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राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में लगातार दूसरे साल नहीं दिखेगी बिहार की झांकी

इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह का खास महत्व है। ऐसा पहली बार है जब 10 देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह में मौजूद रहेंगे।

Danik Bhaskar | Jan 23, 2018, 04:49 AM IST
2016 में गांधी की चंपारण यात्रा पर आधारित थी झांकी। 2016 में गांधी की चंपारण यात्रा पर आधारित थी झांकी।

पटना. गणतंत्र दिवस पर नई दिल्ली में राजपथ पर इस बार भी बिहार की झांकी नहीं दिखेगी। बिहार ने महापर्व छठ की थीम पर झांकी भेजी थी। लगातार दूसरी बार यह मौका हाथ से निकल गया है। वर्ष 2016 में बिहार की झांकी आखिरी बार राजपथ पर दिखी थी। उस वर्ष गांधी की चंपारण यात्रा पर झांकी आधारित थी। झांकियों के चयन के लिए रक्षा मंत्रालय की तरफ से बनाई गई विशेषज्ञ कमेटी ने इस वर्ष बिहार की झांकी को रिजेक्ट कर दिया है।

2017 में बिक्रमशिला पर भेजी थी झांकी

बिहार के साथ-साथ पड़ोसी राज्य झारखंड और उत्तरप्रदेश की झांकियों को भी मौका नहीं मिल सका। वर्ष 2017 में बिहार ने प्राचीन शिक्षा संस्थान बिक्रमशिला पर झांकी भेजी थी लेकिन उसे भी मंजूर नहीं किया गया था। गणतंत्र दिवस की परेड वह मौका होता है जब देश के विभिन्न राज्य, देश-विदेश के लोगों को अपने प्रदेश की कला, संस्कृति, समृद्ध विरासत और विकास को झांकियों के माध्यम से प्रस्तुत करते हैं। इसके साथ ही केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालय भी अपने विभागों की बड़ी उपलब्धियों को झांकी के माध्यम से दिखाते हैं।

इस बार का परेड खास

इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह का खास महत्व है। ऐसा पहली बार है जब 10 देशों के राष्ट्राध्यक्ष समारोह में मौजूद रहेंगे। रक्षा मंत्रालय ने इस वर्ष 14 राज्यों समेत 25 झांकियों को परेड में शामिल होने की मंजूरी है। चयन की यह प्रक्रिया 15 अगस्त के बाद से शुरू हो जाती है जो कई दौर के बाद जनवरी के पहले सप्ताह में पूरी होती है।

लेकिन विदेश मंत्रालय की झांकी में छाया रहेगा बिहार


बिहार की झांकी को भले ही राजपथ पर मौका नहीं मिलेगा लेकिन बिहार की मौजूदगी प्रमुखता के साथ दिखेगी। विदेश मंत्रालय की दो झांकियां रहेंगी। पहली झांकी में नालंदा विश्वविद्यालय दिखेगा तो दूसरी झांकी में महाबोधि मंदिर और बोधी वृक्ष को दिखाया जाएगा। बिहार को मौका नहीं मिलने के पीछे यहीं मुख्य वजह रही है।

पांचवें राउंड में छंट गई हमारी झांकी


बिहार की झांकी चौथे राउंड तक चयन की दौड़ में बनी रही लेकिन पांचवें राउंड में बाहर हो गई। बिहार को मौका नहीं मिलने के पीछे विदेश मंत्रालय वजह बन गया है। झारखंड ने सोहराय पर्व पर झांकी भेजी थी लेकिन वह स्क्रीनिंग के चौथे राउंड में छंट गई।

मुख्य सचिव बोले-एक ही राज्य को हर साल मौका मिलना संभव नहीं

मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि हमें इसकी सूचना नहीं मिली है। पर झांकियों का रोटेशन के आधार पर चयन होता है। एक ही राज्य को हर साल मौका नहीं मिलता है।