--Advertisement--

इंटर टॉपर घोटाला : बिहार को बदनाम करने वाले नकल माफियाओं पर आज तय होंगे आरोप

मीडिया ने उससे सब्जेक्ट के बारे में पूछा तो उसने पॉलिटिकल साइंस के बदले प्रोडिकल साइंस बताया।

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 06:20 AM IST

पटना. 2016 में इंटर की परीक्षा में हुए टॉपर घोटाले में बुधवार को बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष लालकेश्वर प्रसाद सिंह, उनकी पत्नी उषा सिन्हा, घोटाले के मास्टरमाइंड बच्चा राय, बोर्ड के दो पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा व श्रीनिवास चंद्र तिवारी समेत 31 आरोपितों पर आरोप तय होगा। निगरानी की विशेष अदालत पुलिस द्वारा कोर्ट में जमा किए गए साक्ष्य, एफआईआर, पुलिस की केस डायरी और चार्जशीट के आधार पर इन आरोपितों से पूछेगी कि आरोप जो लगाए गए और जो साक्ष्य पुलिस ने दिया है इसकी हकीकत क्या है। इस मौके पर आरोपितों के वकील भी मौजूद रहेंगे।

आरोप तय होने के वक्त 31 आरोपी कोर्ट में सशरीर मौजूद रहेंगे और अदालत बारी-बारी से उनसे पूछताछ करेगी। आरोप तय होने के बाद इन लोगों के खिलाफ कोर्ट में ट्रायल शुरू हो जाएगा। इन 31 आरोपितों पर केस दर्ज होने के 88 दिन बाद 5 सितंबर 2016 को कोर्ट में चार्जशीट की गई थी। इंटर टॉपर घोटाले में कुल 41 आरोपित हैं। शेष 9 आरोपितों पर आरोप तय बाद में हाेगा। 41 आरोपितों में 22 लोक सेवक, रूबी राय समेत 4 फर्जी टॉपर तथा अन्य 15 आरोपितों में बच्चा राय, उसकी बेटी शालिनी राय, उसके पिता बिशुनदेव राय के अलावा बच्चा राय के ट्रस्ट के सदस्य तथा लालकेश्वर के दामाद विवेक हैं। यह केस निगरानी के विशेष न्यायाधीश मधुकर कुमार की अदालत में है।

41 में 35 की हो चुकी है जमानत

एसआईटी ने साक्ष्य व अन्य जांच बिंदुआें पर कुल 41 को आरोपित बनाया था। एक-दो को छोड़कर करीब-करीब सबकी गिरफ्तारी हुई। इनमें लालकेश्वर, बच्चा राय, पूर्व सचिव हरिहरनाथ झा, राजेंद्र बालक उच्च विद्यालय के प्राचार्य बिशेश्वर प्रसाद समेत छह बेउर जेल में हैं।

प्रोडिकल साइंस से हुआ खुलासा

बच्चा राय के कॉलेज की छात्रा रूबी राय 2016 में इंटर आर्ट्स की टॉपर हुई। मीडिया ने उससे सब्जेक्ट के बारे में पूछा तो उसने पॉलिटिकल साइंस के बदले प्रोडिकल साइंस बताया। उसके बाद मामले ने जोर पकड़ लिया। बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप पर 6 जून, 2016 की आधी रात को माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजीव प्रसाद सिंह रंजन की शिकायत पर जालसाजी, आपराधिक षड‌्यंत्र रचने आदि की धाराओं के तहत कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।

2 साल में इस तरह आगे बढ़ी जांच

एएसपी राकेश कुमार के नेतृत्व में एसआईटी बनी। फिर छापेमारी होने लगी। बच्चा राय के कॉलेज से कई कागजात मिले। लालकेश्वर व उनकी पत्नी समेत अन्य का नाम आया तो वे अंडरग्राउंड हो गए। बाद में बच्चा राय, लालकेश्वर प्रसाद सिंह समेत अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।

जानिए, नकल और मनचाहे नंबर की साजिश रचने वाले मास्टरमाइंड व उनके साथियों को

1. बच्चा राय

- बिशुनदेव राय कॉलेज समेत कई संस्थानों का संचालक है बच्चा राय। आरोप है कि पैसे लेकर छात्रों की स्कॉलरों से डुप्लीकेट कॉपी पर दिलवा दिया था मनचाहा नंबर।

- बच्चा राय की साजिश अपनी बेटी को टॉपर बनवाने की थी। उसी साजिश के तहत उसने रूबी राय को टॉपर बनवाया। मामला पहले खुलने से इस इरादे में कामयाब नहीं हुआ।

2. लालकेश्वर प्रसाद सिंह

बिहार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष। बच्चा राय के स्कूल का सेंटर बदल दिया। टॉपरों की कॉपी निकलवाने के लिए तमाम रास्ते उपलब्ध कराए।

3. उषा सिन्हा

पूर्व विधायक। गंगा देवी महिला कॉलेज की पूर्व प्राचार्य ने पति लालकेश्वर के काम में सहयोग दिया। घोटाले के दस्तावेज दफ्तर से मिले।

4. श्रीनिवास चंद्र तिवारी

बिहार बोर्ड के पूर्व सचिव। 2015 में बोर्ड की कमेटी के कहने पर भी बच्चा राय के कॉलेज में ज्यादा नामांकन की जांच नहीं करवाई।

5. हरिहरनाथ झा

बिहार बोर्ड के पूर्व सचिव। श्रीनिवास चंद्र तिवारी पर जो आरोप है, वही आरोप इन पर भी हैं। बच्चा राय के नेटवर्क में ये भी थे शामिल।

6. बिशेश्वर प्रसाद

राजेंद्र बालक उच्च विद्यालय के पूर्व प्राचार्य। बच्चा राय के कॉलेज की कॉपी इन्हीं के कॉलेज में जांची गई। मोटी रकम कमाने का आरोप।

7. संजीव कुमार सुमन

राजेंद्र बालक उच्च विद्यालय के कर्मी। स्ट्रांग रूम में दूसरी कॉपी अंदर की। मनचाहा नंबर देने के लिए कॉपी जांच रहे शिक्षकों पर दबाव डाला।