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जीएसटी का असर : इस वर्ष अब तक 39% घट गया बिहार का कर राजस्व

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य का आंतरिक कर राजस्व संग्रह अभी तक लक्ष्य से 39 % कम हुआ है।

Danik Bhaskar | Jan 26, 2018, 04:56 AM IST

पटना. उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि राज्य का आंतरिक कर राजस्व संग्रह अभी तक लक्ष्य से 39 % कम हुआ है। लेकिन चिंता की बात जीएसटी के तहत लगातार कम होता राजस्व संग्रह है। हालांकि उन्होंने कहा कि अधिकतर राजस्व फरवरी और मार्च में ही आता है। गुरुवार को उपमुख्यमंत्री सचिवालय स्थित सभाकक्ष में उद्योग-व्यवसाय के प्रतिनिधियों के साथ प्री-बजट पूर्व बैठक में बोल रहे थे।

बैठक में संगठनों ने उद्योग विकास निधि बनाने, उद्योगों के लिए जमीन देने, पटना और गया में एयर कार्गो, जमीन के न्यूनतम निबंधन मूल्य को व्यवहारिक बनाने, वाहनों के फिटनेस दंड को कम करने और सर्राफा कारोबार को हस्तशिल्प की श्रेणी में लाकर जीएसटी से बाहर करने के सुझाव दिए।

चालू वित्तीय वर्ष में 32 हजार करोड़ कर संग्रह का है लक्ष्य
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तौर पर राज्य को चालू वित्तीय वर्ष में 65326 करोड़ रुपए मिलेगा जबकि विभिन्न योजनाओं में ग्रांट के तौर पर 36956 करोड़ रुपए। अपने स्रोतों से राज्य को 32 हजार करोड़ के कर राजस्व की प्राप्ति का अनुमान है। लेकिन राजस्व संग्रह लक्ष्य से 39 % कम हुआ है। इसका प्रमुख कारण वाणिज्य कर करीब 25 हजार करोड़ कम मिलना है।

योजनाओं को पूरा करने पर पड़ सकता है विपरीत असर
वित्तीय वर्ष 2016-17 में राज्य का कर राजस्व संग्रह का लक्ष्य 23742 करोड़ था। कर संग्रह कम होने से विकास संबंधी योजनाएं प्रभावित होती है। इसके लिए कर संग्रह की प्रक्रिया को और तेज करना होगा। वहीं कर राजस्व के नए क्षेत्र खोजने होंगे। जहां तक जीएसटी के तहत राज्य के राजस्व हिस्सेदारी की बात है तो 2015-16 के आधार पर बिहार को 14 % वृद्धि की गारंटी केंद्र ने दी है।