पटना

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थानेदार बने टीचर, अब स्टूडेंट्स को करा रहे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी

लड़के करीब डेढ़ घंटे तक परीक्षा से जुड़ी तकनीकी पहलुओं का सवाल-जवाब करते रहे।

Danik Bhaskar

Dec 22, 2017, 05:09 AM IST

सुपौल/छातापुर. दिन गुरुवार। सुबह के 09 बज रहे थे। रूटीन कार्यक्रम को छोड़ छातापुर थानाध्यक्ष राजीव कुमार झा थाना में ही 27 यूथ्स को प्रतियोगिता परीक्षा की जानकारी देने लगे। लड़कों में भी खासा उत्साह था और पहली बार किसी पुलिस अफसर में टीचर की छवि देख रहे थे। लड़के करीब डेढ़ घंटे तक परीक्षा से जुड़ी तकनीकी पहलुओं का सवाल-जवाब करते रहे। सभी युवक ग्रेजुएट हैं और सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रयासरत हैं।

तैयारी तो कराएंगे ही आर्थिक सहयोग भी देंगे

बता दें कि थाना में अब रोजाना सुबह 09 से 10 बजे तक बच्चे पहुंचेंगे और सभी को फ्री में बुक्स के साथ-साथ मॉडल प्रश्नपत्र भी थानाध्यक्ष ही उपलब्ध कराएंगे। राजीव कुमार झा ने बताया कि विशेष तौर पर यह अभ्यास वर्ग वैसे बच्चों के लिए है, जो गरीबी के कारण बाहर जा कर नहीं पढ़ पाते हैं। ग्रैजुएट स्टूडेंट्स को प्राथमिकता दी जायेगी। इसके अतिरिक्त गरीब तबके के छात्रों को परीक्षा फॉर्म भरने से लेकर परीक्षा संबंधी यात्रा का भी खर्च उठाएंगे।

एक स्टूडेंट की लगन देख मिली प्रेरणा


थानाध्यक्ष बताते हैं कि डेढ़ माह पूर्व उनके पास घिवहा पंचायत का एक लड़का आया था। वह पुलिस अधिकारी बनना चाहता था। उसकी आर्थिक स्थिति तैयारी के लिए ठीक नहीं थी। उसके लगन को देख निर्णय लिया कि गरीब छात्रों को निशुल्क कोचिंग दूंगा।

स्टूडेंट्स ने कहा- मिलेगी हेल्प


भट्टाबारी के अभय कुमार झा ने बताया कि गरीबी और परिवार की समस्या के कारण बाहर जाकर परीक्षा की तैयारी संभव नहीं थी। इस क्लास में काफी कुछ सीखने को मिलेगा, जिससे परीक्षा आसान होगी। छातापुर राहुल कुमार ने बताया कि परीक्षा में सफलता के लिए किसी मार्गदर्शक का होना जरूरी है। यहां उचित मार्गदर्शक का अभाव है। परामर्श क्लास से निश्चित तौर पर छात्रों का भविष्य संवारेगा।

पुलिस की छवि बदलेगी

छातापुर के अजय कुमार ने बताया कि पुलिस के नाम से ही लोगों के मन में खौफ उत्पन्न हो जाता है। कई लोग तो थाना के नाम तक से डरते हैं। ऐसे में पुलिस का यह पहल सचमुच सराहनीय है। इससे न केवल छात्रों को अपना कैरियर बनाने में लाभ मिलेगा। वहीं लालपुर के मोहम्मद सद्दीक आलम ने बताया कि थानाध्यक्ष द्वारा जिस प्रकार बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है, उसका बेहतर परिणाम मिलना भी तय है।

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