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न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे इस शख्स ने कई लोगों को दिलाई सफलता

कुमार अमित व कुमार आलोक दोनों भाइयों ने बताया कि सेवाभाव से कोचिंग चला रहे हैं। फीस कोई मायने नहीं रखता।

रंजीत पाठक | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:17 AM IST

  • न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे इस शख्स ने कई लोगों को दिलाई सफलता

    हाजीपुर.सुपर थर्टी के संस्थापक गणितज्ञ आनंद, पूर्व डीजीपी अभ्यानंद और रहमानी की तरह हाजीपुर के अमित न्यायिक सेवा की तैयारी कर रहे छात्रों को लगातार सफलता दिला रहे हैं। उन्हें वैशाली का आनंद कहा जाने लगा है। अपने छोटे भाई के साथ मिलकर सेवाभाव से कोचिंग चला रहे हैं। वे खुद उच्चतर न्यायिक सेवा की तैयारी में जुटे हैं।


    कौन हैं अमित

    पिता डाॅ. प्रभुदयाल सहाय चिकित्सा पेशे में हैं। माताजी डाॅ. कुमुद श्रीवास्तव कॉलेज प्रोफेसर थीं। अब रिटायर हो चुकी हैं। ये हाजीपुर के अदलवाड़ी मोहल्ले के रहने वाले हैं। अमित ने विधि शिक्षण संस्थान नागालैंड से विधि में मास्टर डिग्री हासिल की है। मुजफ्फरपुर लॉ कॉलेज से एलएलबी किया है। 2003 से 2005 तक इलाहाबाद के प्रसिद्ध कोचिंग संस्थान में न्यायिक सेवा की तैयारी की थी। न्यायिक सेवा की प्रतियोगी परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद भी उसे स्वीकार नहीं किया। उनका सपना उच्चत्तर न्यायिक सेवा की परीक्षा क्वालीफाई कर जज बनना है। एज लिमिटेशन भी परीक्षा के आड़े आ रहा था।

    इसलिए चर्चा में अमित और उनकी कोचिंग

    हाजीपुर स्टेशन के निकट रेलवे की जमीन पर फूटपाथ पर छोटी सी बर्तन की दुकान चलाते हुए पढ़ाई करने वाले राजू कुमार हाल ही में 29 वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा क्वालीफाई कर सिविल जज बने हैं। सिविल जज बने राजू अमित की कोचिंग में तीन सालों तक पढ़ाई की।

    जिले की पहली सिविल जज का सौभाग्य भी

    वैशाली बार काउंसिल के मुताबिक वैशाली जिले की पहली महिला सिविल जज हाजीपुर की ही रोमी कुमारी बनी थी। अमित का दावा है कि 28 वीं बिहार न्यायिक सेवा परीक्षा 2015 क्वालीफाई कर सिविल जज बनी रोमी भी तीन सालों तक उनके कोचिंग में पढ़ाई की थीं। इनकी सफलता भी अमित के खाते में: मोतिहारी के रहने वाले उमाशंकर नारायण भी तीन सालों तक अमित की कोचिंग में पढ़ाई कर तैयारी पूरी की। 27 वीं न्यायिक सेवा परीक्षा पास कर सिविल जज बने। रेखा रश्मि 16 वीं एक्जाम पास कर एपीओ के लिए चयनित हुईं। 13 वीं प्रतियोगी परीक्षा पास कर अवधेश कुमार सिन्हा व 2004 में सफल होकर अजय कुमार प्रभाकर रेलवे के विधि अधिकारी हैं।

    शहर में स्तरीय कोचिंग की कमी को किया पूरा


    अमित बताते हैं कि कुछ साल पहले तक पूरे बिहार में न्यायिक सेवा की तैयारी कराने वाला कोई स्तरीय कोचिंग नहीं था। कमी अब भी है। उन्हें इलाहाबाद जाकर तैयारी करनी पड़ी। गरीब परिवार के मेघावी बच्चों के लिए बाहर जाकर तैयारी करना संभव नहीं है। इसे देखते हुए मेधावी छात्रों को प्लेटफॉर्म देने के लिए छोटे भाई कुमार आलोक के साथ मिलकर हाजीपुर में अपने आवास पर ही कोचिंग शुरू की। आलोक भी एलएलएम कर चुके हैं। वे भी उच्चत्तर न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।

    फीस कोई मायने नहीं रखता
    कुमार अमित व कुमार आलोक दोनों भाइयों ने बताया कि सेवाभाव से कोचिंग चला रहे हैं। फीस कोई मायने नहीं रखता। नर्सरी क्लास के बच्चे को भी हजार रूपये से कम में टयूशन नहीं मिलता। कोचिंग चलाने का फायदा उन्हें खुद हो रहा है कि उनका स्टडी रिवाईज, मोडिफाईज हो रहा है।

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Web Title: Coaching In Free To Give Platform To Talented Students
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