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5 सेकेंड में ऐसे गिराया गया अंग्रेजों के जमाने का पुल, लगा 300 किलो बारूद

पुल टूटने के बाद स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और उक्त दफ्तरों तक जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 04, 2017, 05:56 AM IST

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    कहलगांव (भागलपुर).रेल डबल लाइन को लेकर अंग्रेजों के जमाने में 1861 बना कहलगांव नगर के बीच आरओबी-127 को धनबाद आई 5 सदस्यीय टीम ने 5 सेकेंड में उड़ा दिया। इसे उड़ाने के लिए टीम ने पुल में 408 छेद कर 300 किलो बारूद भरा था। घनी आबादी में पुल को ब्लास्ट करने में बड़ी ही सावधानी बरती गई। तीन चरणों में पुल को बारूद से उड़ाया गया। पुल के उड़ते ही उसके गुबार से आसपास का इलाका कुछ देर के लिए अंधकार मय हो गया। चारों तरफ पुल के मेटेरियल गुबार में बिखर गए।

    30 मजदूरों से उठवाया मलबा

    पुल के मलवे को उठाने के लिए 30 मजदूरों को लगाया गया थ। पुल से 300 मीटर की दूरी के अंदर लोगों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। सुबह आठ बजे से एनएच पर आवागमन को रोक दिया गया था और नगर बिजली काट दी गई थी। इस दौरान ट्रेनों का परिचालन भी रोक दिया गया था। तीन पोपलीन और तीन हाइवा लगाकर मलवे को हटाया गया। शाम 5 बजे तक इस काम को पूरा कर लिया गया। 5 बजे लाइट इंजन को पार कराकर परिचालन भी बहाल कर दिया गया। पुल उड़ाने की कार्रवाई के दौरान स्थानीय प्रशासन, पुलिस और रेल पुलिस सुरक्षा के प्वाइंटों पर तैनात रहे।

    विकल्प में मिला रास्ता 4 किलोमीटर दूर, शार्टकट से बढ़ेगा खतरा

    आरओबी ध्वस्त होने से पुल हो होकर अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा रास्ता अब बंद हो गया। इसके विकल्प में जो रास्ता दिया गया गया है वह 4 किलोमीटर दूर है। इससे हर रोज पैदल आने जाने वाले अब शार्टकट रास्ता अख्तियार करेंगे, जो खतरनाक होगा। इस पर स्थानीय प्रशासन और रेलवे को खास नजर रखनी होगी। क्योंकि फिलहाल शार्टकट रास्ता रेलवे लाइन है, इसे क्रास कर लोग जल्दी आने-जाने में प्रयोग करेंगे। कारण पैदल चलने वालों की दिक्कतें अब बढ़ गईं। आरओबी के दूसरी साइड एनटीपीसी, ब्लॉक, एसडीओ, बीडीओ, डीएसपी, अनुमंडल अस्पताल, निबंधन कार्यालय, एनटीपीसी सहित करीब एक दर्जन से ज्यादा सरकारी और गैर सरकारी स्कूल व कॉलेज हैं।

    आम लोगों को पैदल आने-जाने के लिए एक मात्र रास्ता आरओबी होकर ही था, जो अब नहीं रहा। इसके टूट जाने के बाद अब नजदीकी रास्ता नहीं बचा। पुल टूटने के बाद स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और उक्त दफ्तरों तक जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। जो वाहन से आने-जाने वालों के लिए तो ठीक है, पर पैदल आने-जाने वालों के लिए कठिन है। पैदल वाले को करीब 4 किलोमीटर अनादीपुर पुल पार कर या फिर बस स्टैंड के पहले अंडरपास पुल होकर जाने में करीब दो किलोमीटर चलना पड़ेगा।

    घनी आबादी के बीच पुल को तोड़ना सेंसेटिव था : विशेषज्ञ
    पुल उड़ाने के विशेषज्ञ टीम लीडर डॉक्टर सी सोमालिया ने बताया कि यह पुल काफी सेंसेटिव था। टीम लोगों की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित थी। पर कोई नुकसान नहीं हुआ। टीम ने सफलता पूर्वक पुल को ध्वस्त करने में कामयाब हो गई। रविवार की सुबह 8 बजे बारूद से भरे 408 छेदें के कनेक्शन कर दिए गए थे। 9 बजे से ब्लॉक लेने के बाद 10:40 पर आरओबी-127 को ध्वस्त कर दिया गया। बताया की पौने दो मीटर के 72 छेद, एक मीटर दो सेमी के 180, 5 प्वांइट के 162 छेद हैवी किए गए थे।

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