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डिस्कवरी देख सीखी सांप पकड़ने की कला, 8 साल में 100 से ज्यादा सांपों को बचाया

पेशे से मोबाइल व्यवसायी अजीत बताते हैं कि अपने इस जुनून के चलते झारखंड पुलिस में एसआई की नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाए।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 07:48 AM IST

बेगूसराय. आपने सांप को देखकर भागते और मारते तो लोगों को आमतौर से देखा होगा, लेकिन कोई उसे बचाने के लिए किसी भी हद तक गुजर जाए ऐसा कम ही होता है। शहर के अजीत भारद्वाज उन्हीं में से एक हैं। बचपन से ही डिस्कवरी देखने के शौकीन अजीत को जीवों से प्रेम इस कदर हो गया कि कितना भी जहरीला सांप होे या अन्य वन्य प्राणी उसे वह लोगों को मारतेे नहीं देख सकते हैं।

अजीत बताते हैं ये कहानी

अजीत बताते हैं कि एक मई-1997 में बेगूसराय से गुजर रही सर्कस की गाड़ी पलट गई थी। इसमें तेंदुआ थे। दो को तो पकड़ लिया गया लेकिन एक को वन विभाग के कर्मियों ने गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि 11 वर्ष की उम्र में चाणक्य नगर के पास तेंदुए को गोली मारने का विरोध किया था।

झारखंड पुलिस में एसआई की नौकरी नहीं कर पाए ज्वाइन


पेशे से मोबाइल व्यवसायी अजीत बताते हैं कि अपने इस जुनून के चलते झारखंड पुलिस में एसआई की नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाए। जिसकी वजह से घर परिवार के लोगों ने पागल तक कहना शुरू कर दिया। उन्होंनेे बताया कि अब तक काफी संख्या मेें सांप को बचाया है औा ऐसा करने में उन्हें मजा आता है। एक प्रश्न के जवाब में कहा कि इसके पीछे उनका उद्देश्य जीवों से प्यार और प्रकृति को संतुलन में रखना है।

पहले मां बहुत डांटती थी पर अब मुझ पर नाज करती है


अजीत बताते हैं कि शुरुआती दौर में चाणक्य नगर, डाक बंगला रोेड एवं आसपास के मोहल्ले में सांप निकलने की सूचना मिलते ही पाईप और बोरा लेकर निकलते देख उनकी मां खूब डांटती थी। लेकिन धीरे-धीरे उनके जुनून ने घर के लोेगों का दिल जीत लिया। घर के लोगों को अब उनके आत्मविश्वास पर भरोसा है। अब मां समेत घर के लोग उनपर नाज करते हैं।