीतर विधवा की जीवन जी रही होती। वह जब टीचर बन गई। 11 नवंबर 2011 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पुष्पा को मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्कार से सम्मानित किया।

राज्य के बेस्ट समूह का अवार्ड मिला

वह बचे समय में नाबार्ड के जरिए सौ समूह का गठन करवाई। इसमें एक समूह को राज्य का बेस्ट समूह का अवार्ड मिला। बता दें कि आज बाल विवाह व दहेज प्रथा के विरोध में मानव शृंखला बनाई जा रही है। ऐसे में इन महिलाओं का संघर्ष याद आना स्वाभाविक हो जाता है। जो अपनी संघर्ष के बल पर अपनी पहचान बनाकर रखी हैं। पुष्पा ने जो संघर्ष कर अपने को स्थापित किया व कम नहीं है।

X
Child widow getting awareness in society
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..