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यहां कारतूस खरीद का कोई हिसाब नहीं, अपराधियों-नक्सलियों को हो रहा सप्लाई

एक साल में एक लाइसेंस धारी काे 200 कारतूस तक ही दिया जाता है।

आनन्द सिंह कौशिक | Last Modified - Dec 30, 2017, 03:31 AM IST

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    मुंगेर.मुंगेर में हथियार के लाइसेंसधारी काे कारतूस खरीदने के लिए हिसाब नहीं देना पड़ता है। जिस कारण जिले के कई लाइसेंसधारी अपने लाइसेंस पर कारतूस का उठाव करते हैं और अधिक पैसे लेकर कारतूस काे अपराधियों या नक्सलियों के हाथों में बेच रहे हैं। एक साल में एक लाइसेंस धारी काे 200 कारतूस तक ही दिया जाता है। जिले में रिवाल्वर, पिस्टल, बंदूक आैर रायफल के 1766 लाइसेंसी धारी हैं। जबकि 1319 आवेदन लाइसेंस के लिए अभी पेंडिंग है।


    शहर में शस्त्र बिक्री के लिए 35 लाइसेंसधारी दुकान हैं। जहां से लाइसेंसधारी काे लाइसेंस पर अंकित कारतूसों की संख्या के आधार पर ही 140 रुपया प्रति के दर से कारतूस की बिक्री की जाती है। कारतूस का वाजिब मूल्य 95 रुपया ही है। अगर किसी लाइसेंस धारी द्वारा इसका विरोध किया जाता है तो दुकानदार कारतूस देने से ही इंकार कर देते हैं। इस संबंध में एक लाइसेंसधारी दुकानदार ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि कारतूस खरीदने के 6-7 माह पहले ही उनलोगों को फैक्ट्री में ड्राफ्ट भेजना पड़ता है। तब जाकर कारतूस मिलता है। मुंगेर में सरकारी तौर पर 39 बंदूक फैक्ट्रियां हैं।

    400-500 प्रति कारतूस की दर


    नाम नहीं छापने की शर्त पर जिले के एक लाइसेंस धारी ने बताया कि पहले हम लाेग ठेकेदारी करते थे। उस वक्त हथियार की जरूरत होती थी, लेकिन अब ताे ठेकेदारी है नहीं, इसलिए कारतूस का जरूरत भी नहीं पड़ता है। इसी कारण कारतूस का उठाव कर 450-500 रुपए में प्रति कारतूस बिक्री कर देते हैं।


    फायदा उठाते हैं अपराधी


    कारतूस खरीद के लिए लाइसेंसधारी को लाइसेंस की छाया प्रति देकर ही कारतूस लेना होता है। दुकानदार भी कारतूस बिक्री रजिस्टर पर संबंधित खरीदार का हस्ताक्षर लेते हैं। तभी कारतूस निर्गत करेंगे। लेकिन ज्यादातर दुकानदार भी प्रक्रिया का पालन नहीं करते है और बिना लाइसेंस के ही कारतूस बेच देते हैं। फायदा उठाकर अपराधी भी कारतूस की खरीद करते हैं।

    शस्त्र धारकों को 50 कारतूस रखने की है सीमा


    शस्त्र लाइसेंस धारकों के लिए एक साल में 200 कारतूस खरीदने और 50 कारतूस रखने की सीमा तय है। जिन व्यक्तियों को गंभीर खतरों के आधार पर शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत है उन्हें 50 अतिरिक्त कारतूस रखने की छूट है।

    तीन साल में हाेता है हथियार का सत्यापन


    मुंगेर जिला और आसपास के क्षेत्रों के लाइसेंस धारी काे तीन वर्ष में हथियार का सत्यापन कराना होता है। लेकिन कारतूस का न ताे सत्यापन हाेता है आैर न ही जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन द्वारा उसके खर्च का हिसाब लिया जाता है।

    लोगाें ने कहा, नियम में हाेना चाहिए बदलाव


    लाइसेंसधारी इंदरूख निवासी प्रशांत कुमार, श्याम किशोर सिंह, राम जन्म सिंह, वासुदेवपुर निवासी आरएन सिंह आदि कहते हैं कि सरकार को कारतूस का हिसाब लेना ही चाहिए। कुछ लोग लाइसेंस का गलत उपयोग करते हैं। इसी कारण नियम में बदलाव करने की जरूरत है।

    मुंगेर की पुलिस के पास कारतूस का रिकॉर्ड नहीं


    पुलिस के पास इसका रिकॉर्ड नहीं है कि जिले में स्वीकृत हजारों लाइसेंस धारकों के पास कितने कारतूस हैं। इनके खिलाफ जांच-पड़ताल नहीं की जाती है। अधिकारियों की अगर मानें तो जिले में 1766 शस्त्र धारक हैं, जिनके पास लाखों कारतूस हैं।

    दुकानदार बताते हैं कि कितना कारतूस किसने लिया


    मुंगेर के डीएम उदय कुमार सिंह ने बताया कि शस्त्र लाइसेंस धारकों से गोली का हिसाब नहीं लिया जाता है। दुकानदार ही बताते हैं कि उनके द्वारा किस लाइसेंस धारी को गोली की बिक्री की गई है। जब दुकानदार गोली की खरीद को जाते हैं तो जिला प्रशासन द्वारा एनओसी निर्गत किया जाता है।

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