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यहां आतंकियों की थी सीरियल ब्लास्ट की तैयारी, बरामद बम को ऐसे किया डिफ्यूज

बिहार में हुए अब तक के आतंकी हमलों में अब तक इतना शक्तिशाली बम नहीं मिला था।

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 03:26 AM IST
बमों को निरंजना नदी में बालू के अंदर दबाकर ब्लास्ट कराया गया। बमों को निरंजना नदी में बालू के अंदर दबाकर ब्लास्ट कराया गया।

गया (बिहार). महाबोधि मंदिर के समीप से शुक्रवार की रात जब्त शक्तिशाली बम को रविवार को डिफ्यूज कर दिया गया। इसके धमाके की गूंज बोधगया के करीब चार से पांच किलोमीटर के दायरे में सुनाई दी। बमों को यहां के निरंजना नदी में बालू के अंदर दबाकर ब्लास्ट कराया गया। बालू के कण करीब 700 मीटर के दायरे तक उड़े। एनआईए-एनएसजी की मौजूदगी में सीआरपीएफ, कोबरा, एसएसबी के बम निरोधक दस्ते ने बम को डिफ्यूज किया गया।

आईएम नहीं, दूसरे आतंकी संगठन पर शक

- अब यह भी पुष्टि हो गई है कि कालचक्र मैदान के पास 19 जनवरी की रात को हुआ पहला विस्फोट लाइट बम का था।

- इधर, एक अधिकारी ने बताया कि बिहार में अब तक हुए आतंकी हमले में इस तरह के विस्फोट का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

- इसलिए आईएमए के अलावा अन्य आतंकी संगठन पर शक है। डिफ्यूज हुए बम टाइमर थे।

- नदी में दो बमों के विस्फोट कराने के बाद एनआईए ने इसका सैंपल लिया। 2013 के विस्फोट से इसका मिलान किया जाएगा।

- बम डिफ्यूज के लिए करीब साढ़े चार घंटे तक ऑपरेशन चला। इस दौरान करीब एक किलोमीटर के दायरे को ब्लाक रखा गया। बम को रविवार की शाम 6ः05 में विस्फोट करवाया गया।

बोधगया में थी सीरियल ब्लास्ट की पूरी तैयारी

- बोधगया में सीरियल ब्लास्ट की आतंकी योजना थी। आतंकियों ने इसके लिए टाइमर बम लगाए थे। तीनों टाइमर बम काफी शक्तिशाली थे। सभी की टाइमिंग फिक्स थी।

- योजना के अनुसार तीन महत्वपूर्ण स्थानों को आतंकियों ने बम प्लांट करने को चुना था। महाबोधि मंदिर के गेट नंबर नंबर चार के पास एक टाइमर रखा गया था।

- यहां पर तो आतंकियों की यह भी कोशिश थी कि बम को मंदिर के अंदर फेंका जाए। दूसरा बम दलाईलामा के आवासन स्थान महाबोधि सोसायटी के समीप रखा गया था। वहीं तीसरा टाइमर बम कालचक्र मैदान के दक्षिणी द्वार पर रखी गई थी।

कालचक्र मैदान के पास चार लेयर का था बम, एक लेयर में हुआ था विस्फोट

- 19 जनवरी की शाम आतंकियों द्वारा कालचक्र मैदान के समीप बम रखने की हड़बड़ी में यह ब्लास्ट हुआ।

- तीनों टाइमर बम में से एक रहा यह बम चार लेयर का था, जिसमें एक लेयर का विस्फोट आतंकी की हड़बड़ी के कारण रखने के क्रम में हो गया।

- इस टाइमर बम को निश्चित समय पर आतंकियों द्वारा विस्फोट किया जाना था। किंतु इसे प्लांट करने की हड़बड़ी में यह ब्लास्ट कर गया।

- कालचक्र मैदान के समीप से तार समेत कई सामग्रियां बरामद की गई हैं। बरामद पावर जेल 90 का उपयोग पत्थरों को तोड़ने के लिए किया जाता है।

चाइना पर शक, एनएसजी-एनआईए कर रहे जांच

- दहलाने की साजिश को लेकर कई आतंकी की ओर शक की सूई है। चीन, पाकिस्तान के अलावे रोहिंग्या आतंकी गुट पर आशंका जताया जा रहा।

- वैसे बम के चाइना निर्मित होने की बात बताई जा रही है, जिससे चीन पर सीधा शक जा रहा। चीन समर्थित सुगडेन आतंकी संगठन से खतरा था।

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बिहार में हुए आतंकी हमलों में नहीं मिला था इतना शक्तिशाली बम

- बिहार में हुए अब तक के आतंकी हमलों में अब तक इतना शक्तिशाली बम नहीं मिला था। एटीएस के एक अधिकारी की मानें तो आतंकियों द्वारा प्लांट किया गया बम अब तक बिहार में नहीं मिला है।

- गांधी मैदान पटना में हुए आतंकी ब्लास्ट में भी इतना हाई सिक्युएंसी का बम नहीं था। बोधगया में 2013 में हुए बम धमाके में भी मारक क्षमता कम थी।

महाबोधि मंदिर के पास से बरामद दो बमों को डिफ्यूज करती एनआईए की टीम। महाबोधि मंदिर के पास से बरामद दो बमों को डिफ्यूज करती एनआईए की टीम।
ब्लास्ट के दौरान मौजूद अधिकारी। ब्लास्ट के दौरान मौजूद अधिकारी।
एनआईए के अधिकारी बम के सेंपल की जांच करते हुए एनआईए के अधिकारी बम के सेंपल की जांच करते हुए
एनएसजी के जवान भी पहुंचे बोधगया। एनएसजी के जवान भी पहुंचे बोधगया।
एंटी लैंड माइंस वैन के साथ सुरक्षा में तैनात जवान। एंटी लैंड माइंस वैन के साथ सुरक्षा में तैनात जवान।