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समान काम-समान वेतन का मामला : SC ने कहा- नियोजित शिक्षकों को कम वेतन देना गलत

नियोजित शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों की तरह वेतन नहीं दिया जा सकता क्योंकि ये पंचायत राज निकायों के कर्मी हैं।

Danik Bhaskar | Jan 30, 2018, 04:10 AM IST

नई दिल्ली/पटना. सुप्रीम कोर्ट ने सूबे के 3.55 लाख नियोजित शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन देने के मसले पर कहा कि आज नहीं तो कल, यह काम करना ही होगा। एक ही काम के लिए दो तरह का वेतन या वेतन की असमानता ठीक नहीं है। 31 अक्टूबर 2017 को पटना हाईकोर्ट ने कमोबेश यही आदेश दिया था। इसके खिलाफ बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-बिहार के चीफ सेक्रेट्री की अध्यक्षता में कमेटी बने। यह नियोजित शिक्षकों की योग्यता को जांचे, हमें रिपोर्ट दे। कमेटी बताए कि इन शिक्षकों को समान वेतन देने पर कितना खर्च आएगा? कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी इस बारे में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 15 मार्च को होगी। सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के वकीलों ने समान वेतन का विरोध किया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और उदय उमेश ललित की खंडपीठ ने कहा कि वेतन, आज नहीं तो कल बराबर तो करना ही होगा। ये शिक्षक राज्य में कुल शिक्षकों का 60 फीसदी हैं। वेतन की असमानता उचित नहीं है। उन्हें बराबरी पर लाना ही होगा। पहले कम वेतन पर भर्ती कर लो और फिर उन्हें निकालने की बात करो। यह नहीं होगा। इन्हें वेतन देना ही होगा।

सरकारी वकील की दलील

नियोजित शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों की तरह वेतन नहीं दिया जा सकता क्योंकि ये पंचायत राज निकायों के कर्मी हैं। राज्य सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। राज्य सरकार की वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं कि वह इनको समान वेतन देकर खजाने पर 52 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ झेले। इसमें एरियर के रुपए भी शामिल हैं। वैसे, इस मद में हर साल 28 हजार करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च होंगे।

शिक्षकों के वकीलों का जवाब

गलत बात। सालाना सिर्फ 9800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इन शिक्षकों की सेवा शर्त, वेतन-भत्ता, सबकुछ सरकार तय करती है। ये सरकारी शिक्षकों के बराबर काम करते हैं। एक ही स्कूल में एक ही काम के लिए दो तरह का वेतन, असंवैधानिक है। राज्य सरकार ने इन शिक्षकों की योग्यता पर सवाल उठाया। वकील बोले-इनकी योग्यता, सरकारी शिक्षकों की तरह नहीं है। कोर्ट ने कहा-अभी तक ये ठीक थे। जब समान वेतन मांगने लगे, तो इनकी योग्यता पर सवाल उठाना गलत है।

कोर्ट ने कहा-इस मसले से जुड़ी तमाम जानकारियों को हमें 15 मार्च को उपलब्ध कराया जाए। इन शिक्षकों की योग्यता और इनके समान वेतन पर होने वाले खर्च को बताया जाए। इस दिन फिर सुनवाई होगी। सरकार के वकीलों से कहा-इनके एरियर को छोड़िए। आज से समान वेतन दीजिए। वकील तैयार नहीं हुए। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई।

हाईकोर्ट ने कहा था-जब काम पुराने शिक्षकों के समान तो वेतन में अंतर क्यों

पटना हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि जब स्कूल एक है, योग्यता एक है, तो वेतन में असमानता क्यों? राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र को भी पार्टी बनाया है। बिहार सरकार की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह, गोपाल सुब्रह्मण्यम, मुकुल रोहतगी ने कहा कि इन शिक्षकों का काम एक जैसा नहीं है। शिक्षक संघों के वकीलों (विजय हंसरिया, आर.वेंकटरमण आदि) ने सरकारी वकीलों के सभी दलीलों को खारिज किया।

केंद्रीय मंत्री बोले- समान वेतन देना चाहिए

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बिहार सरकार को नियोजित शिक्षकों को समान काम के लिए समान वेतन देना चाहिए। इस मामले में बिहार के नौकरशाह, राजनीतिक कार्यपालिका को बरगला रहे हैं। फिजूल में अफसरों ने इसे नियोजित शिक्षकों के खिलाफ बड़ा मुद्दा बना दिया है। समान काम के लिए समान वेतन नहीं देने से सरकार की ही बदनामी होगी।