पटना

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ये महिला बनीं ऑर्गेनिक प्रोडक्शन के लिए रोल मॉडल, हर महीने कमाती हैं 45 हजार

लगभग 45 साल की साको देवी गया के टनकुप्पा ब्लॉक के बरसोना गांव की महिला किसान हैं।

Danik Bhaskar

Jan 01, 2018, 04:25 AM IST
साको देवी। साको देवी।

बोधगया (बिहार). गया के बरसोना गांव की साको देवी ऑर्गेनिक प्रोडक्शन कर यूथ्स और बिजनेसमैन के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं। कभी उसके खेत बंजर हो चुके थे। पति भी खेती छोड़कर कमाने कोलकाता चला गया था, लेकिन एक संस्था ने श्रीविधि से ऑर्गेनिक खेती की ट्रेनिंग देकर उसे रोल मॉडल के रूप में तैयार किया। साको अब महीने में एक बार गांव से बाहर या फिर दूसरे राज्यों में ट्रेनिंग देने जाती हैं। उन्हें ट्रेनिंग के लिए एक दिन के 1500 रुपए मिलते हैं यानी कि महीने के 45 हजार रुपए।

संस्था से तकनीकी जानकारी पाने के बाद साको देवी ने अन्य महिलाओं के साथ समूह बनाया और फिर श्रीविधि अपनाकर खेती को फिर से आय का जरिया बनाया। उन्हें इस मुहिम में कई अन्य महिलाओं का भी साथ मिला। साको देवी के इस अभियान में माधुरी देवी और रीना देवी भी उनमें से एक हैं। इन्हें भी ट्रेनिंग के लिए बाहर भेजा जाता है। ऑर्गेनिक खेती देखने कई राज्यों के किसान और कृषि विशेषज्ञ भी साको देवी के गांव बरसोना पहुंचते हैं। बता दें कि खेती में लाभ देखते हुए साको देवी ने दो एकड़ जमीन लीज पर लिया है।

नीति आयोग से साझा कर चुकी है अनुभव

हैदराबाद में 22 दिसंबर 2015 को नीति आयोग के सेमिनार में गया के अनिल कुमार वर्मा के साथ उन्होंने भी अपने अनुभव साझा किए। द क्लाइमेट रीसायलेंस, इनोवेटिव एंड सस्टेनेबल एग्रो-इकोलोजी प्रैक्टिस बीइंग प्रोमोटेड इन बिहार विषय पर सेमिनार में नीति आयोग के मेंबर डॉ. वीके सारस्वत, आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव टी विजय कुमार के अलावा कई कृषि वैज्ञानिक भी मौजूद थे। इसके अलावा 15 दिसंबर, 2015 को गोट्टीनजेन विवि, जर्मनी के ग्लोबल फूड के सोशल साइंटिस्ट डिर्क लैंड्समैन बरसोना गांव पहुंचे व महिलाओं द्वारा श्रीविधि से की जा रही खेती को देखा था।

कौन हैं साको देवी


लगभग 45 साल की साको देवी गया के टनकुप्पा ब्लॉक के बरसोना गांव की महिला किसान हैं। पति राजेंद्र प्रजापति खेती में घाटा देख काम करने अपने एक बेटे के साथ कोलकाता चले गए थे। 2012 में साको देवी श्रीविधि से जुड़ी और अपने 15 कट्ठा जमीन पर खेती शुरू की।

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