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इस वजह से एक्सीडेंट के अधिकतर मामलों में नहीं खुलते एयरबैग्स, बच सकते हैं ऐसे

पटना एनआईटी मैकेनिकल डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर ओम प्रकाश ने बताया कि गाड़ियों पर लगने वाले गार्ड्स खतरनाक होते हैं।

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2018, 04:23 AM IST
मंत्री की गाड़ी में लगा बंपर। मंत्री की गाड़ी में लगा बंपर।

भागलपुर. अगर अपनी कार के आगे बंपर गार्ड/बुल बार्स/ क्रैश गार्ड लगा रखे हैं...तो यह खबर आपको जरूर पढ़नी चाहिए। क्योंकि छोटे से स्क्रैच से बचने के लिए लगाया गया यह गार्ड आपके लिए बड़ा खतरा बन सकता है। केन्द्र सरकार ने 17 दिसंबर से देशभर में बुल बार्स लगाना बैन कर रखा है। इसके बाद भी शहर में गाड़ियों को छोटे-मोटे स्क्रैच से बचाने के लिए लोगों ने गार्ड लगा रखे हैं।

आम के साथ खास भी इसके शौकीन

आम शहरी ही नहीं, नेता, मंत्री और जिला प्रशासन मुखिया समेत पुलिस महकमे के मुखिया ने अपनी कारों पर ये गार्ड लगा रखे हैं। अगर हादसे हुए तो गाड़ियों केे सुरक्षा फीचर काम नहीं करेंगे। एयर बैग्स भी नहीं खुलेंगे।

3.24 करोड़ का है एसेसरीज बाजार

भागलपुर में ऑटोमोबाइल एसेसरीज का सालाना बाजार करीब 3.60 करोड़ का है। ऑटोमाबाइल दुकानों के अनुसार, हर दिन शहर की दुकानों से हर दिन 8-9 गाड़ियों में एसेसरीज लगाए जाते हैं। एक गाड़ी में औसतन 10-12 हजार रुपए तक के एसेसरीज की बिक्री होती है। ऐसे में हर माह 270 गाड़ियों में गार्ड, बम्पर व अन्य सामान लगाए जाते हैं। इन पर ग्राहकों औसतन होने वाला खर्च 10 हजार रुपए की दर से सालाना 3.24 करोड़ है।

बुल बार्स/बंपर गार्ड लगाने के 4 बड़े खतरे....

एयरबैग: दुर्घटनाओं में सेंसर्स पर असर पड़ते ही एयरबैग खुलते हैं। लेकिन गार्ड्स लगी गाड़ियों में पहले झटका गार्ड्स पर आता है। अगले हिस्से में लगे सेंसर्स को गाड़ी के टकराहट का पता नहीं चलता और सेंसर्स काम नहीं करते। नतीजा, एयरबैग्स नहीं खुल पाते।

क्रंपल जोन : कंपनी गाड़ी के बंपर और बोनट ऐसे डिजाइन करती है कि दुर्घटना में पूरा फोर्स बंपर और बोनट पर ही आता है। हादसों में गाड़ी के आगे से सिकुड़ने का कारण भी यही है। लेकिन गार्ड होने से फोर्स गाड़ी पर आता है। इससे चोटिल होने की आशंका रहती है।

- पैदल चलने वालों और टू-व्हीलर्स को बंपर गार्ड से ज्यादा खतरा है। कार का अगला हिस्सा साॅफ्ट होता है, लेकिन गार्ड इसे खतरनाक बना देते हैं।

- दुर्घटना में बुल बार्स/गार्ड होने पर झटका वाहन के चेसिस पर ज्यादा आता है। गाड़ी को भी ज्यादा नुकसान होता है। सवारों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

आखिर क्यों अधिकतर मामलों में एयरबैग्स नहीं खुलते...

ऐसे काम करते हैं सेंसर्स
एयर बैग्स सेंसर्स कंट्रोलर्स से कनेक्ट होते हैं। 60-80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार में हादसा होने पर एयरबैग्स खुल जाते हैं। यह स्पीड सेंसिटिव नहीं, इंपैक्ट सेंसिटिव होते हैं। टक्कर के बाद एयरबैग सेंसर्स 200 किमी/सैकंड की रफ्तार से खुलते हैं।

झटका सीधे गार्ड्स पर आते हैं
कारों में सीट बेल्ट लगाकर ड्राइव करने पर ही एयर बैग्स खुल सकते हैं। टक्कर के बाद झटका आने पर एयरबैग सेंसर ट्रिगर होते हैं। कार में बंपर गार्ड या बुल-बार्स लगे हों तो यह सिस्टम काम नहीं करेगा। झटका सीधे गार्ड्स पर आते हैं, सेंसर्स तक नहीं पहुंच पाते। इसलिए एयरबैग्स नहीं खुल पाते।

इंश्योरेंस क्लेम में भी खतरा : बुल बार्स होने पर एयर बैग्स के खुलने के बाद भी इंश्योरेंस क्लेम रुक सकता है। ये गार्ड्स परिवहन विभाग से स्वीकृत नहीं हैं। सरकार की रोक के बाद इसमें क्लेम लेने वालों को परेशानी हो सकती है।

भास्कर एक्सपर्ट
पटना एनआईटी मैकेनिकल डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर ओम प्रकाश ने बताया कि गाड़ियों पर लगने वाले गार्ड्स खतरनाक होते हैं। गाड़ियों में लगे सुरक्षा फीचर टक्कर या हादसों के दौरान काम करते हैं। इनके सेंसर्स एक्टिव होते हैं। गार्ड्स लगे होने से सेंसर्स ऑन नहीं होते। यह खतरनाक हो सकता है।

मेयर की गाड़ी में लगा गार्ड। मेयर की गाड़ी में लगा गार्ड।
भागलपुर एसपी की गाड़ी में लगा गार्ड। भागलपुर एसपी की गाड़ी में लगा गार्ड।
Airbags not opening Due to bull bars bumpers guards
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मंत्री की गाड़ी में लगा बंपर।मंत्री की गाड़ी में लगा बंपर।
मेयर की गाड़ी में लगा गार्ड।मेयर की गाड़ी में लगा गार्ड।
भागलपुर एसपी की गाड़ी में लगा गार्ड।भागलपुर एसपी की गाड़ी में लगा गार्ड।
Airbags not opening Due to bull bars bumpers guards
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