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श्रीलंका से नालंदा लाया जाएगा भगवान बुद्ध का अस्थि कलश, कई जगहों के थे प्रस्ताव

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा के माध्यम से अस्थि कलश लाया जायेगा। श्रीलंका सरकार से पत्राचार किया जा रहा है।

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 07:15 AM IST
महाविहार के कुलपति सह संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव। महाविहार के कुलपति सह संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव।

सिलाव (गया). भगवान बुद्ध का अस्थि कलश अगले वर्ष श्रीलंका से नालंदा लाया जाएगा। यह जानकारी नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलपति सह संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रणव खुल्लर ने शनिवार को दी। उन्होंने बताया कि संस्कृति मंत्रालय द्वारा इससे संबंधित तैयारियां पूरी की जा रही है। तिब्बती बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा के माध्यम से अस्थि कलश लाया जायेगा। जिसके लिए श्रीलंका सरकार से पत्राचार किया जा रहा है।

प्रस्ताव थे कई जगहों के, लेकिन अंतत: नालंदा का हुआ चयन

उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध के अस्थि कलश को देश के कई जगहों पर रखने से संबंधित प्रस्ताव आये थे। इनमें नेशनल म्यूजियम नई दिल्ली, बोधगया, पटना के खुदा बख्श लाइब्रेरी, पटना म्यूजियम और नालंदा के ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल जैसे स्थान थे। लेकिन संस्कृति मंत्री सह नव नालंदा महाविहार डीम्ड विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डाॅ. महेश शर्मा ने नालंदा में ही अस्थि कलश को रखना उचित समझा। उनके निर्देश पर अब इसे ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल में रखा जायेगा। श्री खुल्लर ने कहा कि नालंदा एक सांस्कृतिक धरोहर स्थल है। इसकी अलग पहचान और महत्व है। यहां भगवान बुद्ध का अस्थि कलश आने के बाद एक और आयाम जुटेगा। अस्थि कलश आने के बाद नालंदा की तस्वीर और बदलेगी ऐसा विश्वास है।

नेशनल म्यूजियम में पहले से मौजूद है अस्थि कलश

खुल्लर ने बताया कि नेशनल म्यूजियम नई दिल्ली में भगवान बुद्ध का वास्तविक अस्थि कलश पहले से मौजूद है। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु के प्री प्रवाह में 1898 ई में पुरातत्वविद् कोल्ड पेपे ने कई स्थानों पर उत्खनन कराया था। उसमें भगवान बुद्ध के अस्थि कलश के अवशेष मिले थे। उन्होंने बताया कि पुरातत्वविद केके श्रीवास्तव ने दूसरी बार प्री प्रवाह में उत्खनन कराया। उसमें भगवान बुद्ध की हड्डियों के अंश मिले थे। श्रीलंका की प्राचीन राजधानी अनुरागपुर में भगवान बुद्ध के दांत हैं।

महाविहार में जल्द होगी 18 एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति,आए हैं 260 आवेदन

खुल्लर ने बताया कि जनवरी तक महाविहार में 18 एसोसिएट प्रोफेसरों की नियुक्ति कर ली जायेगी। कुल 260 आवेदन आये हैं, जिनकी स्क्रूटनी की जा रही है। दिसंबर तक अंत तक यूजीसी की टीम महाविहार का निरीक्षण करेगी। उन्होंने बताया कि उनका प्रयास महाविहार को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने का है। महाविहार में शीघ्र ही अस्थायी कुलपति की नियुक्ति होगी, जिसके लिए वैकेंसी निकाली जा चुकी है। मार्च तक स्थायी कुलपति की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा कि हुसैन सागर झील की तरह नालंदा के इंद्र सरोवर झील का विकास किया जायेगा। झील के बीचो बीच भगवान बुद्ध की विशाल और आकर्षक प्रतिमा लगाई जाएगी। बोटिंग की व्यवस्था होगी। उन्होंने कहा कि चीनी विद्वान ह्वेनसांग का अस्थि कलश पटना म्यूजियम में रखा हुआ है। उसे नालंदा लाने के लिए महाविहार और संस्कृति मंत्रालय संयुक्त प्रयास करेगी।

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महाविहार के कुलपति सह संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव।महाविहार के कुलपति सह संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव।
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