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डॉक्टर बनाना चाहते थे पिता, किया कुछ अलग और ऐसे बन गए मूवी प्रोड्यूसर

4500 म्यूजिक वीडियो व 3 हजार एपिसोड बना चुके हैं, स्थापना दिवस पर दिखाई जाती हैं राजेश की डॉक्यूमेंट्री।

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 08:29 AM IST
1992 में सांस्कृतिक सूचना केंद्र के तहत फिल्म महोत्सव का किया निःशुल्क आयोजन। 1992 में सांस्कृतिक सूचना केंद्र के तहत फिल्म महोत्सव का किया निःशुल्क आयोजन।

फारबिसगंज(पटना). मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे एक साधारण व्यक्ति ने अपनी प्रतिभा के बल पर सैकड़ों युवाओं को प्रशिक्षण देकर उनके भविष्य को कामयाब बना दिया। परिस्थितियों से डटकर मुकाबला करने का माद्दा रखने वाले फिल्म निर्देशक और डॉक्यूमेंट्री निर्माता राजेश राज का बाइस्कोप, समाज का सच दिखाता है। राज ने हिम्मत से हौसलों की उड़ान भरी है। बहुत कुछ हासिल किया है उन्होंने, बहुत उम्मीदें इनकी अभी भी बाकी है। जाने माने फिल्म निर्देशक प्रकाश झा के साथ भी काम किया और अब खुद के हौसले से कदम बढ़ा रहे हैं। राजेश राज क्षेत्र के युवाओं को बॉलीवुड में जाने की प्रेरणा भी दे रहे हैं।

लाके के 14 बच्चों को एक चैनल के प्रोग्राम में बनाया था प्रतिभागी
1992 में सांस्कृतिक सूचना केंद्र के तहत एनएफडीसी के सहयोग से फिल्म महोत्सव का निःशुल्क आयोजन किया। इसमें वैसी फिल्मों का प्रदर्शन किया, जिसे लोगों के लिए देखना सुलभ नहीं था। एक चैनल के प्रोग्रामिंग हेड रहते हुए फारबिसगंज के 14 बच्चों को एक प्रोग्राम में प्रतिभागी बनाया। कई बच्चों ने सफलता हासिल की।

100 डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाईं, कई बेहद संवेदनशील व दिल को छू देने वाली थीं
राजेश ने सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं और स्वतंत्र रूप से संवेदनशील मुद्दों पर लगभग 100 डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई है। छऊ नृत्य पर इनके डॉक्यूमेंट्री आज भी झारखंड के स्थापना दिवस पर दिखाई जाती है। वहीं ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर बनाई लक्ष्य, स्माइल व भ्रूण हत्या पर आधारित कोपल बेहद संवेदनशील व दिल को छूने वाली डॉक्यूमेंट्री रही।

20 साल से बाइस्कोप में दिखा रहे सच

20 वर्षों से बाइस्कोप में समाज का सच उतारने वाले राजेश का जन्म अररिया के फारबिसगंज में 1968 में हुआ था। रंगमंच के पर्दे पर जीवन का सच साकार कर देने की कला के लिए बचपन से ही इसी दुनिया की कल्पना करने लगे। बड़े होने के साथ बाइस्कोप अपनी ओर खींचने लगी। इस लगन और समर्पण को देखते हुए इन्हें स्कूल का कल्चरल हेड बना दिया गया।

फिलहाल हिंदी फीचर फिल्म बना रहे

1996 के अंत में मुंबई का रुख किया। जहां राज कपूर फिल्म्स के बैनर तले निर्मित धारावाहिक शादी का सीजन के एपिसोड निर्देशक रहे। पारिवारिक कारणों से बिहार लौटना पड़ा। यहां पटना दूरदर्शन के लिए कई कार्यक्रमों विभिन्न विषयों पर वृत्तचित्रों का छायांकन और निर्देशन किया। फिलहाल एक हिंदी फीचर फिल्म ब्लैक एंड व्हाइट, एक प्रेम कहानी पर भी काम जारी है।