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नीतीश बोले- जमींदारी प्रथा तो खत्म हो चुकी पर लोगों की मानसिकता अब भी नहीं बदली

उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में बंटाई पर खेती करने वाले भी नहीं मिलने वाले हैं।

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 08:07 AM IST
संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री स संगोष्ठी में उपमुख्यमंत्री स

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि चंपारण आंदोलन की इतिहास में उपेक्षा हुई है। जिस तरह से इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को दिशा दी, उस तरह से इसे उचित स्थान नहीं मिला। गांधीजी 1917 में चंपारण आते हैं और 30 वर्षों में देश को आजादी मिल जाती है। पर, इतने बड़े आंदोलन के साथ इतिहास में न्याय नहीं हुआ। जितना बड़ा इसका योगदान था, वैसा स्थान नहीं मिला। चंपारण आंदोलन के महत्व से आने वाली पीढ़ी को भी अवगत कराया जाना चाहिए। सीएम रविवार को विधान परिषद में चंपारण एग्रेरियन बिल, 1918 के सौवें वर्षगांठ पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर थे।

पटना में गांधी के सम्मान में पिलर बनाने की घोषणा की

मुख्यमंत्री ने कहा कि जमींदारी प्रथा का तो उन्मूलन हो गया लेकिन मानसिकता अब भी ठीक नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में बंटाई पर खेती करने वाले भी नहीं मिलने वाले हैं। जिस तरह से शिक्षा का प्रसार हो रहा है, उससे बंटाईदारों के बच्चों का फोकस बदल रहा है। उन्होंने पटना में गांधी के सम्मान में पिलर बनाने की घोषणा की। इसमें गांधी से जुड़ी चीजों को दर्शाया जाएगा।

बटाईदार किसानों को विशेष लाभ देने पर राज्य कर रहा विचार
उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि बटाईदारों को और अधिकार व सुविधाएं मिलनी चाहिए। स्वामित्व तो जमीन मालिकों के पास ही रहे, लेकिन खेती करने वाले बंटाईदारों को सहूलियत-सुविधा मिले। राज्य को इस पर विचार करना होगा। उन्हें खेती के साधनों को लेकर सुविधा देनी होगी। कृषि में अपार संभावना है। यह गांवों की आर्थिक सूरत बदलने की क्षमता रखता है। उनके चंपारण आने के मात्र 11 महीने बाद ही एग्रेरियन बिल पारित करना पड़ा। किसानों को तीनकठिया के साथ विभिन्न करों से मुक्ति मिली।

आजादी के बाद सत्ताधारी ने गांधी सिद्धांत छोड़े
गांधी विचारक व आईटीएम ग्वालियर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रमाशंकर सिंह ने कहा कि नई पीढ़ी के मानस पटल से कुछ हद तक गांधी विस्मरणीय हो गए हैं। इस पीढ़ी के लिए गांधी को रि-डिस्कवर करने की जरूरत है। एक बार फिर बिहार से गांधी के विचारों की आवाज निकलने लगी है। चंपारण में गांधी ने किसानों के लिए संघर्ष किया। स्वतंत्रता के बाद देश में पहली बार जमीनदारी उन्मूलन कानून बिहार में भी लागू हुआ। लेकिन, यह कानून अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाया है।